आकार पटेल | वैश्विक सपनों को बेचना

'मदर ऑफ़ डेमोक्रेसी' (लोकतंत्र की जननी) संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक अस्थायी निर्वाचित सीट के लिए खड़ी हो रही है. अस्थायी इसलिए क्योंकि यह दो साल का कार्यकाल है और निर्वाचित इसलिए क्योंकि पाँच स्थायी सदस्यों के साथ बैठने की इच्छा रखने वाले 188 सदस्य देशों के बीच 10 सीटें साझा की जाती हैं. इन 10 सीटों के पास कोई वीटो पावर नहीं होती है, इसलिए यदि चीन, अमेरिका, फ़्रांस, रूस या यूके में से कोई भी किसी चीज़ को नहीं चाहता है, तो उसे ख़ारिज कर दिया जाता है, चाहे बाक़ी 14 सदस्य कैसे भी वोट दें.

'मदर' पहले भी आठ बार चुनी जा चुकी है और पिछली बार हाल ही में 2021-22 में चुनी गई थी. मुझे याद नहीं है कि तब हमने क्या हासिल किया था और मैं अनिश्चित हूँ कि हम फिर से चुनाव क्यों लड़ रहे हैं, लेकिन तारीख़ में एक सुराग़ मौजूद है. यह कार्यकाल 2028 और 2029 के लिए है, जिसका मतलब यह होगा कि अगले आम चुनाव के ठीक बीच में हमारे पास होर्डिंग लगाने और यह दिखावा करने का अवसर होगा कि हम विश्व स्तर पर महत्वपूर्ण हैं. कुछ साल पहले की जी20 अध्यक्षता को याद करें.

संयुक्त राष्ट्र में चुनाव अगले साल जून में हैं और एशिया प्रशांत समूह में एक और उम्मीदवार है जिसे हमें हराना है (या नाम वापस लेने के लिए राज़ी करना है) और वह ताजिकिस्तान है. उसे इस्लामिक सहयोग संगठन (ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ़ इस्लामिक कोऑपरेशन) के 56 मतदान करने वाले सदस्यों द्वारा समर्थन प्राप्त होने और एक ऐसे राष्ट्र के रूप में सहानुभूति वोट लेने का फ़ायदा है जिसे कभी एक बार भी नहीं चुना गया है.

उम्मीदवारों को कुल 193 सदस्य देशों में से 2/3 के समर्थन की आवश्यकता होती है, इसलिए यदि सभी राष्ट्र उपस्थित हैं और मतदान कर रहे हैं तो 129 वोटों की आवश्यकता होगी. सैद्धांतिक रूप से हमारे लिए 56 ओआईसी (OIC) वोटों में से किसी के बिना भी जीतना संभव है, लेकिन यह कठिन होगा. ताजिकिस्तान से नाम वापस दिलवाने के लिए या अपने प्लेटफ़ॉर्म की अपील से मुस्लिम गुट को तोड़ने के लिए हमें कुछ जुगाड़ करना होगा.

तो हमारा प्लेटफ़ॉर्म क्या है? इसकी घोषणा जयशंकर के एक संबोधन के माध्यम से की गई थी. 'न्यू इंडिया' (नए भारत) की ज़्यादातर चीज़ों की तरह, संक्षिप्त नाम (एक्रॉनिम) सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है. इस बार हमें SHANTI (शांति) दिया गया है, जिसका विस्तार "नियमों, विश्वास और सत्यनिष्ठा के माध्यम से समग्र उन्नति सुरक्षित करना" (Securing Holistic Advancement through Norms, Trust and Integrity) है. यह कुछ-कुछ वैसा ही लगता है जैसा हमारा चुनाव आयोग कहता है, या फिर दिल्ली पुलिस.

SHANTI के छह तत्व हैं. पहला यह दावा है कि भारत 'ग्लोबल साउथ' की आवाज़ है. कैसे? कहाँ? यह स्पष्ट नहीं किया गया है, लेकिन मान लेते हैं कि यह सच है. दूसरा सुधारवादी बहुपक्षवाद (reformed multilateralism) है, जो यह कहने का एक फ़ैंसी तरीक़ा है कि हमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सीट दी जाए.

तीसरा शांति स्थापना (पीसकीपिंग) है. पाठकों को शायद यह न पता हो कि संयुक्त राष्ट्र शांति सेना पर कुछ देशों का दबदबा है. सबसे बड़ा योगदानकर्ता नेपाल है, उसके बाद भारत, बांग्लादेश, रवांडा और पाकिस्तान हैं. भारत शांति स्थापना को "भविष्य के लिए तैयार" (future-ready) बनाएगा, जिसका अर्थ जयशंकर के अनुसार "बेहतर तरीक़े से सुसज्जित होना, तकनीकी रूप से सक्षम होना, यथार्थवादी रूप से अनिवार्य और मुख्य उद्देश्यों पर केंद्रित होना है." शायद इसका मतलब है कि हम आधार कार्ड जारी करेंगे.

