सिचुएशन रूम में निपल्स की चर्चा

जब अमेरिका के सबसे ताकतवर कमरे में बैठे थे ट्रंप के सबसे ताकतवर लोग, और बात हो रही थी एपस्टीन की

न्यूयॉर्क टाइम्स, मैगी हैबर्मन और जोनाथन स्वान, 10 जून 2026. यह रिपोर्ट उनकी आगामी किताब "रेजीम चेंज: इनसाइड द इम्पीरियल प्रेसिडेंसी ऑफ़ डोनाल्ड ट्रंप" की रिपोर्टिंग पर आधारित है.


दुनिया में एक कमरा है जहाँ अमेरिका के राष्ट्रपति ओसामा बिन लादेन को मारने का फ़ैसला करते हैं. जहाँ परमाणु बटन की बात होती है. जहाँ जंग शुरू होती है और जंग ख़त्म होती है. उसे कहते हैं — व्हाइट हाउस सिचुएशन रूम.

17 जुलाई, 2025 की शाम छह बजे, उसी कमरे में अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस बैठे थे. उनके साथ थे, चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ सूज़ी वाइल्स, व्हाइट हाउस काउंसेल डेविड वॉरिंगटन, प्रेस सेक्रेटरी कैरोलीन लेविट, डेप्युटी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच, और कई दूसरे बड़े नाम. स्पीकरफ़ोन पर अटॉर्नी जनरल पैम बोंडी और एफ़बीआई डायरेक्टर काश पटेल.

और जो मुद्दा था?

वो था जेफ़री एपस्टीन.

वही एपस्टीन जो पीडोफ़ाइल था, यौन तस्कर था, और जो 2019 में जेल में "ख़ुदकुशी" कर मरा. जिसके बारे में पूरी दुनिया को शक है कि उसे मारा गया. जिसके बारे में कहा जाता है कि उसके पास एक "क्लाइंट लिस्ट" थी. दुनिया के सबसे ताक़तवर लोगों के नाम, जिन्होंने नाबालिग़ लड़कियों का यौन शोषण किया.

पहले ज़रा पृष्ठभूमि समझिए

जब डोनाल्ड ट्रंप 2025 में दोबारा व्हाइट हाउस पहुँचे, तो उनके सबसे क़रीबी लोगों ने, ख़ुद जेडी वेंस ने, डोनाल्ड ट्रंप जूनियर ने, काश पटेल ने, टकर कार्लसन ने, वादा किया था कि "एपस्टीन फ़ाइलें" सार्वजनिक की जाएंगी. यह वादा माग़ा बेस को बहुत पसंद आया था. लोगों को लगा था कि अब "डीप स्टेट" का पर्दाफ़ाश होगा और उन "ताक़तवर लोगों" के नाम आएंगे जो बच्चों के साथ अपराध करते थे.

लेकिन जब ट्रंप के अपने लोग उन फ़ाइलों में झाँके, तो जो दिखा, उसने उनके पसीने छुड़ा दिए.

फ़ाइलों में ख़ुद ट्रंप का नाम था. बार-बार.

वो बर्थडे कार्ड

उसी दिन, 17 जुलाई की उस सिचुएशन रूम बैठक के बीच, वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक धमाकेदार रिपोर्ट छपी.

सिचुएशन रूम में मोबाइल फ़ोन ले जाना मना है. तो स्टाफ़ उस रिपोर्ट की प्रिंटेड कॉपियाँ लेकर आया. अमेरिका के सबसे ताक़तवर लोग उस प्रिंटआउट को पढ़ने लगे, चुपचाप.

रिपोर्ट क्या थी?

