ऑनलाइन गेमिंग पर सरकार का ‘कंट्रोल मोड’: नए नियम लागू, पैसे वाले गेम्स पर सख्ती
भारत सरकार ने देश के तेजी से बढ़ते ऑनलाइन गेमिंग बाजार को विनियमित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. करोड़ों उपयोगकर्ताओं और बढ़ते वित्तीय लेनदेन को देखते हुए, केंद्र सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग का प्रचार और विनियमन नियम, 2026 को अधिसूचित कर दिया है. ये नए नियम आगामी 1 मई से प्रभावी होने जा रहे हैं.
इस नए ढांचे के तहत सबसे बड़ा बदलाव 'भारतीय ऑनलाइन गेमिंग प्राधिकरण' का गठन है. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत काम करने वाला यह नियामक यह तय करेगा कि कौन सा गेम 'ऑनलाइन मनी गेम', 'ऑनलाइन सोशल गेम' या 'ई-स्पोर्ट्स' की श्रेणी में आता है. इस प्राधिकरण की कमान पूरी तरह से सरकार के हाथों में होगी, जिसमें गृह, वित्त और खेल जैसे विभिन्न मंत्रालयों के प्रतिनिधि शामिल होंगे.
सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी गेम्स के लिए अनिवार्य पंजीकरण की आवश्यकता नहीं होगी. यह प्रक्रिया केवल उन्हीं गेम्स के लिए अनिवार्य होगी जिन्हें नियामक विशेष रूप से निर्देशित करेगा या जो ई-स्पोर्ट्स के अंतर्गत आते हैं. सरकार लेनदेन के मूल्य और गेम के पैमाने के आधार पर भी कुछ श्रेणियों को पंजीकरण के लिए अधिसूचित कर सकती है.
इन नियमों की एक खास बात यह है कि अब बैंकों और पेमेंट गेटवे जैसे वित्तीय संस्थानों को भी जवाबदेह बनाया गया है. किसी भी गेमिंग प्लेटफॉर्म को भुगतान की सुविधा देने से पहले इन संस्थानों को उसकी नियामक स्थिति की जांच करनी होगी. यदि ‘ओजीएआई’ किसी मनी गेम के खिलाफ निर्देश जारी करता है, तो बैंकों को तत्काल प्रभाव से उसके लेनदेन रोकने होंगे.
उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा और लत से बचाव के लिए कई तकनीकी प्रावधान किए गए हैं. गेमिंग कंपनियों को अब आयु सत्यापन, समय की पाबंदी, पैरेंटल कंट्रोल और फेयर-प्ले मॉनिटरिंग जैसे फीचर्स अनिवार्य रूप से देने होंगे. इसके अलावा, शिकायतों के निपटारे के लिए दो-स्तरीय व्यवस्था बनाई गई है, जहाँ उपयोगकर्ता अपनी समस्या पहले कंपनी के पास और फिर सरकारी अपीलीय प्राधिकरण के पास ले जा सकेंगे.
डेटा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए नए नियमों में डेटा स्थानीयकरण का प्रावधान भी शामिल है. यानी अब गेमिंग प्लेटफॉर्म्स को भारतीय उपयोगकर्ताओं से संबंधित ट्रैफिक और डेटा को भारत के भीतर ही स्टोर करना होगा.
इन नियमों के जरिए सरकार एक समान राष्ट्रीय ढांचा लागू करना चाहती है, जिससे अलग-अलग राज्यों में मौजूद नियामकीय असमानता खत्म हो सके. अब तक कई राज्य अपने-अपने तरीके से ऑनलाइन गेमिंग को नियंत्रित कर रहे थे, जिससे कंपनियों के लिए काम करना जटिल हो जाता था. नया फ्रेमवर्क इस भ्रम को दूर करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए दोधारी तलवार साबित हो सकती है. एक ओर इससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर स्टार्टअप्स और निवेशकों के लिए अनुपालन लागत बढ़ सकती है. खासकर रियल-मनी गेमिंग से जुड़े प्लेटफॉर्म्स को अपने बिजनेस मॉडल में बदलाव करना पड़ सकता है.
आने वाले समय में ‘ओजीएआई’ द्वारा जारी दिशा-निर्देश इस सेक्टर की दिशा तय करेंगे. फिलहाल इतना तय है कि भारत में ऑनलाइन गेमिंग का दौर जारी रहेगा, लेकिन अब यह पूरी तरह नियमों के दायरे में होगा.यह खबर ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से लिया गया है.

