मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में घायल अवस्था में बचाए गए 19 महीने के एक चीते की मंगलवार को इलाज के दौरान मौत हो गई, जिसके शरीर से बंदूक के पाँच छर्रे बरामद किए गए हैं.
मुख्य वन्यजीव संरक्षक (चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन) समीता राजोरा ने बताया कि 'केएनजी22' के रूप में पहचाने गए भारत में जन्मे इस नर चीते को रविवार को बचाया गया था और शुरुआत में श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क के एक चिकित्सा केंद्र में ले जाया गया था. बाद में विस्तृत जाँच और गहन इलाज के लिए इसे जबलपुर के नानाजी देशमुख पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय में स्थानांतरित कर दिया गया.
‘पीटीआई और टेलीग्राफ वेब डेस्क’ के अनुसार, शुरुआती एक्स-रे में चीते के शरीर के भीतर कई बाहरी वस्तुएं (फॉरेन बॉडीज) दिखाई दीं. इसके बाद किए गए सीटी स्कैन से पता चला कि इन छर्रों ने इसके आंतरिक अंगों, मस्कुलोस्केलेटल सिस्टम (मांसपेशियों और हड्डियों का ढांचा) और तंत्रिका तंत्र को गंभीर नुकसान पहुँचाया था.
आपातकालीन सर्जरी की गई, जिसके दौरान उसके शरीर से बंदूक के पाँच छर्रे निकाले गए. सर्जिकल हस्तक्षेप और पशुचिकित्सकों की टीम के निरंतर प्रयासों के बावजूद नर चीते को बचाया नहीं जा सका.
राज्य सरकार ने जानवर के घायल होने और मौत की परिस्थितियों की जाँच के लिए वन और पुलिस अधिकारियों को मिलाकर स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया है.
इस मौत के बाद भारत में चीतों की कुल संख्या घटकर 58 रह गई है: जिनमें से 52 कूनो नेशनल पार्क में, चार गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में और दो वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में हैं — ये सभी मध्य प्रदेश में स्थित हैं.
सोमवार को जब समीता राजोरा से पूछा गया कि क्या जानवर पर हमला हुआ था, तो उन्होंने कहा कि यह तय करना जल्दबाज़ी होगी कि वह तेंदुए जैसे किसी जंगली जानवर से घायल हुआ था या इंसानों द्वारा. राजोरा ने पुष्टि की कि पहाड़गढ़ इलाका हाल ही में तेंदुए के कथित अवैध शिकार रैकेट को लेकर वन्यजीव प्रेमियों के ध्यान में आया था, जिसमें कथित तौर पर एक प्रमुख एनजीओ का नाम सामने आया था. जाँचकर्ताओं ने इससे पहले व्यापक कूनो, मुरैना और श्योपुर परिदृश्य के वन मंडलों में कम से कम 10 तेंदुओं के शिकार को इस रैकेट से जोड़ा था.

