आईआईटी मंडी में ‘शूद्रों को उच्च वर्गों की सेवा करनी चाहिए’ वाले पोस्टर पर जांच के आदेश
‘पीटीआई’ की रिपोर्ट के अनुसार, आईआईटी मंडी ने अपने परिसर में लगे एक पोस्टर को लेकर जांच के आदेश दिए हैं, जिसमें लिखा था कि "शूद्रों को उच्च वर्गों की सेवा करनी चाहिए." "भगवद्गीता – द टाइमलेस विजडम" (भगवद्गीता – कालातीत ज्ञान) शीर्षक से यह पोस्टर संस्थान के सभागार के बाहर प्रदर्शित किया गया था और इसमें समाज को ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र में विभाजित किया गया था.
पोस्टर में ब्राह्मणों की भूमिका "ईश्वर के संदेश का प्रसार करना", क्षत्रियों की "समाज और आध्यात्मिकता की रक्षा करना", वैश्यों की "अर्थव्यवस्था को चलाना, दूसरों का समर्थन करना" और शूद्रों की "उच्च वर्गों की सेवा करना" बताई गई थी. रविवार (6 सितंबर) को आईआईटी मंडी समुदाय को भेजे एक ईमेल में, संस्थान के निदेशक लक्ष्मीधर बेहरा ने कहा कि वे 4 सितंबर को जन्माष्टमी समारोह के दौरान प्रदर्शित इस पोस्टर के बारे में जानकर "स्तब्ध" थे.
"परिसर के भीतर हाल ही में प्रदर्शित पोस्टर की स्पष्ट निंदा" शीर्षक वाले अपने ईमेल में, बेहरा ने कहा कि पोस्टर को संस्थान द्वारा "किसी भी तरह से" अनुमोदित नहीं किया गया था.
पीटीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि बेहरा का खुद इस्कॉन से लंबा जुड़ाव रहा है. वर्तमान में वह आईआईटी मंडी में तीन-क्रेडिट का गीता पाठ्यक्रम पढ़ाते हैं और प्रस्तावित भक्तिवेदान्त विश्वविद्यालय के संस्थापक हैं, जो खुद को एक इस्कॉन पहल के रूप में वर्णित करता है.
बेहरा ने पीटीआई को बताया कि इस मामले की जांच के लिए संकाय सदस्यों और अनुसूचित जाति व अन्य पिछड़ा वर्ग सहित विभिन्न सामाजिक श्रेणियों के प्रतिनिधियों वाली एक समिति का गठन किया गया है.
आईआईटी मंडी के निदेशक पद पर अपनी नियुक्ति के तुरंत बाद, बेहरा खुद उस समय विवादों में घिर गए थे जब इंटरनेट पर एक वीडियो सामने आया था जिसमें उन्हें यह कहते सुना गया था कि वह "पवित्र मंत्रों" का जाप करके अपने दोस्त के अपार्टमेंट और परिवार को "दुष्ट आत्माओं" से मुक्त कराने के लिए भूत भगाने (झाड़-फूंक) के कृत्य में शामिल थे. 2023 में, उन्होंने यह दावा करते हुए छात्रों को मांस न खाने की शपथ दिलाई थी कि हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन और बादल फटने की घटनाएं जानवरों के प्रति क्रूरता के कारण हो रही थीं.