चौथा आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) है, जहाँ हमारी भूमिका अस्पष्ट है क्योंकि अमेरिका और चीन ही ऐसे दो देश हैं जिनके पास एआई (AI) क्षमताएँ हैं. जयशंकर स्पष्ट करते हैं कि यहाँ 'मदर' का योगदान एक और संक्षिप्त नाम है. वह कहते हैं, "भारत ने एआई का एक मानव-केंद्रित दृष्टिकोण पेश किया है, जो इसकी क्षमताओं और भारत की परंपराओं दोनों पर आधारित है. इसके लिए हमारा शब्द MANAV (मानव) है, जो 'नैतिक और नीतिपरक प्रणाली (Moral and ethical systems), जवाबदेह शासन (Accountable governance), राष्ट्रीय संप्रभुता (National sovereignty), सुलभ और समावेशी (Accessible and inclusive), और वैध तथा न्यायसंगत प्रणाली (Valid and legitimate systems)' का संक्षिप्त रूप है." ठीक है.

पाँचवाँ समुद्री व्यवस्था है, जिसका अर्थ यह है कि ईरान को होर्मुज़ की नाकेबंदी बंद करनी चाहिए. छठा आतंकवाद है, जो हमारा सबसे पसंदीदा विषय है. जयशंकर कहते हैं, "हमारी प्रतिबद्धता टेरर फ़ाइनेंसिंग (आतंकवाद के वित्तपोषण) का मुक़ाबला करने पर ध्यान केंद्रित करने की है". यह सच नहीं है. भारत पर अपनी सितंबर 2024 की 'म्युचुअल इवैल्यूएशन रिपोर्ट' में, फ़ाइनेंशियल एक्शन टास्क फ़ोर्स (FATF) ने भारत को केवल "आंशिक रूप से अनुपालन करने वाला" (partially compliant) दर्जा दिया, क्योंकि 'मदर' एनजीओ (NGOs) को नापसंद करती है, जिसके बारे में मैं यहाँ पहले भी लिख चुका हूँ.

ये छह चीज़ें हमारे प्लेटफ़ॉर्म का हिस्सा हैं. शायद दुनिया को हमारा यह शानदार घोषणापत्र हमें वोट देने के लिए एक पर्याप्त कारण लगे. लेकिन हमें अपने समय के दो संबंधित, विशाल, वैश्विक मुद्दों को भी संबोधित करना होगा. ईरान में अवैध युद्ध जो सभी को प्रभावित कर रहा है, और फ़िलिस्तीन में नरसंहार.

पहले मुद्दे पर हमारे पास कहने के लिए कुछ नहीं है क्योंकि हम ट्रंप के ख़िलाफ़ बोलने से डरते हैं और हमने युद्ध शुरू होने से कुछ घंटे पहले इज़राइल से एक पदक स्वीकार किया था. दूसरे मुद्दे पर, यह मानते हुए कि इसका ज़िक्र किया जाना चाहिए, जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा: "हमने कल ही ब्रुसेल्स में फ़िलिस्तीन डोनर समूह की बैठक में, फ़िलिस्तीन के लिए एक स्पेशलिटी अस्पताल, एक कृत्रिम अंग लगाने का केंद्र और एक व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थान स्थापित करने के लिए अतिरिक्त रूप से प्रतिबद्धता जताई है."

लेकिन निश्चित रूप से फ़िलिस्तीन पर हमारा असली रिकॉर्ड स्पष्ट और पारदर्शी है. भारत ने इज़राइल को गाज़ा पर बमबारी रोकने के लिए बुलाए गए मतदान से ख़ुद को दूर रखा. केवल एक राष्ट्र ने फ़िलिस्तीनियों के ख़िलाफ़ नरसंहार और रंगभेद के बीच स्वेच्छा से, उत्साहपूर्वक इज़राइल को गले लगाया है और वह भारत है. जर्मनी ऐतिहासिक अपराधबोध के कारण ऐसा करता है, अमेरिका इज़राइल लॉबी के कारण ऐसा करता है. अकेले भारत ने यह तय किया है कि वह फ़िलिस्तीनियों से इतनी नफ़रत करता है कि इज़राइल से प्यार कर सके.

जैसा कि मेरे संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पिछले सप्ताह ख़ुलासा किया था, भारत इज़राइल को हथियार भेज रहा है, जिसमें फ़िलिस्तीनी बच्चों के ख़िलाफ़ इस्तेमाल किए जाने वाले वॉरहेड और अन्य युद्ध सामग्री शामिल हैं. 'मदर ऑफ़ डेमोक्रेसी' ने इज़राइल को वे बम बेचे जिन्होंने गाज़ा की लड़कियों और लड़कों के हाथ-पैर काट दिए और अब 'मदर' भविष्य में उन्हें कृत्रिम अंग देने का वादा कर रही है.

एमनेस्टी की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया माँगने पर, सरकार ने कहा: "रणनीतिक व्यापार नियंत्रण पर भारत का एक मज़बूत क़ानूनी और विनियामक ढाँचा है और यह अपने राष्ट्रीय क़ानूनों के अनुसार और अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के अनुरूप विभिन्न देशों को दोहरे उपयोग वाली वस्तुओं और प्रौद्योगिकियों का निर्यात करता है." जिसका अर्थ है कि हम बम भेजना जारी रखेंगे.

और इसलिए, दुनिया के सभी राष्ट्रों, कृपया 'मदर ऑफ़ डेमोक्रेसी' के लिए वोट करें क्योंकि, जैसा कि जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा था, "भारत एक दृष्टिकोण के रूप में 'वसुधैव कुटुंबकम' (दुनिया एक परिवार है) की वकालत करता है, हम केवल उपदेश नहीं देते; हम इस पर अमल भी करते हैं."

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