अब भी झुलस रहा मणिपुर; कुकी-ज़ो काउंसिल ने अलग केंद्र शासित प्रदेश को ‘अपरिहार्य’ जरूरत बताया

मणिपुर का कुकी-ज़ो समुदाय अब राज्य के नागा और मैतेई दोनों समुदायों के साथ संघर्ष में उलझ गया है. लिहाजा, कुकी-ज़ो काउंसिल ने प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन में कहा है कि इन टूट चुके रिश्तों ने अलग केंद्र शासित प्रदेश की मांग को "एक अपरिहार्य आवश्यकता" (जिसे टाला न जा सके) बना दिया है.

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में सुकृता बरुआ की रिपोर्ट कहती है कि मई 2023 से, मणिपुर मैतेई और कुकी-ज़ोमी-हमार समुदायों के बीच संघर्ष की आग में झुलस रहा है, जिसके परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर विस्थापन हुआ है और एक गहरी सामाजिक व भौतिक खाई पैदा हो गई है. इस संघर्ष ने दोनों में से किसी भी समुदाय की आवाजाही को मुख्य रूप से उन्हीं इलाकों तक सीमित कर दिया है, जहाँ दूसरा समुदाय बहुमत में नहीं है. इस साल की शुरुआत में नागा और कुकी-ज़ो समुदायों के बीच भड़की और अब बढ़ चुकी तनाव की स्थिति ने मतभेदों का एक नया मोर्चा खोल दिया है.

मणिपुर का सबसे बड़ा समुदाय, मैतेई, मुख्य रूप से राज्य की केंद्रीय घाटी (इम्फाल घाटी) में रहता है. यह घाटी चारों ओर से पहाड़ियों से घिरी हुई है, जो मणिपुर के आदिवासी समुदायों का घर हैं. इन आदिवासियों को व्यापक रूप से नागा और कुकी-ज़ो समूहों के अंतर्गत वर्गीकृत किया गया है.

हालांकि नागा और कुकी समुदायों के बीच तनाव की शुरुआत तंगखुल नागा-बहुमत वाले उखरुल जिले के एक हिस्से से हुई थी, लेकिन वर्तमान में यह तनाव इसके पड़ोसी पहाड़ी जिलों कांगपोकपी (जो कुकी-ज़ो बहुल क्षेत्र है) और सेनापति (जो नागा बहुल क्षेत्र है) में सबसे ज़्यादा है.

एक बंधक संकट के बीच, जिसने इन दोनों जिलों में स्थिति को अस्थिर बना दिया है, कुकी-ज़ो काउंसिल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अपने समुदाय के उन लोगों के लिए मदद मांगी है, जिनकी आवाजाही पर और अधिक पाबंदियां लग गई हैं. कांगपोकपी को चूराचाँदपुर, मोरेह और सिलचर से जोड़ने वाली हेलीकॉप्टर सेवाओं की मांग करते हुए काउंसिल ने लिखा: "मैतेई और नागा दोनों समुदायों के साथ चल रहे तनाव के कारण, कुकी-ज़ो लोग, विशेष रूप से कांगपोकपी जिले में रहने वाले, आवाजाही पर अत्यधिक प्रतिबंधों का सामना कर रहे हैं. कई नागरिक आपातकालीन चिकित्सा और अन्य जरूरी स्थितियों में भी अपने क्षेत्रों से बाहर सुरक्षित यात्रा करने में असमर्थ हैं... इस तरह की कनेक्टिविटी (हेलीकॉप्टर सेवा) से बेहद जरूरी मानवीय राहत मिलेगी और स्वास्थ्य सेवा, आवश्यक यात्रा व आपातकालीन निकासी तक पहुंच सुनिश्चित होगी."

काउंसिल ने नागा और कुकी समुदाय के प्रभुत्व वाले क्षेत्रों के बीच "संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों और बफर ज़ोन" में सुरक्षा बलों की तैनाती की मांग की है, ठीक उसी तरह जैसे पिछले तीन वर्षों से मैतेई और कुकी-ज़ो समुदायों के निवास क्षेत्रों के बीच व्यवस्था लागू है.

इसके साथ ही, काउंसिल ने यह भी मांग की है कि कुकी-ज़ो छात्रों और उम्मीदवारों के परीक्षा केंद्रों को स्थानांतरित करके कुकी-ज़ो बहुल जिलों, चूराचाँदपुर और कांगपोकपी में कर दिया जाए. उन्होंने अपनी "अलग प्रशासन" की लंबे समय से चली आ रही मांग को और आगे बढ़ाया, और यह तर्क दिया कि राज्य में पैदा हुई नई दरारों ने इसे और अधिक जरूरी बना दिया है.

काउंसिल ने अपने ज्ञापन में कहा: "मणिपुर में जारी संघर्ष ने मैतेई, नागा और कुकी-ज़ो समुदायों के बीच के रिश्तों को बुरी तरह तोड़ दिया है. लंबे समय से जारी हिंसा, हत्याओं, विस्थापन और तबाही से मिले जख्मों ने एक ऐसा माहौल बना दिया है, जहाँ मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था के तहत शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व (एक साथ रहना) बेहद मुश्किल हो गया है. कुकी-ज़ो लोगों का दृढ़ विश्वास है कि मणिपुर संकट का एक स्थायी और शांतिपूर्ण समाधान तीनों प्रमुख समुदायों — मैतेई, नागा और कुकी-ज़ो — के लिए अलग-अलग प्रशासनिक व्यवस्था बनाने में ही निहित है."

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