बंदी संजय के बेटे की अग्रिम ज़मानत अर्जी पर तेलंगाना हाई कोर्ट में सुनवाई, पॉक्सो और उम्र का विवाद केंद्र में
तेलंगाना हाई कोर्ट में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार के बेटे बंदी साई बागीरथ की अग्रिम ज़मानत याचिका पर 14 मई को सुनवाई हुई, लेकिन अदालत ने कोई आदेश पारित करने से पहले पीड़िता के वकील को सुनना ज़रूरी माना और मामला 15 मई के लिए स्थगित कर दिया. साउथ फर्स्ट की रिपोर्ट के अनुसार, यह सुनवाई इस लिहाज़ से निर्णायक है कि अगर अदालत अंतरिम संरक्षण देती है तो बागीरथ SIT के सामने पेश हो सकते हैं, और अगर नहीं देती तो पेट बशीराबाद थाने में हाज़िर होते ही उनकी गिरफ्तारी हो सकती है.
बागीरथ के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता एस. निरंजन रेड्डी ने अदालत के सामने साफ कहा — "मैं जाँच में शामिल होना चाहता हूँ, लेकिन अगर गया तो बाहर नहीं आऊँगा." उनका तर्क था कि जब तक अग्रिम ज़मानत याचिका लंबित है, तब तक गिरफ्तारी उस याचिका को ही निरर्थक बना देगी. उन्होंने अदालत से अनुरोध किया — "मुझे अंतरिम संरक्षण दें और मैं पुलिस के पास जाऊँगा."
सुनवाई के दौरान अदालत ने दो तीखे सवाल पूछे जो शुक्रवार की बहस की दिशा तय करेंगे. पहला सवाल सरकारी वकील से था कि एफआईआर में दर्ज धाराएँ अधिकतम 5 से 7 साल की सज़ा देती हैं जबकि आरोप इतने गंभीर हैं — ऐसा क्यों? सरकारी वकील ने बताया कि पीड़िता का बयान दर्ज होने के बाद धाराएँ बदल दी गई हैं और अब पॉक्सो की धारा 5(l) के साथ धारा 6 लगाई गई है, जो किसी बच्चे के साथ बार-बार किए गए गंभीर यौन उत्पीड़न को परिभाषित करती है और इसमें न्यूनतम 20 साल की कठोर सज़ा, अधिकतम आजीवन कारावास या मृत्युदंड तक का प्रावधान है.
दूसरा सवाल पीड़िता के वकील से था कि पीड़िता की दो अलग-अलग जन्मतिथियाँ कैसे हो सकती हैं. यहीं से उम्र का विवाद मामले का दूसरा बड़ा मुद्दा बन गया. बागीरथ के वकील ने तर्क दिया कि 2021 में नाबालिग वाहन चलाने के एक मामले में दर्ज चार्जशीट में पीड़िता की उम्र 15 साल बताई गई थी. उनका कहना है कि अगर यह सही है, तो आरोपों के समय वह 19-20 साल की रही होगी, यानी वयस्क — और तब पॉक्सो लागू ही नहीं होगा. अदालत ने सीधे पूछा — "क्या आप कह रहे हैं कि यह पॉक्सो का मामला है ही नहीं?" जिस पर वकील ने कहा कि अगर 2021 की चार्जशीट सही है तो अदालत को पीड़िता की उम्र पर संदेह करने का कारण है.
पीड़िता के वकील ने इस अर्जी का विरोध करते हुए बताया कि बागीरथ फरार हैं, उनके पिता मंत्री हैं, और उन्हें विस्तृत जवाब दाखिल करने का समय चाहिए. बागीरथ के वकील ने यह भी रेखांकित किया कि आरोपों में आठ महीने का अंतर है — कथित घटना जून 2025 में शुरू हुई, दिसंबर 2025 में आखिरी घटना हुई, और एफआईआर 8 मई 2026 को दर्ज की गई. पूर्ण अग्रिम ज़मानत याचिका की सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित है.

