‘पुलिस आरएसएस की गुलाम नहीं’: प्रियंक खड़गे ने संघ से पथ संचलन के लिए अनुमति मांगने को कहा
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के साथ अपनी ताजा तल्खी में, गृह मंत्री प्रियंक खड़गे ने संघ से 25 अक्टूबर को अपने विजयादशमी पथ संचलन आयोजित करने के लिए अनुमति मांगने को कहा है.
भरत जोशी की रिपोर्ट के अनुसार, प्रियंक ने इस बात पर नाराजगी जताई कि आरएसएस पुलिस को पथ संचलन के बारे में "केवल सूचित" कर रहा है. उन्होंने पत्रकारों से कहा, "पुलिस आरएसएस के गुलामों की औलाद नहीं है." इससे पहले एक ट्वीट में प्रियंक ने आरएसएस प्रतिनिधियों द्वारा लिखे गए दो पत्र पोस्ट किए—एक महालक्ष्मी लेआउट पुलिस स्टेशन को और दूसरा नंदिनी लेआउट को. पहला पत्र पुलिस से "सहयोग" मांगता है, और दूसरा केवल एक सूचना है.
प्रियंक ने लिखा, "आरएसएस के मेरे प्यारे स्वयंसेवकों, उम्मीद है कि दशहरा का उत्सव पूरे जोर-शोर से चल रहा होगा! आपका उत्साह कम नहीं करना चाहता, लेकिन एक विनम्र स्मरण: गृह विभाग को केवल सूचित करना या सहयोग करने/जरूरी व्यवस्था करने के लिए कहना, अनुमति प्राप्त करने के समान नहीं है. कृपया सभी संगठनों पर लागू निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अपना आवेदन जमा करें और सक्षम अधिकारियों से औपचारिक मंजूरी का इंतजार करें."
अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 का हवाला देते हुए प्रियंक ने कहा कि आरएसएस ने पूरे कर्नाटक में 562 पथ संचलन आयोजित किए, जिनमें 2.21 लाख गणवेशधारी (यूनिफॉर्म पहने) प्रतिभागी शामिल थे.
प्रियंक ने कहा, "अब, जब आपमें से लाखों लोग एक ही दिन और एक ही समय पर कर्नाटक की सड़कों पर मार्च करने का इरादा रखते हैं, तो पुलिस विभाग को काफी तैयारियां करनी पड़ती हैं: कर्मियों की तैनाती, परिवहन, भोजन, यातायात प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य रसद (लॉजिस्टिक्स). इन सभी के लिए योजना, जनशक्ति और सार्वजनिक संसाधनों की आवश्यकता होती है." उन्होंने कहा, "इसलिए, कृपया निर्धारित आवेदन पत्र भरें, आवश्यक विवरण प्रदान करें और औपचारिक अनुमति का इंतजार करें."
पत्रकारों से बात करते हुए प्रियंक ने कहा कि आरएसएस कानून से ऊपर नहीं है. उन्होंने कहा, "यदि आप गणेश जुलूस निकालना चाहते हैं, तो क्या आप सूचित करते हैं या अनुमति मांगते हैं? यदि आप कोई ऐसा कार्यक्रम आयोजित करना चाहते हैं जिसमें सड़क के एक हिस्से का उपयोग करने की आवश्यकता हो, तो क्या आप सूचित करते हैं या अनुमति मांगते हैं? वही कानून आरएसएस सहित सभी पर लागू होता है." प्रियंक ने कहा, "यदि हमें यह उचित लगेगा, तो अनुमति दी जाएगी. हम अनुमति देने से मना नहीं करेंगे." उन्होंने कहा, "हम सरकार हैं. मेरे सहित सभी के लिए एक प्रक्रिया है."

