बांग्लादेश भेजे गए पश्चिम बंगाल के चार भारतीय नागरिक एक साल बाद लौटे भारत
‘स्क्रोल’ के मुताबिक,पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के चार निवासी, जिन्हें जून 2025 में कथित तौर पर बांग्लादेश भेज दिया गया था, बुधवार को भारत लौट आए. इनमें दानिश शेख, स्वीटी बीबी और उनके दो बेटे शामिल हैं. चारों मालदा जिले के महदीपुर सीमा चौकी के रास्ते पश्चिम बंगाल पहुंचे. इससे पहले दिसंबर 2025 में दानिश की पत्नी सुनाली खातून और उनके बेटे साबिर को मानवीय आधार पर भारत वापस लाया गया था. सुनाली उस समय गर्भवती थीं.
परिवार का कहना है कि छहों लोगों को दिल्ली में हिरासत में लेने के बाद बांग्लादेश भेज दिया गया था, जबकि वे लगातार खुद को पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले का निवासी और भारतीय नागरिक बताते रहे.
22 मई को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि इन लोगों की नागरिकता का सत्यापन करने के लिए उन्हें भारत वापस लाया जाएगा. यह मामला तब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जब केंद्र ने कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें छहों को चार सप्ताह के भीतर पश्चिम बंगाल वापस लाने का निर्देश दिया गया था. हाई कोर्ट ने यह आदेश सुनाली खातून के पिता भोधू शेख की याचिका पर दिया था. हालांकि, तय समयसीमा समाप्त होने से पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि इस मामले की सुनवाई का अधिकार क्षेत्र हाई कोर्ट के पास नहीं था.
अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भाजपा शासित कई राज्यों में बंगाली भाषी लोगों, विशेषकर मुस्लिम समुदाय के लोगों, की नागरिकता की जांच के नाम पर कार्रवाई तेज हुई थी. कई लोगों को कथित तौर पर भारतीय नागरिकता साबित नहीं कर पाने के आधार पर बांग्लादेश भेज दिया गया. बाद में कुछ मामलों में भारतीय नागरिकता की पुष्टि होने पर उन्हें वापस भारत लाया गया. यह मामला भी ऐसे ही मामलों में शामिल है, जिसमें निर्वासन की प्रक्रिया और उसके पालन को लेकर सवाल उठे हैं.

