जंतर-मंतर पर पुलिस कार्रवाई का सामना करने वाले मोहम्मद जुनैद मलिक अब रांची में छात्रों को करा रहे भोजन
मोहम्मद जुनैद मलिक ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शनकारियों को भोजन कराने के लिए कथित तौर पर पुलिस के हाथों सही गई प्रताड़ना को झारखंड में छात्र प्रदर्शनकारियों की मदद करने के अपने जज्बे के आड़े नहीं आने दिया.
गाजियाबाद के एलएलबी छात्र जुनैद, जिन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व वाले प्रदर्शनकारियों को 35 दिनों तक भोजन की आपूर्ति की थी, ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए कहा था कि पुलिस ने उन्हें छह घंटे तक हिरासत में रखा, धमकी दी, डराने की कोशिश की और उत्तराखंड में उनके विस्तारित परिवार को भी परेशान किया. वह अब रांची पहुंच चुके हैं और झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर दो सप्ताह से प्रदर्शन कर रहे छात्रों को भोजन परोसना शुरू कर दिया है.
‘पीटीआई और टेलीग्राफ वेब डेस्क’ के अनुसार, 30 वर्षीय जुनैद ने कहा, "हमने नाश्ते की व्यवस्था की और यहां प्रदर्शनकारियों के लिए उचित भोजन और अन्य आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहे थे. यह एक सामूहिक प्रयास है. ऐसा नहीं है कि यह अकेले जुनैद कर रहा है." उन्होंने कहा, "दिल्ली से हमारी पूरी टीम यहां मौजूद है और आज और भी लोगों के जुड़ने की उम्मीद है. हम शाम को वेज बिरयानी परोसेंगे."
जुनैद ने कहा कि स्वयंसेवक "न्याय मिलने तक छात्रों के संघर्ष में उनके साथ खड़े रहेंगे." उन्होंने आगे कहा, "हम उनमें से हर एक का समर्थन करते हैं और उनके साथ बने रहेंगे." उन्होंने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार से छात्रों की बात सुनने और उनकी मांगों का समाधान करने की भी अपील की.
जुनैद ने पूछा, "बारिश हो रही है और धरना स्थल पर पानी जमा हो गया है. मच्छरों के पनपने का खतरा है, जिससे बीमारियां फैल सकती हैं. यह इन छात्रों के लिए अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने का बेहद महत्वपूर्ण समय है. फिर उन्हें यह मूल्यवान समय यहां बिताने के लिए मजबूर क्यों किया जा रहा है?"
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुक्रवार को 14वें दिन में प्रवेश कर गया, जिसमें छह प्रदर्शनकारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं. उनमें से एक को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है.
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार से बार-बार की गई अपीलों का कोई ठोस परिणाम न निकलने के बाद वे आंदोलन का यह चरम रास्ता अपनाने को मजबूर हुए हैं. झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के नेता देवेंद्र नाथ महतो पिछले छह दिनों से उपवास पर हैं.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा यह कहे जाने के बाद कि उनकी सरकार के दरवाजे बातचीत के लिए खुले हैं, आंदोलनकारी छात्रों ने गतिरोध को सुलझाने के लिए सरकार के साथ बातचीत करने हेतु गुरुवार को एक 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का गठन किया.
हालांकि गतिरोध बना हुआ है, क्योंकि प्रदर्शनकारी छात्रों और नौकरी के अभ्यर्थियों का आरोप है कि उनकी मांगों पर चर्चा करने और मुद्दों को सुलझाने के लिए राज्य सरकार की ओर से कोई औपचारिक निमंत्रण प्राप्त नहीं हुआ है. जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच के बैनर तले 25 जुलाई को शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन हाल के वर्षों में झारखंड में छात्रों के नेतृत्व वाले सबसे बड़े आंदोलनों में से एक बनकर उभरा है.

