केंद्र सरकार द्वारा गठित 40 सदस्यीय राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड में श्रमिकों और नियोक्ताओं के प्रतिनिधियों के लिए निर्धारित 14 सीटों में से छह आरएसएस से जुड़े भारतीय मजदूर संघ और लघु उद्योग भारती को मिली हैं. वहीं, सीटू और एटक समेत अधिकांश मान्यता प्राप्त ट्रेड यूनियनों को बोर्ड से बाहर रखा गया है.
भारत के असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के कल्याण के लिए गठित नए बोर्ड में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े संगठनों को प्रमुखता दी गई है. इसके चलते देश की अधिकांश मान्यता प्राप्त ट्रेड यूनियनों को बोर्ड में प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया है.
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने शुक्रवार को राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड (एनएसएसबी) के गठन की अधिसूचना जारी की. सामाजिक सुरक्षा संहिता के तहत गठित इस बोर्ड को गिग वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाएं तैयार करने, उनकी निगरानी करने और सरकार को सुझाव देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
सरकार ने तीन साल के कार्यकाल के लिए 40 सदस्यीय बोर्ड का गठन किया है. इसमें श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों के लिए सात और नियोक्ता संगठनों के प्रतिनिधियों के लिए सात सीटें निर्धारित की गई हैं. शेष सदस्य विभिन्न सरकारी विभागों और संसद से लिए गए हैं.
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, श्रमिकों और नियोक्ताओं के प्रतिनिधियों के लिए निर्धारित 14 सीटों में से छह आरएसएस से जुड़े दो संगठनों—भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) और लघु उद्योग भारती—को मिली हैं.
श्रमिकों के प्रतिनिधियों के लिए निर्धारित सात सीटों में से तीन पर आरएसएस से संबद्ध ट्रेड यूनियन बीएमएस के प्रतिनिधि हैं. वहीं, नियोक्ताओं के प्रतिनिधियों के लिए निर्धारित सात सीटों में से तीन लघु उद्योग भारती को मिली हैं. यह संगठन सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के कल्याण के लिए काम करता है और आरएसएस से जुड़ा हुआ है.
इसके उलट, सरकार से मान्यता प्राप्त 12 ट्रेड यूनियनों में से अधिकांश को बोर्ड में जगह नहीं मिली है. इनमें सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) और ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) जैसे प्रमुख संगठन भी शामिल हैं.
राज्यों के प्रतिनिधित्व के मामले में भी यही स्थिति सामने आई है. रिपोर्ट के अनुसार, बोर्ड में केवल भाजपा शासित राज्यों—महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, गुजरात और पश्चिम बंगाल—के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है. अन्य राज्यों को इसमें प्रतिनिधित्व नहीं मिला है.

