संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों ने कनाडा से खालिस्तान समर्थक सिख कार्यकर्ता की जीवन रक्षा का आग्रह किया

‘द गार्डियन’ के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने कनाडा से सिख कार्यकर्ता मनिंदर सिंह की सुरक्षा के लिए हर संभव उपाय करने का आग्रह किया है. कनाडाई अधिकारियों ने मनिंदर सिंह को उनके जीवन पर मंडराते खतरों के बारे में बार-बार चेतावनी दी है. संयुक्त राष्ट्र के पांच विशेषज्ञों ने कनाडाई सरकार को लिखे एक पत्र में, कनाडाई नागरिक सिंह के खिलाफ "विदेशी धमकी और प्रतिशोध के चिंताजनक आरोपों" का मुद्दा उठाया.

पत्र में याद दिलाया गया कि 2022 से, सिंह को कनाडाई अधिकारियों से उनके जीवन पर विश्वसनीय और आसन्न खतरों के बारे में चार "चेतावनी देने का कर्तव्य" नोटिस प्राप्त हुए हैं. इसमें कनाडा से आग्रह किया गया कि वह "मनिंदर सिंह और उनके परिवार के साथ-साथ कनाडाई भूमि पर मौजूद इसी तरह की स्थिति वाले व्यक्तियों की रक्षा के लिए अपने अधिकार में मौजूद सभी व्यावहारिक उपाय करे."

इस पत्र की एक प्रति भारतीय सरकार को भी भेजी गई थी. निज्जर की तरह, 44 वर्षीय सिंह भी 'खालिस्तान' नामक एक स्वतंत्र सिख राज्य की वकालत करने वाले एक कट्टरपंथी समूह का हिस्सा हैं. यह भारत और बड़ी सिख आबादी वाले कई पश्चिमी देशों के बीच एक विवादास्पद मुद्दा रहा है.

अपने पत्र में, विशेषज्ञों ने कहा कि वे चिंतित हैं कि सिंह के खिलाफ खतरे "कनाडा सहित विभिन्न देशों में सिख कार्यकर्ताओं के खिलाफ भारतीय अधिकारियों द्वारा अंतरराष्ट्रीय दमन (ट्रैंसनेशनल रिप्रेशन) के एक बड़े पैटर्न के तहत आते हैं."

सिंह ने कहा कि यह पत्र "इस बात की एक गंभीर याद दिलाता है कि भारतीय राज्य आत्मनिर्णय की वकालत करने वाली सिख आवाज़ों को चुप कराने के लिए किस हद तक जाने को तैयार है."

सिंह ने आगे कहा, "मैं डरकर चुप होने से इनकार करता हूँ. खालिस्तान के लिए मेरा नेतृत्व और वकालत अंतरराष्ट्रीय कानून, मानवाधिकार सिद्धांतों और सबसे महत्वपूर्ण रूप से मेरे समुदाय के जीवंत अनुभवों में निहित है."

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