2003 में एपस्टीन के जन्मदिन के लिए गिलेन मैक्सवेल, एपस्टीन की गर्लफ्रेंड और सह-अपराधी, जो अभी जेल में है, ने एक ख़ास बर्थडे बुक बनाई थी. उसमें ट्रंप का भी एक हाथ से बना कार्ड था. उस कार्ड में एक नग्न महिला की तस्वीर थी, हाथ से खींची हुई. और उसमें एक काल्पनिक संवाद लिखा था, जिसमें ट्रंप और एपस्टीन के बीच किसी "वंडरफ़ुल सीक्रेट" की बात थी. कार्ड पर दस्तख़त, ट्रंप का मशहूर कच्चा-पक्का शार्पी सिग्नेचर, महिला के प्यूबिक हेयर की जगह था.

ट्रंप ने रिपोर्ट रोकने के लिए वॉल स्ट्रीट जर्नल के मालिक रुपर्ट मर्डोक को फ़ोन किया था. सीईओ रॉबर्ट थॉमसन को फ़ोन किया था. एडिटर इन चीफ़ एम्मा टकर को फ़ोन करके चिल्लाए थे, "तुम अमेरिका से नफ़रत करती हो." मुकदमे की धमकी दी.

कुछ नहीं हुआ. रिपोर्ट छपी.

जेडी वेंस, घबराए हुए उपराष्ट्रपति

सिचुएशन रूम में वेंस घबराए हुए थे. उनके क़रीबी लोगों ने बाद में बताया कि वे एपस्टीन की "डार्क थ्योरीज़" को सच मानते थे कि देश के शासन में एक गुप्त दुराचारी नेटवर्क है. सूज़ी वाइल्स ने बाद में सहयोगियों से कहा  "वेंस तो बहुत बड़े षड्यंत्र के भक्त निकले."

वेंस ने एक और अजीब सुझाव दिया था कि टकर कार्लसन से गिलेन मैक्सवेल का जेल में इंटरव्यू करवाया जाए. मक़सद? ताकि मैक्सवेल यह कह सके कि ट्रंप ने कुछ ग़लत नहीं किया.

वेंस का तर्क था सब कुछ सार्वजनिक कर दो. अगर ट्रंप के बारे में भी कुछ है, वो भी बाहर आए. इससे "पारदर्शिता" का श्रेय मिलेगा और षड्यंत्र की हवा निकलेगी.

ब्लैंच का "ऑप्शन 1 और 2"

ट्रंप के पुराने बचाव वकील और अब डेप्युटी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने दो विकल्प रखे.

पहला विकल्प: फ़्लोरिडा और न्यूयॉर्क की अदालतों से ग्रैंड जूरी ट्रांसक्रिप्ट सार्वजनिक करने की माँग करो. यह रणनीति इस उम्मीद पर थी कि जज मना कर देंगे — क्योंकि ग्रैंड जूरी की गोपनीयता अमेरिकी क़ानून में लगभग पवित्र मानी जाती है. तब जिम्मेदारी ट्रंप प्रशासन की नहीं, "डेमोक्रेट जजों" की होगी.

मतलब  ऐसा दिखो कि चाहते हो रिलीज़, जबकि जानते हो कि होगी नहीं.

दूसरा विकल्प: मैक्सवेल का इंटरव्यू.

वेंस ने कहा  "कांग्रेस से बात कराएं उसे."

ब्लैंच बोले  "मैक्सवेल की वकील कुछ माँग सकती है बदले में."

व्हाइट हाउस काउंसेल वॉरिंगटन ने विकल्प रखा "माफ़ी या सज़ा में कमी."

और तब सब एक साथ बोले नहीं.

कम्युनिकेशन डायरेक्टर स्टीवन च्युंग ने कहा - "बच्चों की तस्कर को माफ़ी दी, तो एपस्टीन की पीड़िताएं टीवी पर आ जाएंगी. यह हमें बर्बाद कर देगा."

डेप्युटी चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ जेम्स ब्लेयर ने कहा "मैक्सवेल को कुछ भी नहीं दे सकते. और अगर दिया और उसने ट्रंप के हक़ में बोला, तो लोगों को लगेगा  देखो, सौदा हुआ. षड्यंत्र की थ्योरी और मज़बूत हो जाएगी."

