‘आरएसएस छिपकर काम कर रहा है’: मोहन भागवत की ब्रिटेन यात्रा के खिलाफ संसद के बाहर सैकड़ों लोगों का प्रदर्शन
'मकतूब मीडिया' में प्रकाशित पी. पी. जसीम की रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार को लंदन के पार्लियामेंट स्क्वायर में सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की ब्रिटेन यात्रा का विरोध किया. प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि आरएसएस अपने अंतरराष्ट्रीय दौरे के दौरान भागवत के कार्यक्रमों को सार्वजनिक नजरों से दूर रखने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि उसे जनविरोध का डर है.
प्रदर्शन का आयोजन ब्रिटेन इंडियन मुस्लिम काउंसिल, साउथ एशिया सॉलिडेरिटी ग्रुप, ह्यूमन्स फॉर ह्यूमन राइट्स, इंडिया लेबर सॉलिडेरिटी और स्ट्राइवयूके समेत कई संगठनों के गठबंधन ने किया था. इसमें भारतीय, दक्षिण एशियाई और ब्रिटिश संगठनों के कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया.
प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन की यात्रा के दौरान भागवत के कार्यक्रमों को लेकर आरएसएस की गतिविधियां लगातार गोपनीय होती जा रही हैं. उनका कहना था कि संगठन को आशंका है कि सार्वजनिक रूप से कार्यक्रमों की जानकारी सामने आने पर विरोध और तेज हो सकता है.
ह्यूमन्स फॉर ह्यूमन राइट्स यूके के निदेशक राजीव सिन्हा ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि अमेरिका के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में भागवत के दौरे का विरोध हुआ था. इसके बाद कनाडा में भी कार्यक्रमों का प्रचार सीमित रखा गया. उनके अनुसार, ब्रिटेन में आरएसएस की गोपनीयता और बढ़ गई है तथा पिछले एक सप्ताह से कार्यक्रमों की जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा रही है.
ब्रिटेन इंडियन मुस्लिम काउंसिल के नईम बदरुज्जमान ने आरोप लगाया कि आरएसएस ने अपनी पहचान, विचारधारा और वास्तविक उद्देश्य छिपाकर लोगों से मिलने का अवसर हासिल किया. उन्होंने कहा कि कई इमामों और धार्मिक नेताओं ने सार्वजनिक रूप से यह बताया है कि उन्हें संगठन की वास्तविक पहचान के बारे में गुमराह किया गया.
ब्रिटेन में कार्यक्रमों की गोपनीयता पर सवाल
भागवत की यात्रा के खिलाफ विरोध की शुरुआत अमेरिका से हुई थी. न्यूयॉर्क में उनके दौरे से जुड़े एक आयोजन स्थल के बाहर प्रदर्शन किया गया था. लंदन में प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अमेरिका में विरोध के बाद ब्रिटेन में भागवत के कार्यक्रमों की जानकारी को लेकर गोपनीयता बढ़ गई.
प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि ब्रिटेन में भागवत के कार्यक्रमों, विशेषकर अंतरधार्मिक आयोजन ‘वननेस सेलिब्रेशन’, की जानकारी प्रेस तक को पूरी तरह नहीं दी गई. उनके अनुसार, यह कदम संभावित विरोध से बचने के लिए उठाया गया.
साउथ एशिया सॉलिडेरिटी ग्रुप की कल्पना विल्सन ने भागवत के दौरे के दौरान आयोजित अंतरधार्मिक कार्यक्रम की आलोचना की. उन्होंने कहा कि ‘सार्वभौमिक एकता’ के नाम पर आरएसएस की छवि को साफ करने की कोशिश की जा रही है. विल्सन ने आरोप लगाया कि इस तरह की एकता वास्तव में वैश्विक फासीवाद, इस्लामोफोबिया और जियोनिज्म की एकता को दर्शाती है.
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि ब्रिटेन में भागवत के कार्यक्रमों की सार्वजनिक जानकारी का अभाव इस बात का संकेत है कि आयोजक आगे होने वाले विरोध से चिंतित हैं. उनका दावा था कि आरएसएस अपनी विचारधारा और प्रभाव को लेकर ब्रिटेन में बढ़ती आलोचना का सामना कर रहा है.
अल्पसंख्यक और मानवाधिकार संगठनों की मांग
पार्लियामेंट स्क्वायर में जुटे प्रदर्शनकारियों ने भागवत की यात्रा की अधिक गंभीर जांच की मांग की. उन्होंने ब्रिटिश राजनीतिक और नागरिक संस्थानों से अपील की कि वे आरएसएस की विचारधारा और भारतीय प्रवासी समुदाय के बीच उसके प्रभाव को लेकर अल्पसंख्यक तथा मानवाधिकार संगठनों की चिंताओं पर ध्यान दें.
प्रदर्शन में शामिल संगठनों ने कहा कि भागवत की यात्रा को केवल सांस्कृतिक या अंतरधार्मिक संवाद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. उनके अनुसार, आरएसएस की राजनीतिक विचारधारा, अल्पसंख्यकों के प्रति उसका रवैया और भारत में उसके प्रभाव से जुड़े सवालों पर सार्वजनिक बहस जरूरी है.
प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय दौरे के कार्यक्रमों को सार्वजनिक रखा जाना चाहिए, ताकि नागरिक समाज, मीडिया और प्रभावित समुदायों को अपनी आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर मिल सके. उनके अनुसार, कार्यक्रमों को गोपनीय रखने से पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर संदेह पैदा होता है.
यह प्रदर्शन भागवत की अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन यात्रा के दौरान आरएसएस के खिलाफ बढ़ते विरोध का हिस्सा है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि संगठन को अपनी विचारधारा और कार्यक्रमों को लेकर सार्वजनिक सवालों का जवाब देना चाहिए, न कि उनसे बचने के लिए कार्यक्रमों को सीमित या गोपनीय रखना चाहिए.

