फ़िलिस्तीन के समर्थन में उठा सुर: ‘दोनना’ बना दमन के खिलाफ वैश्विक प्रतिरोध का गीत
बर्लिन की कलाकार सिबा अलखियामी द्वारा लिखा और गाया गया गीत दोनना साल 2026 में सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है, जबकि यह गीत मूल रूप से 2024 में बनाया गया था. आर्टिस्ट मंकी मैन के साथ तैयार किया गया यह ट्रैक अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोर रहा है.
यह गाना अरबी में लिखा गया है. “दोनना” का अर्थ है “हमारे बिना”, और यह गीत अपने गहरे राजनीतिक और मानवीय संदेश के कारण लोगों को प्रभावित कर रहा है. इस गाने को व्यापक रूप से इज़राइल द्वारा फ़िलिस्तीनियों पर किए जा रहे दमन के खिलाफ एक कलात्मक प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है. गीत में उपनिवेशवाद, शोषण ,नस्लवाद और मानवता के खिलाफ अत्याचार जैसे मुद्दों को उठाया गया है.
गीत के बोल बेहद भावनात्मक और तीख़े हैं, इसका हिंदी में अनुवाद कुछ यूं है:
हमारी जड़ों को उखाड़ फेंको
हमारे घरों को ढहा दो…
हमारे वजूद को अपराध घोषित करो और
हमारी हक़ीक़त को झूठा
हमारे अपनों को हमसे जुदा कर दो
हमारे बच्चों का क़त्ल
हमारे ख़ून को पानी करो
हमारी आवाज़ और इंक़लाब को बदनाम
हमारा ज्ञान छीन लो
हमारी जनता को बदगुमां रखो
हमारे देशों पर क़ब्ज़ा करो
हमारे शासक खुद चुनो…
हमारे देवताओं को अपना लो
हमारे पेड़ों को जला दो…
“लेकिन तुम हमारे बिना क्या हो?”
कुछ भी नहीं!
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है. इंस्टाग्राम पर सिबा अलखियामी के प्रोफाइल पर इस गाने को 4.4 मिलियन से ज़्यादा बार देखा जा चुका है, जबकि एक्स पर इसके क्लिप्स को 258 हजार से अधिक व्यूज़ मिल चुके हैं. कई लोग इस गाने को डिजिटल विरोध के रूप में साझा कर रहे हैं, खासकर युवा पीढ़ी के बीच यह तेजी से फैल रहा है. “दोनना” ने वैश्विक स्तर पर एक नई बहस को जन्म दिया है और यह दिखाता है कि संगीत किस तरह सीमाओं के पार जाकर लोगों की आवाज़ बन सकता है

