नीट पेपर लीक: मोदी ने किया था ऐलान, लेकिन पहली फास्ट-ट्रैक कोर्ट की सुनवाई ही स्थगित, सीबीआई का वकील गैर हाजिर 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके अधीनस्थ तंत्र कितनी गंभीरता से ले रहा है, सोमवार को इसका नजारा तब देखने को मिला, जब नव-मनोनीत फास्ट-ट्रैक अदालत के समक्ष नीट पेपर लीक मामले की पहली सुनवाई टल गई. आश्चर्य है कि केन्द्रीय जांच एजेंसी सीबीआई की ओर से कोई भी वकील पेश ही नहीं हुआ. विशेष न्यायाधीश अनु ग्रोवर बलिगा आरोपी दिनेश बीवाल और विकास बीवाल की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थीं, जब अभियोजन पक्ष की अनुपस्थिति को रिकॉर्ड में लिया गया.

‘पीटीआई’ के अनुसार, न्यायाधीश ने टिप्पणी की, "जमानत याचिका पर बहस करने के लिए सुबह 10:45 बजे तक राज्य (अभियोजन) की ओर से कोई भी पेश नहीं हुआ." रोहिणी जिला अदालत में सूचीबद्ध एक अन्य मामले का हवाला देते हुए बचाव पक्ष के वकील द्वारा अधिक समय मांगे जाने के बाद अदालत ने सुनवाई 3 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी.

फास्ट-ट्रैक अदालत ने अभियोजन निदेशालय से अदालत में अभियोजन का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक लोक अभियोजक (पब्लिक प्रॉसिक्यूटर) नियुक्त करने का भी अनुरोध किया. मोदी ने 23 जुलाई को पेपर लीक मामलों में त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतें स्थापित करने की घोषणा की थी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने 23 जुलाई को एक अधिसूचना जारी कर जज बलिगा की अदालत को लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत अपराधों और संबंधित अपराधों की सुनवाई के लिए "विशेष रूप से नामित फास्ट-ट्रैक कोर्ट" के रूप में नियुक्त किया था.

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