पुलिस भाग गई थी, एम्बुलेंस को जाने की अनुमति नहीं थी, निकासी का स्थान 10 फीट का था

अर्नब गांगुली के मुताबिक, लगभग 25-30 लोगों को नजदीकी कलकत्ता मेडिकल कॉलेज और अस्पताल ले जाया गया, जिनमें से अधिकांश की हालत गंभीर थी.  शाम को पंडाल में हज़ारों लोग एकत्र हुए थे, तभी अचानक हुई बारिश ने चोरबागान सार्वजनिन में उत्सव मना रहे लोगों को अचानक से घेर लिया. यह पंडाल एक संकीर्ण रास्ते पर स्थित है, जहाँ मुख्य पंडाल की ओर कई गलियाँ जाती हैं.

बाहर गली में मौजूद कई लोग बारिश से बचने के लिए पंडाल के अंदर शरण लेने दौड़े. जो लोग पंडाल के अंदर थे वे बाहर नहीं निकल सके, जबकि खुले में फंसे लोगों ने खुद को बारिश से बचाने के लिए धक्का-मुक्की की. परिणामस्वरूप, फंसे हुए लोग एक अस्थायी सीढ़ी पर एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े. अब तक सामने आए विवरणों के आधार पर माना जा रहा है कि यह घटना पाँच से सात मिनट के भीतर घटी.

चोरबागान के पूजा पंडाल की ओर जाने वाली एक संकीर्ण गली है, जो इस वर्ष अपना 91वाँ वर्ष मना रही है. पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पाँच दिन पहले इस पंडाल का उद्घाटन किया था. कुछ ही स्वयंसेवक सड़कों पर भीड़ को नियंत्रित कर रहे थे. एक रास्ता वीआईपी आवाजाही के लिए आरक्षित था.

आम जनता के लिए दूसरा निकास मार्ग असमान था, जो सबसे संकीर्ण स्थान पर 10 फीट और सबसे चौड़े स्थान पर 30 फीट का था. जो लोग सीढ़ियों को पार करके निकास द्वार तक पहुँचने में सफल रहे, वे आगे नहीं बढ़ पा रहे थे. पंडाल में आए एक दर्शक ने कहा, "साथ लगती पार्वती घोष लेन बंद थी. किसी भी एम्बुलेंस को जाने की अनुमति नहीं दी गई थी. पुलिस भाग चुकी थी. स्थानीय निवासी अंदर फंसे लोगों को बचाने के लिए दौड़े."

एक अन्य दर्शक ने बताया कि उसके तीन दोस्त, जिनके साथ वह पंडाल घूमने आया था, जमीन पर गिर पड़े. उस दर्शक ने कहा, "मैंने उन्हें बाहर खींचने की कोशिश की लेकिन असफल रहा. कुछ लोग उन्हें बाहर खींचने में मेरी मदद करने के लिए आगे आए."

पुलिस सूत्रों ने बताया कि मृतकों और घायलों की पहचान करने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिनमें से कई के दूसरे जिलों से आने की आशंका है.

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