इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 8 दिनों तक अवैध हिरासत में रखे गए मुस्लिम व्यक्ति को ₹2 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में एक मुस्लिम व्यक्ति, मंसूर अहमद, को आठ दिनों तक अवैध हिरासत में रखने के मामले में राज्य सरकार को ₹2 लाख का मुआवजा देने का ऐतिहासिक आदेश दिया है. न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने इस हिरासत को गैरकानूनी माना और निर्देश दिया कि मुआवजे की यह राशि तीन महीने के भीतर अनुशासनात्मक जांच पूरी कर जिम्मेदार सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) से वसूल की जाए.
याचिका के अनुसार, मार्च में खीरी थाना पुलिस ने मंसूर अहमद को बिना किसी वैध कारण के उनके घर से उठाया था और थाने में उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई थी. पुलिस ने तर्क दिया कि उन्होंने निजी मुचलका (बॉन्ड) भरने से इनकार किया था, लेकिन अदालत को रिकॉर्ड पर इसका कोई सबूत नहीं मिला.
‘मकतूब’ के मुताबिक, हाईकोर्ट ने प्रयागराज पुलिस कमिश्नरेट द्वारा शक्तियों के घोर दुरुपयोग पर सख्त नाराजगी जताते हुए इसे "चौंकाने वाली स्थिति" कहा. भविष्य के लिए सुरक्षा उपाय तय करते हुए कोर्ट ने फैसला सुनाया कि बिना कानूनी औचित्य के 24 घंटे से अधिक हिरासत में रखने पर पीड़ित को प्रति दिन ₹25,000 का मुआवजा मिलेगा, जो दोषी अधिकारी की जेब से जाएगा. अदालत का यह रुख निवारक हिरासत और गैंगस्टर एक्ट के बढ़ते दुरुपयोग के खिलाफ एक महत्वपूर्ण न्यायिक हस्तक्षेप है.

