समान नागरिक संहिता पर एनडीए में मतभेद: टीडीपी और शिवसेना समर्थन में, जेडीयू का बिहार में विरोध
'द इंडियन एक्सप्रेस' में लिज मैथ्यू और जतिन आनंद ने बताया है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी लागू करने के ऐलान के बाद गठबंधन के भीतर अलग-अलग रुख सामने आए हैं. टीडीपी, शिवसेना और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) ने इसका समर्थन किया है, जबकि जेडीयू ने स्पष्ट किया है कि वह बिहार में यूसीसी लागू नहीं होने देगी. कुछ अन्य सहयोगी दलों ने भी अभी अपना रुख तय करने से पहले विचार-विमर्श की बात कही है.
भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए की संसद में बहुमत की स्थिति टीडीपी के समर्थन पर भी निर्भर है. आंध्र प्रदेश में टीडीपी का एक महत्वपूर्ण मुस्लिम वोट आधार है. लोकसभा में टीडीपी नेता लावु कृष्ण देवऱायलु ने कहा कि पार्टी यूसीसी का समर्थन करेगी, लेकिन कानून अपनाने से पहले विभिन्न हितधारकों को विश्वास में लिया जाना चाहिए.
टीडीपी का मौजूदा रुख उसके पुराने रुख से कुछ अलग दिखाई देता है. 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद एनडीए में शामिल होने से पहले आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और टीडीपी प्रमुख एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा था कि यूसीसी के मामले में पार्टी मुस्लिम समुदाय के साथ खड़ी रहेगी. 2011 की जनगणना के अनुसार आंध्र प्रदेश की कुल आबादी 8.45 करोड़ से अधिक थी. इनमें हिंदू आबादी करीब 88 प्रतिशत और मुस्लिम आबादी लगभग 10 प्रतिशत थी.
बिहार में जेडीयू का अलग रुख
बिहार में जेडीयू ने राष्ट्रीय स्तर पर यूसीसी के समर्थन और राज्य में इसके विरोध के बीच अपना रुख स्पष्ट किया है. पार्टी नेता और पूर्व मंत्री श्याम रजक ने कहा कि जेडीयू राष्ट्रीय स्तर पर विधेयक का समर्थन करती है, लेकिन बिहार में इसे लागू नहीं होने देगी.
जेडीयू के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहले भी यूसीसी लागू करने से पहले व्यापक राष्ट्रीय सहमति की जरूरत पर जोर दे चुके हैं. जेडीयू के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय झा ने कहा कि पार्टी इस मुद्दे पर भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ बातचीत करेगी.
बिहार में जेडीयू का रुख राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि राज्य में मुस्लिम मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा पार्टी के चुनावी आधार का हिस्सा रहा है. वहीं, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने कहा है कि वह यूसीसी के संभावित प्रभाव और कानूनी ढांचे को देखकर अपना रुख तय करेगी. पार्टी को अभी विधेयक का प्रारूप या विस्तृत खाका सामने आने का इंतजार है.
पश्चिम बंगाल में जल्द कानून लाने की तैयारी
अमित शाह का बयान पश्चिम बंगाल में भाजपा की बड़ी चुनावी जीत के करीब तीन महीने बाद आया है. पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार यूसीसी का लगातार विरोध करती रही थी. अब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने कहा है कि राज्य की भाजपा सरकार यूसीसी को जल्द से जल्द लागू करने की प्रक्रिया शुरू करेगी.
उन्होंने कहा कि यूसीसी भाजपा का कोई छिपा हुआ एजेंडा नहीं है, बल्कि पार्टी की स्थापना के समय से ही यह उसकी प्रमुख प्राथमिकताओं में रहा है. उनके मुताबिक राज्य की बड़ी आबादी भी समान नागरिक संहिता लागू होते देखना चाहती है.
हालांकि, भाजपा के नए सहयोगी नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया यानी एनसीपीआई ने अभी इस मुद्दे पर कोई अंतिम रुख नहीं अपनाया है. तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर बने इस दल के लोकसभा में 20 सांसद हैं. पार्टी की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि यूसीसी गंभीर विषय है और किसी प्रस्ताव के आने के बाद पार्टी इसके सभी पहलुओं पर चर्चा करेगी.
2011 की जनगणना के अनुसार पश्चिम बंगाल की आबादी करीब 9.13 करोड़ थी. इसमें हिंदू आबादी 70 प्रतिशत से अधिक और मुस्लिम आबादी करीब 27 प्रतिशत थी. ऐसे में राज्य में यूसीसी का मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
शिवसेना और हम का खुला समर्थन
शिवसेना ने अमित शाह के ऐलान का स्पष्ट समर्थन किया है. पार्टी नेता श्रीकांत शिंदे ने यूसीसी को समानता, न्याय और राष्ट्रीय एकता के सिद्धांतों से जुड़ा बताया. उन्होंने कहा कि यह उनके संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की लंबे समय से चली आ रही वैचारिक स्थिति का भी हिस्सा रहा है. शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे यूसीसी लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष कुमार सुमन ने भी अमित शाह के बयान का स्वागत करते हुए पार्टी के पूर्ण समर्थन की घोषणा की.
एनडीए के भीतर यूसीसी को लेकर समर्थन का गणित भी महत्वपूर्ण है. लोकसभा में टीडीपी के 16, शिवसेना के 13, जेडीयू के 12, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के 5 और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) का 1 सांसद है. राज्यसभा में टीडीपी और जेडीयू के चार-चार तथा शिवसेना के दो सदस्य हैं.
इस तरह अमित शाह के यूसीसी लागू करने के लक्ष्य को एनडीए के कई सहयोगी दलों का समर्थन मिलता दिखाई दे रहा है, लेकिन बिहार में जेडीयू का विरोध और पश्चिम बंगाल में एनसीपीआई का अभी फैसला न करना यह दिखाता है कि समान नागरिक संहिता पर गठबंधन के भीतर पूरी एकरूपता नहीं है.

