मणिपुर एनआरसी विवाद: प्रदर्शनकारियों ने निकाली रैली, मुख्यमंत्री और गृह मंत्री का फूंका पुतला
एनआरसी को अपडेट करने की मांग को लेकर बुलाया गया 48 घंटे का आम बंद बुधवार को समाप्त होने के साथ ही प्रदर्शनकारियों ने मणिपुर के घाटी वाले जिलों के विभिन्न हिस्सों में राजनेताओं के पुतले फूंके और रैलियां निकालीं.
‘पीटीआई’ के अनुसार, इम्फाल ईस्ट जिले के खुरई लामलोंग में बंद समर्थकों ने मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह और गृह मंत्री गोविंददास कोंथौजम के पुतले जलाए. उन्होंने "नो एनआरसी, नो सेंसस" (एनआरसी नहीं, तो जनगणना नहीं) जैसे नारे लगाए और मांग की कि जब तक आंतरिक रूप से विस्थापित लोग अपने मूल स्थानों पर वापस नहीं लौट जाते, तब तक जनगणना आयोजित न की जाए.
इम्फाल वेस्ट जिले के सिंगजामेई में भी दर्जनों प्रदर्शनकारियों ने एक विरोध रैली निकाली और अपनी मांगों को लेकर लगभग 2 किलोमीटर तक मार्च किया. इम्फाल वेस्ट, इम्फाल ईस्ट, बिष्णुपुर और थोउबल जिलों में कई स्थानों पर सड़कें अवरुद्ध रहीं, जहां बंद समर्थकों ने निजी वाहनों के साथ-साथ सुरक्षा बलों को भी आगे बढ़ने से रोका और उन्हें वापस जाने को कहा.
अधिकारियों ने बताया कि थोउबल जिले में सुपरवाइजरों, प्रगणकों और फील्ड ट्रेनरों के लिए आयोजित जनगणना प्रशिक्षण कार्यक्रम को भी रद्द कर दिया गया.
इस बीच, कौंसिल ऑफ टीचर्स एसोसिएशंस (सीओटीए), मणिपुर ने कहा कि वह उन परिस्थितियों से "अत्यधिक व्यथित" है, जिनके तहत जनगणना का प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा था.
इधर, 'कैंपेन फॉर जस्ट एंड फेयर डिलिमिटेशन' (जेएफडी) ने घोषणा की कि वह अपने आंदोलन के अगले चरण के रूप में गुरुवार से राज्य और केंद्र सरकार के कार्यालयों का बहिष्कार करेगा. जेएफडी के संयोजक जीतेंद्र निंगोंबा ने पत्रकारों को बताया, "जल, बिजली और चिकित्सा जैसी आवश्यक सेवाओं को इस बहिष्कार से छूट दी जाएगी."
मनोज आनंद के मुताबिक, इम्फाल ईस्ट, इम्फाल वेस्ट, थोउबल, काकचिंग और बिष्णुपुर में बाजार, शैक्षणिक संस्थान, व्यापारिक प्रतिष्ठान और सार्वजनिक परिवहन काफी हद तक बंद रहे. सरकारी कार्यालयों में उपस्थिति बेहद कम दर्ज की गई. सड़कों पर कुछ निजी वाहन दिखाई दिए, लेकिन सार्वजनिक वाहन सड़कों से नदारद रहे. इम्फाल ईस्ट और इम्फाल वेस्ट के कुछ हिस्सों में बंद समर्थकों ने बांस के खंभों और पत्थरों से सड़कों को अवरुद्ध किया, विरोध प्रदर्शन किए और "नो एनआरसी नो सेंसस" (एनआरसी नहीं तो जनगणना नहीं) के पोस्टर लगाए.
उधर, तेंगनौपाल जिले में नागरिक समाज संगठनों ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर 24 अगस्त से 48 घंटे के पूर्ण बंद की चेतावनी दी है. उनका कहना है कि यदि राज्य सरकार मोरेह और तेंगनौपाल के प्रमुख स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों के तबादले और पदस्थापना पर राज्यपाल के आदेश को लागू करने में विफल रहती है, तो राष्ट्रीय राजमार्ग को बंद किया जाएगा. इस बीच, मणिपुर में एनआरसी की मांग पर निर्णय लेने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ बैठक की अटकलों के बीच मणिपुर के राज्यपाल अजय के. भल्ला बुधवार को नई दिल्ली रवाना हो गए.

