“मुझे मेरा बेटा दिखाइए या उसकी राख”: मां की गुहार से घिरी आंध्र प्रदेश पुलिस 

‘साउथ फर्स्ट’ की रिपोर्ट के अनुसार, आंध्र प्रदेश सरकार ने बुधवार, 17 जून को विजयवाड़ा के 25 वर्षीय गाडे साई कृष्णा के लापता होने के मामले में कृष्णा लंका सर्किल इंस्पेक्टर (सीआई) नागाराजू को निलंबित कर दिया और एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी से निष्पक्ष जांच कराने का आदेश दिया.

साई कृष्णा के परिवार ने आरोप लगाया है कि उन्हें पुलिस हिरासत में प्रताड़ित किया गया और बाद में पूरे मामले को दबाने की कोशिश की गई.

मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ मामले की समीक्षा की और बढ़ते राजनीतिक विवाद के बीच स्वतंत्र जांच के निर्देश दिए.

मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया, "विजयवाड़ा के कृष्णा लंका क्षेत्र से गाडे साई कृष्णा के लापता होने के मामले को सरकार ने गंभीरता से लिया है. इस मामले से जुड़े पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर नागाराजू को निलंबित करने का फैसला किया गया है."

हिरासत में यातना और लीपापोती के आरोप

साई कृष्णा की मां गाडे विजय लक्ष्मी का आरोप है कि 9 मई को प्रकाशम जिले के मार्कापुरम से कृष्णा लंका पुलिस उनके बेटे को अपने साथ ले गई थी. तब से उसका कोई पता नहीं है.

4 जून को विजय लक्ष्मी ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की. उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि उनके बेटे को अदालत के सामने पेश किया जाए, चाहे वह जीवित हो या नहीं.

याचिका में आंध्र प्रदेश सरकार, पुलिस महानिदेशक, एनटीआर जिले के पुलिस आयुक्त और कृष्णा लंका तथा मार्कापुरम पुलिस थानों के अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया.

इसके बाद हाई कोर्ट ने कृष्णा लंका पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस ऑफिसर को साई कृष्णा का पता लगाकर 15 जून तक अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया.

लेकिन 15 जून को आंध्र प्रदेश के महाधिवक्ता कार्यालय ने अदालत को बताया कि साई कृष्णा का पता नहीं चल सका है और उसे खोजने के प्रयास जारी हैं.

मामले की सुनवाई के दौरान विजय लक्ष्मी की ओर से पेश अधिवक्ता के.वी. आदित्य चौधरी ने आरोप लगाया कि साई कृष्णा की हिरासत में यातना के कारण मौत हो सकती है और पुलिस सच्चाई छिपाने की कोशिश कर रही है.

अदालत ने पुलिस को तत्काल कदम उठाकर साई कृष्णा को जल्द से जल्द पेश करने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई 29 जून के लिए तय की.

हाई कोर्ट के बाहर मीडिया से बातचीत में विजय लक्ष्मी ने कहा कि 9 मई को कृष्णा लंका पुलिस स्टेशन के दो कांस्टेबल उनके घर आए थे और उन्हें पुलिस स्टेशन ले गए, जहां उनसे उनके बेटे के बारे में पूछताछ की गई तथा उनका मोबाइल फोन जब्त कर लिया गया.

उन्होंने सीआई नागाराजू पर धमकी देने का भी आरोप लगाया.

विजय लक्ष्मी के मुताबिक, "उन्होंने कहा था कि वह मेरे बेटे को मार देंगे और मुझे उससे मिलने की कोई उम्मीद नहीं रखनी चाहिए."

उन्होंने कहा, "जो मेरे और मेरे बेटे के साथ हुआ, वह किसी और के साथ नहीं होना चाहिए. अगर मेरा बेटा जीवित है तो मुझे दिखाइए. अगर नहीं है तो कम से कम उसकी राख मुझे दे दीजिए. मुझे बता दीजिए कि वह कहां है. मैं वहां चली जाऊंगी. मैं इस गंदी राजनीति का हिस्सा नहीं बनना चाहती."

विजय लक्ष्मी का कहना है कि वह कई बार कृष्णा लंका पुलिस स्टेशन गईं लेकिन उन्हें अपने बेटे के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई.

उनके वकील आदित्य चौधरी ने कहा कि 2 जून को विजय लक्ष्मी उनसे मिली थीं, जब पुलिस कथित तौर पर कोई जानकारी देने से इनकार कर रही थी. उन्होंने यह भी दावा किया कि परिवार के पास ऐसे प्रत्यक्षदर्शियों के बयान हैं जिन्होंने साई कृष्णा को पुलिस द्वारा ले जाते हुए देखा था.

चौधरी का कहना है कि इस मामले में न्याय तभी संभव है जब किसी स्वतंत्र राष्ट्रीय स्तर की एजेंसी से जांच कराई जाए.

इस दौरान स्थानीय बार एसोसिएशन के कुछ सदस्य और अन्य कथित पीड़ित भी विजय लक्ष्मी के समर्थन में मौजूद रहे. उनका आरोप था कि कृष्णा लंका पुलिस स्टेशन हिरासत में यातना के मामलों के लिए बदनाम रहा है.

दूसरी ओर कुछ अपुष्ट रिपोर्टों में दावा किया गया कि साई कृष्णा कई मामलों में जांच के दायरे में रहने वाला हिस्ट्रीशीटर था. हालांकि परिवार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है.

कृष्णा लंका पुलिस स्टेशन के एक सब-इंस्पेक्टर ने कहा कि साई कृष्णा के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं है. हालांकि उन्होंने यह पुष्टि करने से इनकार कर दिया कि उसे पुलिस ने हिरासत में लिया था या नहीं.

सीसीटीवी फुटेज जारी करने की विपक्ष की मांग

इस मामले ने आंध्र प्रदेश की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है.

पूर्व मंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के नेता अंबाती रामबाबू ने आरोप लगाया कि साई कृष्णा की पुलिस हिरासत में हत्या कर दी गई और सबूत मिटाने के लिए उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया.

उन्होंने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा.

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस के नेताओं ने कृष्णा लंका पुलिस स्टेशन की सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने की मांग की है.

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