कानून का उल्लंघन: अडानी के मुंबई एयरपोर्ट स्टोर्स पर बिक रहे थे निकोटीन पाउच

भारत सरकार की एक जांच में यह बात सामने आई है कि अरबपति गौतम अडानी के कारोबारी समूह द्वारा संचालित मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के ड्यूटी-फ्री स्टोर कानून का उल्लंघन कर निकोटीन पाउच बेच रहे थे. जांच दस्तावेज के अनुसार, सरकार इन पाउच को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा मानती है. हालांकि, अडानी समूह ने किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है. वह न्यायाधीशों से यह घोषित करने की मांग कर रहा है कि दवाओं और सौंदर्य प्रसाधनों से जुड़ा कानून ड्यूटी-फ्री दुकानों और निकोटीन पाउच पर लागू नहीं होता है.

वकीलों का कहना है कि यह मामला एक मिसाल बन सकता है कि भारत ऐसे आउटलेट्स पर बिक्री को कैसे नियंत्रित करता है.अगर सरकार यह केस जीतती है, तो भारत के हवाई अड्डों पर दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते निकोटीन उत्पादों में से एक की बिक्री पूरी तरह बंद हो सकती है, जैसा कि ‘रॉयटर्स’ में आदित्य कालरा की रिपोर्ट में बताया गया है.

भारत ने ई-सिगरेट पर प्रतिबंध लगा रखा है और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के बाद पैच और च्युइंग गम जैसे कुछ निकोटीन रिप्लेसमेंट उत्पादों को मंजूरी दी है. हालांकि, निकोटीन पाउच अभी भी अवैध और गैर-मंजूरी शुदा हैं.

भारत में तंबाकू से हर साल 13.5 लाख (1.35 मिलियन) लोगों की मौत होती है. जून में सरकार के एक अध्ययन में निकोटीन पाउच को "एक नई और काफी हद तक अनियंत्रित सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता" कहा गया था, जिसकी 18 से 40 वर्ष के लोगों के बीच बड़े पैमाने पर अवैध बिक्री और खपत हो रही है.

सरकारी दस्तावेजों से पता चलता है कि निकोटीन विरोधी संगठन 'मदर्स अगेंस्ट वेपिंग' से शिकायतें मिलने के बाद, भारत के औषधि विभाग ने मार्च में मुंबई के अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ड्यूटी-फ्री दुकानों का निरीक्षण किया. वहां पाया गया कि आवश्यक मंजूरी के बिना प्रस्थान क्षेत्र में आयातित निकोटीन पाउच बेचे जा रहे थे.

एक सहायक औषधि नियंत्रक ने 2 अप्रैल को हवाई अड्डे के सीमा शुल्क प्राधिकरण को लिखे एक पत्र में एक "जांच रिपोर्ट" संलग्न करते हुए कहा, "निकोटीन पाउच भी दवा की परिभाषा के अंतर्गत आते हैं... इसके लिए एक वैध पंजीकरण प्रमाण पत्र और आयात लाइसेंस अनिवार्य है."

सरकारी पत्रों के अनुसार, दुबई की फ्लेमिंगो कंपनी के साथ अडानी के नेतृत्व वाले संयुक्त उद्यम 'मुंबई ट्रैवल रिटेल' को निकोटीन पाउच की बिक्री बंद करने और इसके लिए मंजूरी लेने को कहा गया था.

बिना लाइसेंस के दवा बेचने पर कम से कम तीन साल की कैद और कम से कम 1,00,000 रुपये ($1,049) का जुर्माना, या जब्त की गई दवाओं के मूल्य का तीन गुना, जो भी अधिक हो, की सजा हो सकती है.

अडानी की कंपनी ने अधिकारियों से कहा है कि अंतर्राष्ट्रीय प्रस्थान क्षेत्र की दुकानें "भारत की सीमा शुल्क सीमाओं के पार" व्यापार करती हैं और घरेलू नियमों के विनियामक दायरे से बाहर हैं. यह बात कंपनी की गैर-सार्वजनिक हाई कोर्ट याचिका से सामने आई है.

सिप्ला और ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स जैसी भारतीय दवा कंपनियों के पूर्व जनरल काउंसल मुरली नीलकंतन ने इस तर्क पर सवाल उठाते हुए कहा, "अगर दुकान के अंदर कोई हत्या हो जाती है, तो क्या भारतीय पुलिस के पास गिरफ्तार करने का कोई अधिकार नहीं होगा? उनके पास अधिकार होगा... क्या वे बंदूकें या गोला-बारूद बेच सकते हैं? नहीं. "

24 जून को, मुंबई हाई कोर्ट के न्यायाधीशों ने कहा कि मुंबई की ड्यूटी-फ्री दुकानों पर निकोटीन पाउच के मौजूदा स्टॉक पर "कोई दंडात्मक कार्रवाई" नहीं की जानी चाहिए और मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई तय की.

पाउच एक "हालिया नवाचार" है

अडानी भारत में आठ हवाई अड्डे चलाते हैं और 11 अरब डॉलर के विस्तार का लक्ष्य रख रहे हैं, जिसमें ड्यूटी-फ्री पेशकशों पर बड़ा दांव शामिल है. मुंबई के अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर यह 30 से अधिक ड्यूटी-फ्री दुकानें संचालित करता है.

दस्तावेजों से पता चलता है कि अदालत में अडानी की कंपनी ने कहा कि निकोटीन पाउच "कोई दवा नहीं हैं" और वे एक "हालिया नवाचार" हैं, जिसकी उम्मीद मौजूदा तंबाकू नियंत्रण कानूनों में नहीं की गई थी.

सीमा शुल्क रिकॉर्ड से पता चलता है कि अगस्त से अडानी की कंपनी ने $29,000 से अधिक मूल्य के विभिन्न स्वादों में फिलिप मॉरिस के 'ज़िन' निकोटीन पाउच और स्वीडिश स्मोकलेस सॉल्यूशंस से $7,700 मूल्य के 'व्हाइट फॉक्स' ब्रांड का आयात किया था.

फिलिप मॉरिस का कहना है कि 2025 में ज़िन की अमेरिकी बिक्री 2023 की तुलना में दोगुनी हो गई. जून के भारतीय सरकारी अध्ययन में कहा गया था कि ज़िन और व्हाइट फॉक्स दोनों ही भारतीय विक्रेताओं द्वारा अवैध रूप से बेचे जा रहे थे.

अलग से, फ्लेमिंगो ड्यूटीफ्री ने हाई कोर्ट को बताया है कि वह मुंबई सहित अंतर्राष्ट्रीय बंदरगाहों पर दुकानें संचालित करती है. उसे भी ऐसी ही कार्रवाई का डर है क्योंकि वह निकोटीन पाउच का "स्टॉक करने की प्रक्रिया में" थी.

कंपनी ने कहा कि निकोटीन पाउच के लिए लाइसेंस मांगने से आपूर्तिकर्ता उन्हें बाजार से वापस लेने पर मजबूर होंगे, जिससे "भारत में शुल्क मुक्त उद्योग यात्रियों के लिए आकर्षक नहीं रह जाएगा.

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