जंतर-मंतर पर ‘आदमी का सिर फोड़ दिया, जेल भी नहीं गया,’ हिंदुत्व कार्यकर्ता ने दिखाया भाजपा के ‘आशीर्वाद’ का रोब

स्वतंत्र भरद्वाज नाम के एक स्वयंभू हिंदुत्व कार्यकर्ता ने यह दावा कर रोब दिखाया है कि उसने दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी के पिता का सिर फोड़ दिया था, लेकिन वह "जेल भी नहीं गया" क्योंकि उस पर भाजपा के कपिल मिश्रा जैसे नेताओं का "आशीर्वाद" है.

‘द टेलीग्राफ वेब डेस्क’ के अनुसार, यूट्यूब पर उपलब्ध एक घंटे के पॉडकास्ट में भरद्वाज ने कहा, “निशु के बाप का हम सिर फाड़े हैं.” “आपको पता है कौन सी धारा लगती है? 307. हाफ-मर्डर (हत्या का प्रयास). उसके सिर में 60 टांके आए थे, ठीक है? एम्बुलेंस में वह बंदा मरने की स्थिति में था. उसकी बेटी थाने के बाहर खड़ी होकर कह रही थी कि अगर मेरे पिता को न्याय नहीं मिला तो मैं जहर खाकर खुदकुशी कर लूंगी. ठीक है? स्वतंत्र अगले ही दिन बाहर था. मैं तो जेल भी नहीं गया.

उसने आगे कहा, “पूरी दुनिया को पता होना चाहिए, मैं तो जेल भी नहीं गया. मैं पूरी रात घूमता रहा.” इसके बाद उसने यह भी बताया कि वह इतना खास क्यों है. “एक तो मुझ पर हनुमान जी की कृपा है. दूसरा, कपिल मिश्रा मेरे बड़े भाई जैसे हैं. लोग कहते हैं कि कपिल मिश्रा का फोन आया और मुझे छोड़ दिया गया. कपिल मिश्रा मेरे बड़े भाई हैं, चिराग पासवान मेरे बड़े भाई हैं, ये सभी. आप बताइए आप किस नेता को जानते हैं? आप मोदी जी को जानते हैं? मोदी जी भी मेरे बड़े भाई हैं.  मुझे सबका समर्थन हासिल है,” भरद्वाज ने कहा.

होस्ट ने उससे पूछा कि प्रदर्शन में उसके हाथ में जो लाठी देखी गई थी, वह उसे कहाँ से मिली.

भरद्वाज मुस्कुराया: “क्या आप मेरा जूता देख सकते हैं? यह जूता दिल्ली पुलिस का है. मैं कोई फॉर्म नहीं भरता लेकिन अपने आप दिल्ली पुलिस की तरह घूमता हूँ. मेरा जूता दिल्ली पुलिस का है, लाठी आदि सब कुछ दिल्ली पुलिस का है.”

कॉकरोच जनता पार्टी के नेता सौरव दास ने आरोप लगाया कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने भरद्वाज के खिलाफ सख्त धाराएं जोड़ने से इनकार कर दिया था.

दास ने ‘एक्स’ पर लिखा, “हमारे जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन में भाजपा-संरक्षित गुंडे स्वतंत्र भरद्वाज द्वारा दलित व्यक्ति संजय पर किए गए हमले के बाद वास्तव में क्या हुआ, मुझे यह बताने दें.”

“संजय जी का सिर फट गया था. घाव इतना बड़ा था कि एफआईआर (आईपीसी की धारा 307) में स्पष्ट रूप से हत्या के प्रयास का आरोप लगाया जाना चाहिए था.

पुलिस ने यह धारा जोड़ने से इनकार कर दिया. यह धारा संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध होने के कारण उसकी तत्काल गिरफ्तारी का कारण बनती. इस गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस ने साफ मना कर दिया,” दास ने लिखा.

“हमने मांग की कि उस समय 'गंभीर चोट' की धारा (धारा 326) जोड़ी जाए जिससे उसकी तुरंत गिरफ्तारी हो सकती थी. डीसीपी सचिन शर्मा, एसीपी अजय शर्मा ने साफ इनकार कर दिया. इतना ही नहीं, उन्होंने हमारे मुंह पर कहा 'जाओ कोर्ट से ऑर्डर लेकर आओ'!”