पैम बोंडी और वो "एपिक" बाँटा जाने वाला बस्ता

इससे पहले, 27 फ़रवरी 2025 को एक और नाटक हुआ था.

व्हाइट हाउस के रूज़वेल्ट रूम में माग़ा के बड़े इंफ़्लुएंसर बुलाए गए थे, माइक सर्नोविच, लिज़ व्हीलर, कॉलिन रग, डीसी ड्राइनो और कुछ और. ट्रंप ने ख़ुद उन्हें ओवल ऑफ़िस में बुलाकर "चैलेंज कॉइन्स" दिए. एक इंफ़्लुएंसर ने कहा, "यह मेरी ज़िंदगी का सबसे अच्छा दिन था."

तब आईं अटॉर्नी जनरल पैम बोंडी, बक्से लेकर. बाइंडर्स थे उन बक्सों में. बोंडी के स्टाफ़ ने कहा, "देखो यह. यह तो कमाल है. यह तो एपिक होगा."

बाइंडर बाँटे गए.

एक अधिकारी ने बाइंडर खोला और पन्ने पलटे ट्रंप का नाम कुछ ही पन्नों में था.

उस दिन ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कियर स्टार्मर व्हाइट हाउस में थे. अगर ख़बर फूटती तो प्रेस कॉन्फ़्रेंस में सारे सवाल एपस्टीन के होते.

किसी ने इंफ़्लुएंसर्स को जल्दी से बाहर धकेला "अभी एम्बार्गो है, बाद में बात होगी."

वे बाहर गए व्हाइट हाउस के सामने बाइंडर लेकर सेल्फ़ी खींची और सोशल मीडिया पर डाल दी.

नतीजा? माग़ा बेस में भारी उत्सुकता.

और जो बाइंडर था? उसमें पहले से उपलब्ध जानकारी थी, कुछ नया नहीं. बोंडी ने एक साथ दो काम किए फ़ाइलों को "बड़ा" बताया और उन्हें "तुच्छ" साबित किया.

बोंगीनो का विस्फ़ोट

जब 7 जुलाई 2025 को जस्टिस डिपार्टमेंट और एफ़बीआई का वो मेमो आया, जिसमें लिखा था कि कोई "क्लाइंट लिस्ट" नहीं है और एपस्टीन ने ख़ुदकुशी की, तो माग़ा बेस आग-बबूला हो गई.

डेन बोंगीनो, पूर्व सीक्रेट सर्विस एजेंट, एफ़बीआई के डेप्युटी डायरेक्टर और माग़ा पॉडकास्टर, जो ख़ुद इस मेमो के ख़िलाफ़ थे, उन पर भी ग़ुस्सा टूट पड़ा.

उसी दिन जस्टिस डिपार्टमेंट की एक बैठक में बोंगीनो पहुँचे. और सीधे पैम बोंडी पर चिल्लाए.

"तुमने यह पूरी चीज़ शुरू से बर्बाद की. वो 'मेरे डेस्क पर रखा है' वाली बकवास. उन इंफ़्लुएंसर्स के साथ वो ड्रामा. वो सब वादे."

बोंगीनो और काश पटेल, दोनों ने वाइल्स से कहा कि बोंडी को इस्तीफ़ा देना चाहिए.

9 जुलाई को वाइल्स के दफ़्तर में बैठक हुई. वाइल्स ने बोंगीनो पर आरोप लगाया कि उन्होंने एबीसी न्यूज़ को लीक किया.

बोंगीनो ने कहा, "एक लाख डॉलर नक़द दो अभी. बाहर चलो, उस रिपोर्टर को स्पीकर पर लगाओ, वो कहे कि मैंने लीक किया, तो ले जाओ पैसे."

वाइल्स बोलीं, "हम सब इसमें हैं."

बोंगीनो ने काटा, "नहीं. मैं नहीं. मैंने तुम्हें चेताया था. तुमने नहीं सुना. और अब तुम मुझ पर थोप रही हो."

