"तुम बैरवा हो, नीचे बैठो": राजस्थान में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में दलितों को कुर्सियों से उठाने पर प्राथमिकी
‘मकतूब मीडिया’ के मुताबिक, राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के भाकलिया गांव में स्वतंत्रता दिवस के एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान दो दलित पुरुषों को कथित तौर पर कुर्सियों से उठाकर जमीन पर बैठाने का मामला सामने आया है. घटना के बाद पुलिस ने जातिगत भेदभाव और धमकी के आरोपों में पांच लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है.
शिकायत रामेश्वरलाल बैरवा(उम्र 35 वर्ष) और गोपी लाल बैरवा(उम्र 37 वर्ष) ने दर्ज कराई. दोनों का आरोप है कि वे भाकलिया गांव के एक सरकारी स्कूल में आयोजित स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे और कार्यक्रम के लिए लगाई गई कुर्सियों पर बैठे थे. इसी दौरान कुछ लोगों ने कथित तौर पर उन्हें जातिसूचक शब्द कहे और कुर्सियों से उठने के लिए मजबूर किया.
शिकायत के अनुसार आरोपियों ने उनसे कहा, "तुम बैरवा हो, नीचे बैठो. तुम कुर्सियों पर बैठोगे तो हम कहां बैठेंगे? हमारे सामने बैठने का तुम्हें क्या अधिकार है?" दोनों ने आरोप लगाया कि उन्हें डराया-धमकाया गया और कुर्सियां छोड़ने के लिए मजबूर किया गया.
शिकायतकर्ताओं का यह भी आरोप है कि आरोपियों ने उनके समुदाय की दो महिलाओं द्वारा काम किए जा रहे आंगनवाड़ी केंद्र को बंद कराने की धमकी दी. घटना स्कूल के बच्चों, शिक्षकों और गांव के अन्य लोगों की मौजूदगी में हुई. शिकायतकर्ताओं ने कहा कि सार्वजनिक रूप से उनके साथ इस तरह का व्यवहार किए जाने से उन्हें मानसिक आघात पहुंचा और उनके आत्मसम्मान तथा सामाजिक प्रतिष्ठा को चोट लगी.
घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसे स्थानीय निवासी बद्रीलाल बैरवा ने रिकॉर्ड किया था. वीडियो में स्कूल परिसर में कुछ लोगों के बीच बहस होती दिखाई देती है, जबकि बच्चे जमीन पर बैठे नजर आते हैं. वीडियो में बद्रीलाल बैरवा यह कहते सुनाई देते हैं कि देश स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, लेकिन इस तरह की मानसिकता अब भी मौजूद है. उन्होंने वहां मौजूद लोगों की शिक्षा का उल्लेख करते हुए भी सवाल उठाया कि शिक्षित होने के बावजूद ऐसी स्थिति क्यों बनी हुई है.
मामले के सामने आने के बाद भीलवाड़ा जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया गया. प्रदर्शनकारियों ने जिला पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी, पीड़ित परिवारों की सुरक्षा और कथित सामाजिक बहिष्कार को समाप्त करने की मांग की.
बागोर थाने के प्रभारी अधिकारी बछराज चौधरी ने बताया कि मामले की जांच जारी है और जांच की जिम्मेदारी भीलवाड़ा के मंडल क्षेत्र के पुलिस उपाधीक्षक राहुल जोशी को सौंपी गई है.
पुलिस ने पांच आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है. मामले में भारतीय न्याय संहिता की गैरकानूनी जमावड़े और आपराधिक धमकी से संबंधित धाराएं लगाई गई हैं. इसके अलावा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989 के प्रावधान भी लगाए गए हैं.
यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब स्वतंत्रता दिवस जैसे सार्वजनिक और सरकारी कार्यक्रम में समानता और नागरिक सम्मान का संदेश दिया जाता है. आरोप यदि जांच में सही पाए जाते हैं, तो सार्वजनिक कार्यक्रम में केवल जाति के आधार पर बैठने की जगह तय करना और दलित समुदाय के लोगों को अपमानित करना संविधान द्वारा दी गई समानता और गरिमा की भावना पर गंभीर सवाल खड़े करता है.

