‘एसआईटी काफी नहीं, राम मंदिर भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए सीबीआई जांच जरूरी’: आचारी मंदिर के प्रमुख
अयोध्या के प्राचीन दंत धावन कुंड आचारी मंदिर के महंत विवेक आचारी ने कहा है कि राम मंदिर से दान की चोरी से जुड़े 'भ्रष्टाचार' की तह तक जाने के लिए केवल विशेष जांच दल (एसआईटी) काफी नहीं है, बल्कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा जांच की आवश्यकता है.
पुजारी ने कहा, "आप जितना इसकी गहराई में जाएंगे, उतना समझेंगे कि कैसे भ्रष्टाचार ही है. अब रामलला विराजमान हैं, वह न्याय सुनिश्चित करेंगे."
उन्होंने आगे कहा, "एसआईटी ठीक है लेकिन अगर सीबीआई (इस मामले की जांच के लिए) आती है तो चीजें बहुत अधिक स्पष्ट हो जाएंगी. सीबीआई पैसों के लेन-देन की जांच कर सकती है और जहां भी जरूरत हो यात्रा कर सकती है, जबकि एसआईटी को शायद अनुमति लेनी पड़े. इसलिए सीबीआई को शामिल किया जाना चाहिए ताकि किसी अयोध्यावासी पर लगा कलंक मिट सके."
आकांक्षा कुमार की रिपोर्ट के अनुसार, आचारी ने सवाल उठाया कि राम मंदिर को मिले कीमती उपहारों को परिसर के भीतर क्यों नहीं रखा जाता या उनका विवरण जनता के सामने क्यों नहीं उजागर किया जाता? "आभूषण, चांदी, सोने आदि की मात्रा को सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता, जैसा कि साईं बाबा मंदिर या तिरुपति के मामले में किया जाता है? इसके अलावा, सभी आभूषण और संपत्ति कारसेवकपुरम में क्यों रखे गए हैं, मंदिर में क्यों नहीं?"
उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर निर्माण के दौरान हिंदू रीति-रिवाजों का पालन नहीं किया गया और इन कमियों का परिणाम अब सामने आ रहा है.
उन्होंने आरोप लगाया, "गर्भगृह के ऊपर दूसरा गर्भगृह क्यों बनाया गया है? दुनिया में कहीं भी इसका कोई उदाहरण नहीं मिलता. यदि आप नए गर्भगृह में दर्शन करते हैं, तो आप भगवान के ऊपर खड़े होते हैं. ऐसा क्यों? क्योंकि किसी ने किसी की बात नहीं सुनी और फैसले लेने से पहले, जब यहाँ प्राण-प्रतिष्ठा या ध्वजारोहण किया गया, तब लोगों को विश्वास में नहीं लिया गया." वह इस बात का जिक्र कर रहे थे कि मंदिर के राम दरबार में, जो मुख्य रामलला की मूर्ति के एक स्तर ऊपर है, मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा की गई है.
आचारी ने मंदिर ट्रस्ट के विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव का संदर्भ देते हुए कहा, "वहाँ 18 पुजारी हैं और वे गोपाल राव को फोन किए बिना गर्भगृह के अंदर जाकर तुलसी के पत्ते तक नहीं दे सकते." बता दें कि गोपाल राव भी गबन के आरोपों में घिर गए हैं और ट्रस्ट ने सोमवार को उन्हें हटा दिया है.
उन्होंने कहा कि एक बार अमेरिका से एक भक्त मंदिर आया था और भगवान के आशीर्वाद के रूप में कुछ तुलसी के पत्ते या फूल ले जाना चाहता था, लेकिन पुजारी "उसे एक छोटा सा टीका या स्मृति चिह्न तक नहीं दे सके." उन्होंने सवाल उठाया, "जब हर चीज पर इतना नियंत्रण है, तो कोई कैसे मान सकता है कि शीर्ष पर बैठे लोगों को भ्रष्टाचार के विवरण की जानकारी नहीं थी?"
आचारी ने आरोप लगाया कि ट्रस्टियों में से केवल "तीन या चार" लोग ही मंदिर के मामलों को नियंत्रित करते थे और अन्य केवल 'दिखावटी' थे, जिन्हें कभी विश्वास में नहीं लिया गया.
पुजारी ने मांग की, "मंदिर के ट्रस्टियों द्वारा किए गए भूमि सौदों की पूरी जांच होनी चाहिए और उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए. लोगों और भक्तों ने भगवान को दान दिया है और (मंदिर के मामलों को) एक कोटरी नियंत्रित नहीं कर सकती." उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब राज्य द्वारा तैनात सुरक्षाकर्मी पहले से मौजूद हैं, तो ट्रस्ट को निजी सुरक्षाकर्मियों की क्या आवश्यकता थी.
आचारी ने शहर के कई अन्य मंदिरों को राम मंदिर परिसर के भीतर शामिल किए जाने पर भी आपत्ति जताई. उन्होंने कहा, "पूरी अयोध्या में इतने प्राचीन, सुंदर और महत्वपूर्ण मंदिर हैं. उन्हें सुंदर बनाया जाना चाहिए था और पूरे शहर को भव्य रूप दिया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ."