वाइल्स ने कहा, "आगे साथ चलना है या नहीं?"

बोंगीनो बोले, "नहीं."

और वे उठकर चले गए, सिचुएशन रूम से बाहर, वेस्ट एग्ज़िक्युटिव एवेन्यू पर, काश पटेल की बुलेटप्रूफ़ गाड़ी में.

सिचुएशन रूम में "निपल" चर्चा

13 अगस्त 2025 की शाम को एक और बैठक. इस बार एपस्टीन की फ़ाइलें एक सर्चेबल वेबसाइट पर डालने की योजना थी.

किसी ने उस वेबसाइट का टेस्ट वर्ज़न खोला और ट्रंप का नाम सर्च किया.

जो पहली चीज़ निकली वो थी सारा रैनसम का एक ईमेल.

रैनसम एपस्टीन की एक पीड़िता ने एक पत्रकार को ईमेल में लिखा था कि उसकी एक सहपीड़िता "जेन" ने बताया कि ट्रंप ने उसके साथ यौन संबंध बनाए. और यह भी लिखा कि ट्रंप को निपल्स में असामान्य रुचि थी इतनी कि जेन के निपल्स लाल और सूजे हुए थे.

यह रैनसम का बयान था जो ख़ुद उसने बाद में वापस लिया. जो अप्रमाणित था. जो 2023 में एक अदालती दस्तावेज़ के अनसीलिंग में सामने आया था. और जो चुनावी हलचल में दब गया था.

लेकिन अगर जस्टिस डिपार्टमेंट की ब्रांडेड वेबसाइट पर यह "सरकारी दस्तावेज़" की तरह दिखता तो?

एक अधिकारी बोले "यह बाहर है. इससे बड़ा हंगामा होगा. भले ही यह झूठ हो और सब जानते हों."

वेंस ने कहा  "डालो. ट्रंप पर इससे बड़े आरोप लगे हैं."

वाइल्स ने कहा "राष्ट्रपति यह नहीं चाहेंगे."

बहस ख़त्म.

एक अधिकारी ने बाद में कहा "व्हाइट हाउस के सबसे सुरक्षित कमरे में बैठकर निपल्स पर बात करना — यह सुरियल था."

अंत में क्या हुआ

नवंबर 2025 में कांग्रेस में एपस्टीन फ़ाइल्स ट्रांसपेरेंसी एक्ट पास हुआ — दोनों पार्टियों की सहमति से. ट्रंप ने दस्तख़त किए. उनके पास विकल्प नहीं था.

क़ानून साफ़ था कोई दस्तावेज़ इसलिए नहीं रोका जाएगा कि उससे किसी को शर्मिंदगी हो.

35 लाख से ज़्यादा पन्ने जारी हुए. उनमें ट्रंप का नाम 38,000 से ज़्यादा जगह था. 1993 से 1996 के बीच एपस्टीन के प्राइवेट जेट में कम से कम 8 उड़ानें जो ट्रंप ने जनवरी 2024 में "कभी नहीं" बताई थीं.

और ट्रंप?

फ़रवरी 2026 में व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बोले

"इन सबके बारे में बहुत सवाल हैं. लेकिन मेरे बारे में? कुछ नहीं."

यह वही देश है जिसने ख़ुद को "दुनिया का सबसे पारदर्शी लोकतंत्र" बताया है. यहाँ सबसे सुरक्षित कमरे में, दुनिया के सबसे ताक़तवर देश के सबसे ताक़तवर लोग बैठकर यह सोच रहे थे कि सच कैसे छुपाया जाए. और जब नहीं छुपा पाए, तो यह कैसे समझाया जाए कि जो दिख रहा है, वो असल नहीं है. जेफ़री एपस्टीन मर चुका है. लेकिन उसकी फ़ाइलें और उनमें जो नाम हैं ज़िंदा हैं.

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