प्रधान का इस्तीफा, लेकिन नाकामियों के बावजूद एनटीए प्रमुख और भाजपा से जुड़े पी.के. जोशी का कद बढ़ता रहा
'द वायर' के लिए कुणाल पुरोहित की इस खोजी रिपोर्ट में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के प्रमुख प्रदीप कुमार जोशी (पी.के. जोशी) के दो दशकों से अधिक लंबे करियर, उनके राजनीतिक संपर्कों, उनके नेतृत्व वाले विभिन्न राज्य और केंद्रीय निकायों में हुई अनियमितताओं तथा संस्थागत विफलताओं का गहन विश्लेषण किया गया है. यह रिपोर्ट उजागर करती है कि कैसे मजबूत राजनीतिक संरक्षण और आरएसएस-भाजपा पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़ाव के कारण पी.के. जोशी का प्रशासनिक कद दो दशकों में लगातार बढ़ता रहा. उनके कार्यकाल के दौरान विभिन्न राज्य लोक सेवा आयोगों और एनटीए में पेपर लीक, धांधली, देरी और अपारदर्शिता के दर्जनों मामले सामने आने के बावजूद उन्हें जवाबदेह ठहराने के बजाय लगातार उच्च संवैधानिक और प्रशासनिक पद सौंपे गए, जिसका खामियाजा देश के लाखों युवाओं को भुगतना पड़ रहा है. यहां पेश है पुरोहित की रिपोर्ट का हिंदी में अनुदित सारांश:
करियर की शुरुआत और राजनीतिक पृष्ठभूमि
प्रदीप कुमार जोशी का सफर जबलपुर में प्रबंधन अध्ययन के प्रोफेसर के रूप में शुरू हुआ था. उनके करियर की वास्तविक राजनीतिक शुरुआत तब हुई जब मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) के अध्यक्ष पद के लिए उनके नाम की सिफारिश की गई.
विशेष शाखा (स्पेशल ब्रांच) का गोपनीय नोट: सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत कार्यकर्ता अजय दुबे द्वारा प्राप्त दस्तावेजों से खुलासा हुआ कि मध्य प्रदेश पुलिस की स्पेशल ब्रांच ने मुख्यमंत्री के सचिव को एक आंतरिक नोट भेजा था. इस नोट में बिना किसी आपत्ति या रेड फ्लैग के स्पष्ट लिखा गया था कि जोशी के संबंध शीर्ष भाजपा नेताओं (मुरली मनोहर जोशी – कुछ खबरिया रिपोर्ट्स उन्हें मुरली मनोहर का रिश्तेदार बताती हैं– और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी) से बेहद मजबूत हैं.
इस नोट के आधार पर जोशी को एमपीपीएससी का अध्यक्ष बना दिया गया. यहीं से उनकी विवादित लेकिन उन्नति से भरी प्रशासनिक यात्रा का आगाज हुआ.
वर्तमान में एनटीए के प्रमुख के रूप में जोशी का कार्यकाल सर्वाधिक विवादों में घिरा रहा है. उनके नेतृत्व में देश की सबसे प्रतिष्ठित और संवेदनशील मानी जाने वाली प्रतियोगी परीक्षाएं लगातार लीक और अनियमितताओं का शिकार हुईं.
नीट में पहली बार पेपर लीक: एनटीए के 10 वर्षों के इतिहास में कभी नीट का पेपर लीक नहीं हुआ था और न ही दोबारा परीक्षा कराने की नौबत आई थी. लेकिन जोशी के कार्यकाल के दौरान मई 2026 में नीट-यूजी का पेपर लीक हुआ, जिससे 20 लाख से अधिक अभ्यर्थियों का भविष्य संकट में पड़ गया.
परीक्षा रद्द होने और दोबारा परीक्षा के निर्णय से अभ्यर्थियों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ा. हैदराबाद की 19 वर्षीय छात्रा सना शेख, जिसने मूल परीक्षा में बेहतरीन प्रदर्शन किया था, ने पुन:-परीक्षा के तनाव के कारण आत्महत्या कर ली. मूल परीक्षा और पुन:-परीक्षा के बीच कम से कम 12 युवाओं ने अपनी जान गंवाई.
एनटीए ने 47 कर्मचारियों को बर्खास्त किया और सुरक्षा व्यवस्था के लिए ₹7.5 करोड़ का टेंडर निकाला. हालांकि, जेएनयू की प्रोफेसर आयशा किदवई जैसी विशेषज्ञों का मानना है कि यह संस्था अत्यंत अपारदर्शी है और मूल समस्याओं का समाधान करने के बजाय केवल दिखावटी कदम उठा रही है.
आरटीआई से संस्थागत पतन का खुलासा: सूचक पटेल द्वारा दायर आरटीआई से पता चला कि एनटीए में कर्मचारियों की 38% और वरिष्ठ निदेशक स्तर के पदों पर 70% रिक्तियां हैं. इसके बावजूद गवर्निंग बोर्ड की बैठकें नहीं बुलाई गईं—जनवरी 2024 से जून 2026 के बीच बोर्ड केवल दो बार मिला.
जोशी के 20 साल के करियर की 13 प्रमुख विवादित घटनाएं
रिपोर्ट में पी.के. जोशी के कार्यकाल से जुड़ी 13 प्रमुख घटनाओं और लीक मामलों का उल्लेख किया गया है:
नीट 2026 लीक: सीबीआई जांच में पाया गया कि देशव्यापी गिरोह और एनटीए से जुड़े शिक्षाविदों की मिलीभगत से व्हाट्सएप पर पेपर फैला, जिसके कारण 21 जून को पुन:-परीक्षा करानी पड़ी.
