दाभोलकर हत्याकांड: बॉम्बे हाईकोर्ट ने हत्या के दोषी शरद कलस्कर को दी जमानत, रोक लगाने की याचिका खारिज

बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार को तर्कवादी नरेंद्र दाभोलकर की 2013 में हुई हत्या के मामले में दोषी शरद कलस्कर को जमानत दे दी.

न्यायमूर्ति अजय गडकरी और न्यायमूर्ति रंजीतसिंह भोंसले की पीठ ने 50,000 रुपये के मुचलके पर याचिका स्वीकार कर ली और इस आदेश पर रोक लगाने के अभियोजन पक्ष के अनुरोध को खारिज कर दिया.

‘पीटीआई और टेलीग्राफ वेब डेस्क’ के अनुसार कलस्कर ने वकील के माध्यम से अपनी दोषसिद्धि को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी और अपील पर सुनवाई लंबित रहने तक जमानत मांगी थी. दाभोलकर मामले में जमानत मिलने के बाद, वह औपचारिकताएं पूरी करने के बाद जेल से बाहर आ सकेगा.

महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के संस्थापक नरेंद्र दाभोलकर की 20 अगस्त 2013 को पुणे में सुबह की सैर के दौरान मोटरसाइकिल सवार दो हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. इस मामले की जांच पहले स्थानीय पुलिस ने की थी और बाद में उनकी बेटी मुक्ता दाभोलकर की याचिका पर 2014 में इसे केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया गया था.

याद रहे कि 10 मई, 2024 को एक सत्र न्यायालय ने कलस्कर और सचिन अंदुरे को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. उन्हें गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और शस्त्र अधिनियम के आरोपों से बरी कर दिया गया था. अदालत ने सबूतों के अभाव में वीरेंद्र सिंह तावड़े, संजीव पुनालेकर और विक्रम भावे को बरी कर दिया था. मुक्ता दाभोलकर ने आरोपियों को बरी किए जाने और यूएपीए की धाराओं को हटाए जाने को हाई कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें कहा गया है कि यह हत्या दक्षिणपंथी चरमपंथियों की एक बड़ी साजिश का हिस्सा थी.

कलस्कर, गोविंद पानसरे की हत्या के मामले में भी आरोपी है और पिछले साल अक्टूबर में उस मामले में उसे जमानत मिल गई थी. दाभोलकर की हत्या के बाद इसी तरह के अन्य हमले हुए थे: 2015 में गोविंद पानसरे, अगस्त 2015 में धारवाड़ में कन्नड़ विद्वान एम.एम. कलबुर्गी और सितंबर 2017 में बेंगलुरु में पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या कर दी गई थी.

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