श्रवण गर्ग | बैरिकेड सत्ता का सिर है और उस पर विपक्ष सवार हो चुका है
'हरकारा डीप डाइव' के लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी एवं वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग ने 6 अक्टूबर को विपक्षी सांसदों के चुनाव आयोग तक मार्च, उनके डिटेंशन और इसके बाद चल रहे सत्याग्रह के बहाने भारत में लोकतांत्रिक विरोध की सिमटती जगह पर चर्चा की. बातचीत में दिल्ली पुलिस की कार्रवाई, प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार और चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष की मांगों को भी विस्तार से उठाया गया.
श्रवण गर्ग ने मौजूदा स्थिति को लोकतांत्रिक संस्थाओं के कमजोर होने और सरकार के “पुलिस स्टेट” की ओर बढ़ने के संकेत के रूप में देखने का अपना आकलन रखा. उनके मुताबिक, जब राजनीतिक समस्याओं का समाधान राजनीतिक स्तर पर नहीं होता तो पुलिस और सुरक्षा तंत्र की भूमिका बढ़ती जाती है. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और विपक्ष के लिए यह “डू एंड डाई” की लड़ाई बन चुकी है. राहुल गांधी के बैरिकेड पर चढ़ने को उन्होंने दांडी मार्च के संदर्भ से जोड़ते हुए इसे सत्ता के खिलाफ राजनीतिक प्रतिरोध का प्रतीक बताया.
बातचीत में महिलाओं और युवा प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा. गर्ग ने विभिन्न घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि मौजूदा आंदोलन को केवल चुनाव आयोग या ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन मानना सही नहीं होगा. उनके अनुसार, ज्ञानेश कुमार इस व्यापक असंतोष के एक प्रतीक हैं. उन्होंने बेरोजगारी, परीक्षाओं में कथित भ्रष्टाचार और महिलाओं के खिलाफ अपराधों को युवाओं के असंतोष से जोड़ते हुए कहा कि आंदोलन की जड़ें व्यापक सामाजिक समस्याओं में हैं.
गर्ग ने यह भी कहा कि मौजूदा संघर्ष केवल कांग्रेस या राहुल गांधी की राजनीतिक लड़ाई नहीं है, बल्कि सड़कों पर दिखाई दे रही युवाओं की ऊर्जा इसका बड़ा हिस्सा है. उन्होंने आंदोलन को दबाने के लिए दमन के इस्तेमाल की आशंका जताई और अदालतों, पुलिस तथा प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए. उनके मुताबिक, अगर न्यायपालिका की “अंतरात्मा” जागती है और पुलिस तथा नौकरशाही गलत आदेश मानने से इनकार करती है, तो परिस्थितियां बदल सकती हैं.
बातचीत के अंतिम हिस्से में गर्ग ने दावा किया कि सरकार अब केवल संसद में बहुमत के आधार पर नहीं, बल्कि सुरक्षा बलों और संस्थागत समर्थन के सहारे चल रही है. उन्होंने विपक्षी आंदोलन के बढ़ते जनसमर्थन और विभिन्न राजनीतिक समूहों के संभावित एक साथ आने को महत्वपूर्ण बताया. वहीं, निधीश त्यागी ने कहा कि आगे यह देखना अहम होगा कि अदालतें और अन्य संस्थाएं इस पूरे घटनाक्रम पर किस तरह प्रतिक्रिया देती हैं.
पूरी बातचीत हरकारा रोज़ाना के यूट्यूब चैनल पर सुन सकते हैं.

