सुप्रीम कोर्ट ने नीट-यूजी री-टेस्ट कंप्यूटर आधारित मोड में कराने की मांग ठुकराई, जुलाई में होगी अगली सुनवाई

‘द हिन्दू’ के मुताबिक,  सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट -यूजी) 2026 की दोबारा परीक्षा को कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) मोड में कराने की मांग पर तत्काल हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया. अदालत ने कहा कि इस चरण में परीक्षा के प्रारूप में बदलाव करना व्यावहारिक रूप से कठिन होगा.

नीट -यूजी 2026 की परीक्षा 3 मई को आयोजित की गई थी, लेकिन पेपर लीक के आरोपों के बाद 12 मई को इसे रद्द कर दिया गया. इसके बाद मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी गई और अब दोबारा परीक्षा 21 जून को आयोजित की जानी है.

न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की पीठ ‘राष्ट्रीय जनता दल’ के सांसद सुधाकर सिंह की याचिका पर सुनवाई कर रही थी. याचिका में मेडिकल प्रवेश परीक्षा के संचालन से जुड़े कई निर्देशों की मांग की गई थी. हालांकि सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से केवल यह मांग रखी गई कि दोबारा परीक्षा पेन-पेपर मोड के बजाय सीबीटी मोड में कराई जाए ताकि पेपर लीक जैसी घटनाओं की संभावना कम हो सके.

याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत से कहा, “आज मैं कोई दूसरी मांग नहीं कर रहा हूं. परीक्षा सीबीटी मोड में होनी चाहिए.”

इस पर पीठ ने कहा कि इस तरह की मांगों पर पहले भी विचार किया जा चुका है और उन्हें खारिज किया गया है. अदालत ने परीक्षा दोबारा आयोजित करने में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों का हवाला देते हुए कहा, “जिस तरह का दबाव इनके ऊपर है, ऐसे मामलों को हम पहले भी खारिज कर चुके हैं.”

जब याचिकाकर्ता की ओर से यह तर्क दिया गया कि पेपर लीक के बावजूद प्राधिकरण फिर से पेन-पेपर मोड में परीक्षा कराने जा रहे हैं, तब अदालत ने परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों के सामने मौजूद व्यवस्थागत चुनौतियों की ओर इशारा किया. पीठ ने कहा, “आप जानते हैं कि किस तरह की समस्याएं हैं. परीक्षा रद्द हुई है और अब उसे दोबारा आयोजित किया जा रहा है.”

अदालत ने फिलहाल इस मुद्दे पर विस्तार से सुनवाई करने से इनकार करते हुए मामले को जुलाई में सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया. पीठ ने कहा, “हम इसे अवकाश के बाद सुनेंगे.”

यह याचिका राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के कामकाज और प्रतियोगी परीक्षाओं में सुधार से जुड़ी अन्य लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ी गई है.

इससे पहले न्यायमूर्ति नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ ने पेपर लीक के आरोपों के बाद परीक्षा रद्द किए जाने पर गंभीर चिंता जताई थी. अदालत ने इसे छात्रों और उनके परिवारों के लिए “बेहद पीड़ादायक” बताया था और कहा था कि लाखों अभ्यर्थियों को प्रभावित करने वाली चूकों के लिए जवाबदेही तय की जानी चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार औरएनटीए को यह भी निर्देश दिया था कि वे अदालत के समक्ष उन उपायों का विवरण रखें जो भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए किए गए हैं.

अपने हलफनामे में एनटीए ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार के साथ परामर्श के बाद नीट-यूजी को अगले परीक्षा चक्र से सीबीटी मोड में स्थानांतरित करने का फैसला किया गया है. एजेंसी ने कहा कि परीक्षा प्रणाली की समीक्षा के लिए गठित उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति ने भी यही सिफारिश की थी.

एनटीए ने अपने हलफनामे में कहा कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ परामर्श के बाद अगले परीक्षा चक्र से यह बदलाव लागू किया जाएगा. एजेंसी के अनुसार उसकी अन्य प्रमुख परीक्षाएं पहले से ही कंप्यूटर आधारित मोड में आयोजित की जा रही हैं. 21 जून को होने वाली दोबारा परीक्षा को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए नए मानक संचालन ढांचे के तहत आयोजित किया जाएगा. इसमें बहुस्तरीय प्रमाणीकरण, कड़ी निगरानी व्यवस्था और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय जैसी व्यवस्थाएं शामिल होंगी.

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद 21 जून को होने वाली नीट -यूजी री-टेस्ट परीक्षा पेन-पेपर मोड में ही आयोजित होने का रास्ता साफ हो गया है, जबकि सीबीटी मोड में बदलाव अगले परीक्षा चक्र से लागू होने की संभावना है.

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