ओडिशा के नए राज्यपाल ने कहा, ‘भाजपा के लिए अधिक वोट हासिल करने के लिए काम करूँगा’
सुजीत बिसोई की रिपोर्ट के अनुसार, ओडिशा के नवनियुक्त राज्यपाल ब्रज मोहन राम की टिप्पणियों—कि संवैधानिक पद पर उनकी नियुक्ति के बाद वे भाजपा के लिए अधिक वोट हासिल करने के लिए काम करेंगे—ने राज्य में एक विवाद खड़ा कर दिया है. विपक्षी दल बीजू जनता दल (बीजद) और कांग्रेस ने बुधवार को उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए.
झारखंड से भाजपा के पूर्व सांसद और एक दलित नेता, राम को सोमवार को ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किया गया था. रांची में एक समाचार एजेंसी से बात करते हुए राम ने कहा कि वे भाजपा के अनुसूचित जाति (एससी) मोर्चा को और अधिक सक्रिय करने तथा पार्टी के लिए अधिक वोट हासिल करने के प्रयास करेंगे. राज्य में भाजपा की सरकार है.
राम ने अपने जैसे ज़मीनी नेता को इस पद पर नियुक्त करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का भी आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि उन्होंने झारखंड में भी भाजपा के एससी मोर्चा को सक्रिय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और चुनाव लड़ने के लिए टिकट न दिए जाने के बावजूद वे पार्टी संगठन के साथ बने रहे. ओडिशा की लगभग 17 प्रतिशत आबादी अनुसूचित जाति (एससी) श्रेणी से आती है.
बीजद के राज्यसभा सांसद संतृप्त मिश्रा ने कहा कि यह टिप्पणी दर्शाती है कि राज्यपाल की प्राथमिकताएँ स्पष्ट हैं. मिश्रा ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, "संवैधानिक कर्तव्यों के प्रति उनका झुकाव चाहे जो भी हो, अपने राजनीतिक दृष्टिकोण पर इतनी शानदार स्पष्टता उल्लेखनीय है! लोकतंत्र की नई परिभाषा—संवैधानिक पद पर रहते हुए पार्टी के हितों को प्राथमिकता देना! सचमुच सराहनीय!" उन्होंने आगे लिखा, "हमें बिल्कुल ऐसे ही ईमानदार और पारदर्शी तंत्र की ज़रूरत है! अगर ऐसे और राज्यपाल नियुक्त किए जाते हैं, तो इसमें कोई संदेह नहीं कि हमारा लोकतंत्र निश्चित रूप से मज़बूत होगा!"
कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने कहा, "ओडिशा के नए नियुक्त राज्यपाल, भाजपा के ब्रज मोहन राम ने खुले तौर पर घोषणा की है कि वे ओडिशा में भाजपा के लिए अधिक वोट और चुनावी जीत सुनिश्चित करने के लिए अपने संवैधानिक पद का इस्तेमाल करेंगे. उन्होंने अपनी मंशा स्पष्ट कर दी है—पार्टी जनता, संविधान और देश से ऊपर है. इसलिए, ध्यान से देखिए, उनका चेहरा याद रखिए. देशद्रोही/गद्दार ऐसा ही दिखता है."
रांची विश्वविद्यालय से स्नातक, राम अविभाजित बिहार की विधानसभा में पूर्व विधायक थे. वे 1996, 1998 और 1999 में झारखंड के पलामू से लोकसभा के लिए भी चुने गए थे. उन्होंने ओडिशा के 28वें राज्यपाल के रूप में हरि बाबू कंभमपति का स्थान लिया है.

