मोदी सरकार का दावा- उसकी नीतियों से खेलों को मिला बढ़ावा, लेकिन आंकड़े बयां करते हैं उलट कहानी

केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया और केंद्र सरकार का दावा है कि 2014 के बाद अपनाई गई नई खेल नीतियों के कारण भारत ने ओलंपिक, एशियाई और राष्ट्रमंडल (कॉमनवेल्थ) खेलों में अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की है. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं के आंकड़ों और बजटीय आवंटन का गहराई से विश्लेषण करने पर एक भिन्न और जटिल तस्वीर सामने आती है.

सौर्ज्य भौमिक की रिपोर्ट के अनुसार, रियो ओलंपिक 2016 (2 पदक, 67वां स्थान) से सुधार करते हुए टोक्यो ओलंपिक में भारत ने 7 पदकों के साथ 48वां स्थान हासिल किया, जो भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था.  हालांकि, यह 2012 के लंदन ओलंपिक (6 पदक, 55वां स्थान) से बहुत अधिक भिन्न नहीं था. इसके बाद पेरिस 2024 ओलंपिक में भारत 6 पदकों के साथ पुनः 71वें स्थान पर फिसल गया.

राष्ट्रमंडल खेल: 2010 दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने 101 पदक जीते थे, जिसकी तुलना में हाल के वर्षों (2014 में 64, 2018 में 66, 2022 में 61 और 2026 में 39 पदक) में पदकों की संख्या में गिरावट आई है. इसके अतिरिक्त, राष्ट्रमंडल खेलों में अमेरिका, चीन और जर्मनी जैसे प्रमुख खेल देश भाग नहीं लेते, जिससे यहाँ प्रतिस्पर्धात्मक दायरा ओलंपिक की तुलना में सीमित रहता है.

एलीट एथलीटों की फंडिंग में भारी गिरावट                   

एनएसडीएफ में बजटीय कटौती: राष्ट्रीय खेल विकास कोष (एनएसडीएफ) में सरकारी योगदान तीन वर्षों के भीतर लगभग 77% घट गया है—जो 2023-24 में 46 करोड़ रुपये से गिरकर 2025-26 में मात्र 10.58 करोड़ रुपये रह गया.

कॉर्पोरेट फंड की कमी: एनएसडीएफ योजना के तहत सरकार द्वारा निजी व कॉर्पोरेट योगदान के बराबर 'मैचिंग ग्रांट' दिया जाता है. इस कोष में कॉर्पोरेट योगदान भी इसी अवधि में 85 करोड़ रुपये से घटकर 37 करोड़ रुपये (50% से अधिक की गिरावट) रह गया है.

टीओपीएस का सीमित दायरा: शीर्ष खिलाड़ियों को कोचिंग, अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर और उपकरण देने वाली प्रमुख योजना 'टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम' (टीओपीएस) पर पेरिस 2024 चक्र में मात्र 14.66 करोड़ रुपये खर्च किए गए. जापान जैसे एशियाई खेल राष्ट्र उच्च प्रदर्शन कार्यक्रमों पर प्रतिवर्ष सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च करते हैं, जिसके बल पर उसने पेरिस में 20 स्वर्ण सहित 45 पदक हासिल किए.

खेल बजट का बड़ा हिस्सा खेल संघों को दिया जा रहा है

जहाँ एक ओर उत्कृष्ट एथलीटों (एलीट स्पोर्ट्स) के प्रत्यक्ष विकास के लिए फंडिंग सिमट रही है, वहीं दूसरी ओर खेल बजट का एक बड़ा हिस्सा राष्ट्रीय खेल संघों को दिया जा रहा है. केंद्रीय बजट 2026 में संघों की सहायता के लिए 425 करोड़ रुपये आवंटित किए गए.

भारत में 56 मान्यता प्राप्त खेल संघ हैं, जिनमें से कई का नेतृत्व ऐतिहासिक रूप से बृजभूषण शरण सिंह (पूर्व प्रमुख, भारतीय कुश्ती महासंघ) जैसे राजनीतिक नेताओं के हाथ में रहा है. इससे खेल प्रशासन में पारदर्शिता, पेशेवर प्रबंधन और सुशासन पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं.

आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के सरकारी दावों के विपरीत भारत का एलीट स्पोर्ट्स इकोसिस्टम वित्तीय संसाधनों की कमी से जूझ रहा है. वैश्विक खेल शक्ति बनने के लिए सार्वजनिक फंडिंग में सुधार और खेल निकायों को राजनीति से मुक्त कर एथलीट-केंद्रित नीतियां बनाना अनिवार्य है.

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