दास ने कहा, “विशेषज्ञों की मेडिकल रिपोर्ट अभी तक हमें नहीं मिली है.”

“भरद्वाज के सहयोगी रहे गिरोह के अन्य सदस्यों की भी अब तक पहचान नहीं हो पाई है, जबकि उनमें से कई ने हमले के तुरंत बाद रील बनाई और संजय की नाबालिग बेटी निशु को खुलेआम धमकी दी.

अब भरद्वाज खुलेआम इस बात का ढिंढोरा पीट रहा है कि दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा ने पुलिस पर दबाव बनाकर उसे थाने से छुड़वाया और कोई भी ऐसी सख्त धारा नहीं लगने दी जिससे उसकी गिरफ्तारी हो सकती थी!

तो बताइए कि न्याय की प्रक्रिया में अवैध रूप से हस्तक्षेप करने के लिए मिश्रा को एफआईआर में सह-आरोपी क्यों न बनाया जाए? गिरोह के सदस्यों को संरक्षण देने और अपने पद का दुरुपयोग करने के लिए वे इस्तीफा क्यों न दें? क्या भाजपा का नेतृत्व इसका समर्थन करता है?” दास ने सवाल किया.

सीजेपी के आशुतोष रांका ने अपने सहयोगी का समर्थन किया. रांका ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “इन चर्चाओं के दौरान @SauravDassss के साथ मौजूद व्यक्ति के रूप में, मैं इसकी पुष्टि कर सकता हूँ. इसके अलावा, हमें बताया गया था कि इस गुंडे को हिरासत में रखा गया था, लेकिन जो दावे किए जा रहे हैं, उससे वह भी एक सफेद झूठ साबित हो रहा है.  @DCPNewDelhi उस समय किए गए सभी दावों के सबूत दें, या कृपया आधिकारिक तौर पर भाजपा में शामिल हो जाएं.”

कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने भी इस पॉडकास्ट को रेखांकित किया. श्रीनेत ने लिखा, “यह स्वतंत्र भरद्वाज है. गर्व से कह रहा है कि छात्र प्रदर्शन में शामिल एक प्रदर्शनकारी के पिता पर हमला किया गया – उसे 60 टांके आए और वह मौत के कगार पर था. लेकिन वह जेल नहीं गया – पूरी रात बेखौफ घूमता रहा.”

दास ने कहा कि पुलिस ने जानबूझकर "सादे कपड़ों" वाले आख्यान को एक ढाल के रूप में इस्तेमाल किया ताकि भरद्वाज जैसे राजनीतिक गुंडों और दक्षिणपंथी चरमपंथियों को सीधे पुलिस रैंक में शामिल करके शांतिपूर्ण छात्रों पर हमला कराया जा सके.

सीजेपी और कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आह्वान पर 20 जुलाई को हजारों प्रदर्शनकारियों ने संसद तक मार्च करने का प्रयास किया था. प्रदर्शनकारियों के साथ झड़प के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया, आंसू गैस के गोले दागे और कथित तौर पर पेलेट गन जैसे हथियारों का इस्तेमाल किया.

सादे कपड़ों में मौजूद कुछ लोग, जिनके पास पुलिस द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली पॉलीकार्बोनेट लाठियां थीं, प्रदर्शनकारियों पर हमला करते देखे गए थे.

दिल्ली पुलिस ने सर्वोच्च न्यायालय को सूचित करते हुए “संसद चलो” मार्च के दौरान सादे कपड़ों में अपने कर्मियों की तैनाती का बचाव किया था और कहा था कि स्थिति की तात्कालिकता के कारण उन्हें रणनीतिक रूप से भीड़ में मिलाया गया था.

सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष दायर एक जवाबी हलफनामे में डीसीपी शर्मा ने कहा कि लाठियों के साथ सादे कपड़ों में तैनात पुलिस कर्मी स्पेशल ब्रांच, स्पेशल सेल, क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस से लिए गए "स्पॉटर" थे.

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