नीट 2024 लीक: पटना और हजारीबाग (झारखंड) से लीक हुए पेपर को एनटीए ने शुरू में "बेबुनियाद" बताया, लेकिन बाद में सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में स्वीकार किया कि पेपर वास्तव में लीक हुआ था.
गुजरात ओएमआर रैकेट (2024): गोधरा के एक कोचिंग सेंटर में ₹10-10 लाख लेकर उत्तर पुस्तिकाएं भरने का रैकेट पकड़ा गया, जिसमें परीक्षा केंद्र के शहर समन्वयक और उप-अधीक्षक की संलिप्तता सामने आई.
यूजीसी-नेट 2024 रद्द होना: 18 जून 2024 को 11 लाख से अधिक अभ्यर्थियों द्वारा दी गई परीक्षा को शुचिता से समझौते की बात कहकर अगले ही दिन रद्द कर दिया गया.
सीएसआईआर-यूजीसी नेट 2024 स्थगन: परीक्षा से 10 दिन पहले "रसद संबंधी और अपरिहार्य कारणों" का हवाला देकर परीक्षा टाल दी गई, जिससे 2.25 लाख छात्र प्रभावित हुए.
सीयूईटी-यूजी 2024 का स्थगन: दिल्ली के सभी केंद्रों पर परीक्षा से कुछ ही घंटे पहले परीक्षा को अचानक स्थगित कर दिया गया.
सीयूईटी परिणामों में अत्यधिक देरी: पुन:-परीक्षा के कारण परिणाम एक महीने की देरी से आए, जिससे विश्वविद्यालयों का शैक्षणिक सत्र और छुट्टियां प्रभावित हुईं.
पेटेंट परीक्षक परीक्षा 2023 गड़बड़ी: भारतीय गुणवत्ता परिषद से अधिकार छीनकर एनटीए को सौंपी गई इस परीक्षा में तकनीकी खराबी और बिना पूर्व सूचना के परीक्षा केंद्र सैकड़ों किलोमीटर दूर (जैसे बंगाल के छात्रों को भुवनेश्वर) बदल दिए गए.
जेईई मेन 2025 की त्रुटियां: एनटीए को आधिकारिक तौर पर स्वीकार करना पड़ा कि परीक्षा के 12 प्रश्न गलत थे, जिन्हें हटाना पड़ा. उत्तर कुंजी में भी ढेरों खामियां पाई गईं.
नीट 2024 में अंक स्फीति: 67 छात्रों ने 720 में से 720 अंक प्राप्त किए (जो कि पिछले वर्ष केवल 2 थे), जिसने परिणामों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए.
स्वयं की जांच का विरोधाभास: जब नीट 2024 में 1,500 छात्रों को ग्रेस मार्क्स देने का विवाद उठा, तो जांच के लिए बनाई गई चार सदस्यीय समिति का प्रमुख जोशी को ही बना दिया गया, जिससे उनके निष्पक्ष मूल्यांकन पर सवाल खड़े हुए.
एमपीपीएससी में अवैध भर्ती (2009): जोशी के नेतृत्व में 350 से अधिक प्रोफेसरों की भर्ती हुई, जिसमें नियमों की अनदेखी के आरोप लगे. कार्यकर्ता पंकज प्रजापति की जांच में सामने आया कि 88 प्रोफेसरों के पास आवश्यक योग्यता (पीएचडी और 10 साल का अनुभव) नहीं थी.
दागी अधिकारी की नियुक्ति: एमपीपीएससी कार्यकाल में जोशी ने एस.के. शर्मा को परीक्षा नियंत्रक नियुक्त किया, जो बाद में 2014 के आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी (एएमओ) पेपर लीक कांड से जुड़ा पाया गया.
संसदीय समिति की रिपोर्ट और राजनीतिक संरक्षण
एनटीए की कार्यप्रणाली पर संसद के भीतर भी कड़े सवाल उठाए गए हैं:
संसदीय स्थायी समिति का रुख: शिक्षा, महिला, बच्चे, युवा और खेल संबंधी सर्वदलीय संसदीय समिति ने दिसंबर 2025 की अपनी रिपोर्ट में लिखा कि एनटीए के प्रदर्शन ने भरोसा नहीं जगाया है. अकेले 2024 में आयोजित 14 में से कम से कम 5 प्रमुख परीक्षाओं में गंभीर गड़बड़ियां पाई गईं.
विपक्ष के सवाल: संसद में कांग्रेस के उप नेता प्रतिपक्ष गौरव गोगोई ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब एनटीए के महानिदेशक को बदल दिया गया, तो अध्यक्ष पी.के. जोशी का लगातार बचाव क्यों किया जा रहा है?
राजनीतिक अभयदान और पदोन्नति: विवादों के बावजूद जोशी के करियर में रुकावट के बजाय लगातार बढ़ोतरी हुई. वे एमपीपीएससी से छत्तीसगढ़ पीएससी अध्यक्ष, फिर संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के सदस्य व अध्यक्ष और अंततः एनटीए प्रमुख बने. नीट विवाद के बाद भी उन्हें महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय (वर्धा) के कुलपति चयन पैनल का प्रमुख और छत्तीसगढ़ में सीजीपीएससी परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने संबंधी आयोग का अध्यक्ष बनाया गया.

