‘पिछड़ा से पंडित तक’: उत्तर प्रदेश में ‘पीडीए’ के इर्द-गिर्द घूमती सियासत और नई व्याख्याएँ

समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जून 2023 में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए का मुकाबला करने के लिए एक सामाजिक गठबंधन के रूप में “पीडीए” शब्द पेश किया था. उस समय इसका सीधा और स्पष्ट अर्थ "पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक" था. अखिलेश यादव ने दावा किया था कि “पीडीए ही एनडीए को हराएगा.” हालाँकि, पिछले कुछ समय में सपा के पारंपरिक समर्थन आधार को यादवों और मुसलमानों से आगे बढ़ाकर गैर-यादव ओबीसी, दलितों और अन्य वर्गों तक फैलाने के प्रयास में इस संक्षिप्त नाम की कई बार नई व्याख्याएँ की गई हैं.

लालमणि वर्मा की रिपोर्ट के अनुसार, गठबंधन को अधिक समावेशी बनाने और उच्च जातियों व आदिवासियों की नाराजगी से बचने के लिए अक्टूबर 2023 में अखिलेश यादव ने "ए" का दायरा बढ़ाते हुए इसमें "अगड़े", "आदिवासी" और "आधी आबादी (महिलाएँ)" को शामिल किया.

इसके बाद राजनीतिक और सामाजिक घटनाक्रमों के अनुसार इस शब्द में नए अर्थ जुड़ते चले गए:

पत्रकार: अप्रैल 2025 में, पहलगाम आतंकी हमला मामले पर सवाल उठाने वाले एक पत्रकार पर हुई कार्रवाई के बाद अखिलेश ने कहा कि "पी" का मतलब "पत्रकार" भी हो सकता है.

पीड़ित, दुखी, अपमानित: मार्च में 2027 के विधानसभा चुनावों का प्रचार तेज करते हुए उन्होंने पीडीए का अर्थ "पीड़ित, दुखी, अपमानित" वर्गों का आंदोलन बताया.

पंडित (ब्राह्मण): 5 अगस्त को समाजवादी नेता जनेश्वर मिश्र की जयंती पर सपा ने ब्राह्मण समुदाय तक पहुँच बनाने के प्रयास में "पीडी" का अर्थ "पंडित" बताया. इस दौरान अखिलेश ने हाथ में त्रिशूल लेकर शिव तांडव स्तोत्र पाठ वाले कार्यक्रम में भी भाग लिया.

विस्तारित अल्पसंख्यक: 25 सितंबर को रायबरेली की पीडीए रथ यात्रा में उन्होंने स्पष्ट किया कि अल्पसंख्यक (ए) का मतलब मुस्लिम, पारसी, बौद्ध और सिख सभी हैं. साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बुलडोजर और प्रशासनिक कार्रवाई के ज़रिए पीडीए वर्ग को निशाना बना रही है.

प्रतिद्वंद्वी दलों और भाजपा के तीखे हमले

अखिलेश यादव द्वारा पीडीए की लगातार बदलती व्याख्याओं ने विरोधी दलों को भी सपा पर निशाना साधने का मौका दे दिया है. भाजपा और उसके सहयोगियों ने इसे अपने-अपने तंज कसने के लिए इस्तेमाल किया है. मसलन, रायबरेली यात्रा के बाद भाजपा ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि सपा के नए रथ से "पंडित" शब्द गायब है और उनका असली मतलब "पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक-मुस्लिम" ही है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तंज कसते हुए कहा कि सपा "पी" का मतलब बदलती रहती है और शायद एक दिन इसका मतलब "पाकिस्तान" भी बता दे. इससे पहले नवंबर 2024 में उन्होंने पीडीए को "प्रोडक्शन हाउस ऑफ दंगाई और अपराधी" करार दिया था, जिसके सीईओ अखिलेश और ट्रेनर शिवपाल यादव हैं.

अन्य भाजपा नेताओं की व्याख्याएँ भी कम दिलचस्प नहीं हैं. जैसे-विनोद तावड़े ने इसे "पराया धन अपना" बताया. उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इसे "परिवार डेवलपमेंट एजेंसी" और "पर्सनल डेवलपमेंट अथॉरिटी" कहा. पंकज चौधरी ने इसे "पारिवारिक दल एलायंस" और चंदौली की एक घटना के बाद "पीड़ा, दमन और अपमान" का नाम दिया.

एनडीए सहयोगियों और बसपा का रुख

भाजपा के सहयोगी दल सुभासपा के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने सपा के अंदरूनी मतभेदों पर तंज कसते हुए पीडीए का मतलब "पैसा, दबंगई और आपसी लड़ाई" तथा "पीट देगा अहीर" बताया.

दूसरी ओर, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने भी ‘एक्स’  पर सवाल उठाते हुए सपा से रुख स्पष्ट करने की मांग की. उन्होंने आरोप लगाया कि सपा अपने राजनीतिक स्वार्थ के हिसाब से कभी "पिछड़ा-दलित" तो कभी "पंडित" शब्द का इस्तेमाल करती है.

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