और तो और ये साहब भी यथावत हैं, बल्कि जज साहब का तबादला हो गया!

और तो और ‘ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान भारत के चेहरा रहीं कर्नल सोफिया कुरैशी के बारे में निहायत “गटरनुमा” (यह मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने कहा था) में टिप्पणी करने वाले मध्यप्रदेश के मंत्री विजय शाह भी ठप्पे के साथ अपने पद पर कायम हैं. उनकी कुर्सी यथावत है. याद करें हाईकोर्ट ने शाह की सड़कछाप भाषा और “अपमानजनक” टिप्पणी का स्वतः संज्ञान लेकर 4 घंटे के भीतर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे. एफआईआर में शाह के वायरल हुए भाषण का उल्लेख न करने पर हाईकोर्ट ने मध्यप्रदेश की पुलिस को तगड़ी फटकार भी लगाई थी. शाह ने भाषण में कहा था, “उन्होंने कपड़े उतार-उतार कर हमारे हिंदुओं को मारा और मोदी जी ने उनकी बहन को उनकी ऐसी की तैसी करने उनके घर भेजा. अब मोदी जी कपड़े तो उतार नहीं सकते, इसलिए उनकी समाज की बहन को भेजा कि तुमने हमारी बहनों को विधवा किया है तो तुम्हारे समाज की बहन आकर तुम्हें नंगा करके छोड़ेगी. देश का सम्मान और मान-सम्मान और हमारी बहनों के सुहाग का बदला तुम्हारी जाति, समाज की बहनों को पाकिस्तान भेजकर बदला ले सकते हैं.”

बाद में यह केस सुप्रीम कोर्ट ने अपने हाथ में ले लिया और तब से यह मामला देश की सबसे बड़ी अदालत में चल रहा है. शाह माफी मांग चुके हैं, लेकिन उनकी कुर्सी यथावत है. वे “मंत्री पद” का पूरा सुख भोग रहे हैं. अलबत्ता उनके खिलाफ तीखी टिप्पणी करने वाले मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन का बहुत पहले तबादला हो चुका है. उनके तबादले की न्यायिक जगत में आलोचना भी हुई थी. पहले उनका मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ ट्रांसफर किया गया और फिर सरकार के आग्रह छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से इलाहाबाद भेज दिया गया.

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