सऊदी अरब और यूएई ने किए ईरान पर गुप्त हमले- मध्य पूर्व युद्ध का नया और ख़तरनाक मोड़

न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध ने एक बड़ा और अभूतपूर्व मोड़ ले लिया है. न्यूयॉर्क टाइम्स ने दो वर्तमान और एक पूर्व वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के हवाले से ख़ुलासा किया है कि सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने अलग-अलग ईरान पर सीधे हमले किए — और यह पहली बार है जब इन दोनों देशों ने खुलकर ईरान पर सीधी सैन्य कार्रवाई की है. ये हमले ईरान द्वारा उन पर किए गए हमलों के जवाब में किए गए. तीनों अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर यह जानकारी दी और उन्होंने हमले के सटीक लक्ष्यों या तारीखों का खुलासा नहीं किया.

न तो सऊदी और न ही अमीराती सरकार ने इन हमलों को स्वीकार किया है. दोनों देश अपनी धरती पर अमेरिकी सैन्य अड्डे होस्ट करते हैं और सार्वजनिक रूप से इस युद्ध में ख़ुद को केवल "रक्षात्मक भूमिका" में बताते रहे हैं. लेकिन यदि ये हमले सच हैं तो दोनों देश अब सीधे जंग में एक पक्ष बन गए हैं. सऊदी सरकार के मीडिया केंद्र और अमीराती विदेश मंत्रालय ने टिप्पणी के लिए किए गए अनुरोध का जवाब नहीं दिया. सऊदी हमलों की ख़बर रॉयटर्स ने और अमीराती हमलों की ख़बर वॉल स्ट्रीट जर्नल ने पहले दी थी.

पृष्ठभूमि यह है कि 28 फ़रवरी को अमेरिका और इज़रायल ने ईरान पर हमले किए — खाड़ी देशों की सलाह के विरुद्ध. इसके बाद ईरान ने खाड़ी के उन देशों पर हज़ारों मिसाइल और ड्रोन से हमले किए जहाँ अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं. इन हमलों में ऊर्जा अवसंरचना, हवाईअड्डे, बंदरगाह और होटलों को व्यापक नुकसान पहुंचा और कम से कम 19 आम नागरिकों की जान गई. इन हमलों ने खाड़ी देशों की "सुरक्षित व्यापार और पर्यटन केंद्र" की छवि को गहरी चोट पहुंचाई है.

इन हमलों के बाद ही सऊदी और अमीराती सरकारों ने सीधी जवाबी कार्रवाई का फ़ैसला किया. यह साफ़ नहीं है कि दोनों देशों ने अपने हमलों में अमेरिका से तालमेल किया था या नहीं. विश्लेषकों का मानना है कि यह फ़ैसला — कम से कम आंशिक रूप से — ट्रंप प्रशासन की नज़रों में चढ़ने की कोशिश भी हो सकती है. ट्रंप ने मार्च में पत्रकारों से कहा था कि सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान "हमारे साथ लड़ रहे हैं." बाद में मियामी में एक सम्मेलन में ट्रंप ने दावा किया: "सऊदी अरब लड़ा, क़तर लड़ा,यूएई लड़ा, बहरीन लड़ा और कुवैत लड़ा." हालांकि इन देशों में से किसी ने भी सार्वजनिक रूप से ईरान पर सीधे हमले या अमेरिकी हमलों के लिए अपनी धरती के इस्तेमाल की पुष्टि नहीं की है.

यूएई ने इस पूरे युद्ध में सऊदी अरब से कहीं अधिक ईरानी हमले झेले हैं और उसका रुख भी ईरान के प्रति ज़्यादा कठोर रहा है. युद्ध के दौरान इज़रायल ने चुपके से यूएई को कुछ आयरन डोम मिसाइल रक्षा प्रणाली भेजी — ऐसा दो सूत्रों ने गोपनीयता की शर्त पर बताया. गुरुवार को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने यूएई को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि वह "मेरे देश के ख़िलाफ़ आक्रामक कार्रवाई में सीधे शामिल था." उन्होंने कहा: "उन्होंने इन हमलों में भाग लिया और शायद सीधे हमारे ख़िलाफ़ भी कार्रवाई की." यह बयान ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फ़ार्स के हवाले से आया है.

दोनों देशों ने अमेरिकी सुरक्षा गारंटी पर ऐतिहासिक रूप से भरोसा किया है, लेकिन यह युद्ध उस धारणा को हिला चुका है. इससे पहले, दोनों देश ईरान के साथ राजनयिक संबंध सुधारने की राह पर थे और तनाव को कूटनीति से संभालने को प्राथमिकता दे रहे थे. इस युद्ध ने उस नाज़ुक संतुलन को पूरी तरह तोड़ दिया है. सऊदी अरब अभी भी ईरान के साथ कूटनीतिक संपर्क बनाए हुए है और पाकिस्तान की मध्यस्थता का समर्थन कर रहा है — लेकिन उसके विदेश मंत्री प्रिंस फ़ैसल बिन फ़रहान ने मार्च में साफ़ कहा था: "हम ज़रूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई करने से नहीं हिचकेंगे. हम अपने देश और आर्थिक संसाधनों की रक्षा से नहीं हटेंगे."

अधिकारियों और विश्लेषकों का मानना है कि सार्वजनिक स्वीकृति से और अधिक ईरानी हमलों का डर है. साथ ही घरेलू स्तर पर — जहाँ इज़रायल के प्रति जनमत अत्यंत नकारात्मक है.अमेरिका और इज़रायल के नेतृत्व वाले युद्ध में शामिल दिखना राजनीतिक रूप से संवेदनशील है.

 

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