सुप्रीम कोर्ट ने अब आवश्यक मामलों के “उल्लेख” के दौरान लाइव स्ट्रीम का ऑडियो भी बंद किया
एक असामान्य घटनाक्रम में, बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में वकीलों द्वारा आवश्यक मामलों के उल्लेख (मेंशनिंग) के दौरान लाइव स्ट्रीम का ऑडियो म्यूट (बंद) कर दिया गया.
लाइव वीडियो फ़ीड का ऑडियो उस अवधि के लिए बंद कर दिया गया था जब वकीलों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत के समक्ष नए मामलों का उल्लेख किया. इसके चलते जनता और मीडिया वकीलों द्वारा त्वरित सुनवाई (अर्जेंट लिस्टिंग) के अनुरोधों और अदालत की मौखिक प्रतिक्रियाओं को सुनने से वंचित रह गए.
मामलों का उल्लेख (मेंशनिंग) सुबह की अदालती कार्यवाही का एक नियमित हिस्सा होता है, जहाँ वकील भारत के मुख्य न्यायाधीश से मामलों की तत्काल सुनवाई का अनुरोध करते हैं. बातचीत के दौरान, सीजेआई यह तय करते हैं कि क्या कोई मामला त्वरित सुनवाई के योग्य है या नहीं, और सुनवाई की तारीख तय करते समय या तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए संक्षिप्त मौखिक टिप्पणियाँ भी कर सकते हैं.
हाल के महीनों में, सीजेआई के समक्ष राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कई मामलों का उल्लेख किया गया है, और मामलों की औपचारिक सुनवाई से पहले ही इन बातचीत के दौरान अदालत की टिप्पणियों को व्यापक रूप से रिपोर्ट किया गया था.
‘एनडीटीवी’ के अनुसार, ऑडियो को म्यूट करने का यह फैसला सीजेआई सूर्यकांत द्वारा यह टिप्पणी किए जाने के कुछ दिनों बाद आया है कि आवश्यक मामलों का उल्लेख (मेंशनिंग) एक "प्रशासकीय" प्रक्रिया है, न कि कोई न्यायिक कार्यवाही, और इसलिए इसकी रिपोर्टिंग नहीं की जानी चाहिए.
बता दें, सीजेआई ने जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शनकारियों पर की गई कार्रवाई को लेकर दिल्ली पुलिस के खिलाफ स्वतः संज्ञान कार्रवाई की माँग करने वाले एक वकील की याचिका पर त्वरित सुनवाई से इनकार कर दिया था. इस बातचीत के दौरान सीजेआई सूर्यकांत की मौखिक टिप्पणियों — "हमारा और अपना समय बर्बाद न करें" और "हम कोई वीडियो नहीं देखना चाहते" — ने एक विवाद खड़ा कर दिया था.
हाल ही में, अदालत ने सोशल मीडिया पर अदालती कार्यवाही के वीडियो रिकॉर्ड करने और उन्हें शेयर करने पर भी रोक लगा दी थी, यह कहते हुए कि अदालत "24x7 मनोरंजन चैनल नहीं हो सकती".

