मोदी बनाम ममता: पूरा दिल्ली दरबार उतर आया है एक राज्य के चुनाव को जीतने?
कोलकाता में केंद्रीय बल प्रमुखों की बैठक: ममता बनर्जी ने 'हस्तक्षेप' का आरोप लगाया
टेलीग्राफ की ब्यूरो रिपोर्ट के अनुसार, रविवार को सीआरपीएफ (CRPF), बीएसएफ (BSF), सीआईएसएफ (CISF), एसएसबी (SSB) और आईटीबीपी (ITBP) के महानिदेशकों ने कोलकाता में एक उच्च स्तरीय बैठक की. इस बैठक का उद्देश्य बंगाल चुनाव के लिए एक "मजबूत और तकनीक आधारित सुरक्षा ढांचा" तैयार करना था. चुनाव के दौरान बंगाल में केंद्रीय बलों की लगभग 2,500 कंपनियां (करीब 2 लाख जवान) तैनात की जाएंगी.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राज्य के चुनावों में "मिलिट्री" भेज रही है और सभी एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है. वहीं, टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर इसे बीजेपी के "पालतू आईपीएस अधिकारियों" का जमावड़ा बताया, जो चुनाव में हस्तक्षेप करने की कोशिश कर रहे हैं. दूसरी ओर, सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि यह बैठक निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए एक सामान्य प्रक्रिया थी.विभिन्न रिपोर्टों और संकलनों के अनुसार, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार और केंद्र के बीच लगभग बहुत सारे मुद्दों और मोर्चों पर टकराव चल रहा है. इनमें प्रमुख रूप से चुनावी रणनीतिकार संस्था I-PAC के दफ्तरों पर ईडी (ED) के छापे और उसके सह-संस्थापक विनेश चंदेल की गिरफ्तारी शामिल है. ममता बनर्जी का आरोप है कि केंद्रीय एजेंसियां उनके 800 से ज्यादा बूथ एजेंटों को गिरफ्तार करने की योजना बना रही हैं. इसके अलावा, केंद्र द्वारा मनरेगा और आवास योजनाओं के ₹2 लाख करोड़ के फंड को रोकना, मतदाता सूची से 12% मतदाताओं (करीब 90 लाख) के नाम हटाना और मुस्लिम बहुल ज़िलों में भारी संख्या में नाम काटे जाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं. ममता बनर्जी ने यह भी दावा किया है कि चुनाव आयोग और केंद्रीय बल बीजेपी के इशारे पर काम कर रहे हैं, जो संघीय ढांचे के लिए खतरा है. इसके बारे में आप हरकारा यूट्यूब चैनल पर निधीश त्यागी की वरिष्ठ पत्रकार राजेश चतुर्वेदी से बातचीत को सुन सकते हैं.
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बंगाल चुनाव में आरएसएस का 'साइलेंट' अभियान: हिंदुत्व के एकीकरण के लिए ज़मीनी घेराबंदी
द टेलीग्राफ इंडिया के लिए स्नेहमय चक्रवर्ती की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल में बीजेपी के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) इस बार 'परदे के पीछे' से एक अभूतपूर्व अभियान चला रहा है. 2021 के चुनावों में निष्क्रिय रहने वाला संघ इस बार अपने 35 सहयोगी संगठनों के साथ मिलकर हिंदुओं के बीच पैठ बना रहा है. संघ के स्वयंसेवक और कार्यकर्ता इसे "अस्तित्व की लड़ाई" बताकर घर-घर जा रहे हैं. बंगाल में संघ की शाखाओं की संख्या 15 साल पहले के 530 से बढ़कर अब 4,300 हो गई है. संघ ने पूरे बंगाल को उत्तर, मध्य और दक्षिण ज़ोन में बांटा है. इनके कार्यकर्ता बड़ी रैलियों के बजाय चाय की दुकानों, मंदिरों और घरों में छोटी बैठकें कर रहे हैं.
इस अभियान में करीब 38 आश्रम और कई हिंदू सामाजिक-धार्मिक संगठन भी शामिल हैं. संघ का मुख्य ज़ोर तीन 'मंत्रों' पर है: "पहले मतदान, फिर जलपान", शत-प्रतिशत मतदान सुनिश्चित करना और 'नोटा' (NOTA) से बचना. रिपोर्ट बताती है कि संघ न केवल मतदाताओं को जागरूक कर रहा है, बल्कि बीजेपी के पुराने नेताओं और सुवेंदु अधिकारी जैसे नए चेहरों के बीच के मतभेदों को दूर करने के लिए 'समन्वय बैठकें' भी कर रहा है. संघ का लक्ष्य भ्रष्टाचार और सुरक्षा के मुद्दों पर हिंदू मतदाताओं को एकजुट करना है.
मतदाता सूची से नाम कटने का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से मांगी रिपोर्ट
द हिंदू की 20 अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है. वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत ने अदालत को बताया कि मतदाता सूची से जुड़े विवादों को सुलझाने के लिए बनाए गए अपीलीय ट्रिब्यूनल (Appellate Tribunals) काम नहीं कर रहे हैं और वहां वकीलों को अनुमति नहीं दी जा रही है. इस पर मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच ने गहरी नाराजगी जताई और उसी दिन कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से रिपोर्ट तलब करने की बात कही.
अदालत ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि जिन लोगों की अपील 21 या 27 अप्रैल तक स्वीकार कर ली जाती है, उनके नाम पूरक मतदाता सूची में शामिल किए जाएं ताकि वे वोट डाल सकें. हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल अपील लंबित होने के आधार पर किसी को वोट देने का अधिकार नहीं मिलेगा. बंगाल में मतदाता सूची के इस विशेष पुनरीक्षण के दौरान करीब 90 लाख नाम हटाए गए हैं, जिसे लेकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने "बीजेपी-चुनाव आयोग की साजिश" करार दिया है.

