‘हमें भ्रमित किया गया, मोहन भागवत के आगमन की सूचना नहीं दी गई’: न्यूयॉर्क के धर्मगुरुओं ने आरएसएस के कार्यक्रम में भाग लेने पर ‘खेद’ जताया

न्यूयॉर्क के तीन धर्मगुरुओं ने आरोप लगाया है कि उन्हें शनिवार को मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित 'यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन' कार्यक्रम में भाग लेने के लिए "भ्रमित" किया गया था, जिसमें आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे.

‘द टेलीग्राफ वेब डेस्क’ के अनुसार, रिवरसाइड चर्च की वरिष्ठ पादरी रेवरेंड एड्रिएन थॉर्न ने इंस्टाग्राम पर साझा किए गए एक वीडियो में कहा कि भागवत के बगल में कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति एक "गलती" थी. थॉर्न ने कहा, "मेरी उपस्थिति से यह गलत धारणा बनी कि रिवरसाइड चर्च या मैं भागवत, आरएसएस या इस संगठन से जुड़ी विचारधारा का समर्थन करते हैं. जबकि हम ऐसा नहीं करते हैं."

धर्मगुरु ने यह भी दावा किया कि गर्मियों के दौरान छह सप्ताह तक, जब वह छुट्टियों पर थीं, उन्हें 'वर्ल्ड काउंसिल ऑफ रिलिजियस लीडर्स' नामक एक समूह से बार-बार निमंत्रण मिले.

थॉर्न ने कहा, "उन्होंने इस कार्यक्रम को शांति, मानवीय गरिमा और धर्मों के बीच सहयोग पर केंद्रित एक अंतर-धार्मिक सभा के रूप में वर्णित किया था. उन्होंने कई परंपराओं के नेताओं के नाम लिए और लगभग 200 धर्मगुरुओं के एक साथ आने की बात कही." "यह सुनने में अच्छा लगता है, है न?"

हालाँकि, थॉर्न के अनुसार, आयोजकों — 'अमेरिकन हिंदूस फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग' (अहेड) फोरम — ने "महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई".

उन्होंने कहा, "मुझे कभी नहीं बताया गया कि मैडिसन स्क्वायर गार्डन के कार्यक्रम में मोहन भागवत मुख्य आकर्षण होंगे. मुझे कभी नहीं बताया गया कि इसमें आरएसएस शामिल होगा. मुझे अहेड या हिंदू राष्ट्रवाद से जुड़े किसी भी संगठन के बारे में कभी नहीं बताया गया."

थॉर्न ने दावा किया, "यहाँ तक कि उन्होंने जो कार्यक्रम भेजा था, उसमें मुख्य अतिथि का स्थान खाली छोड़ दिया गया था — एक ऐसी जगह जिसके बारे में मुझे बाद में पता चला कि वह मोहन भागवत के लिए आरक्षित थी." उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि उन्हें भागवत-आरएसएस के संबंध के बारे में पता होता तो वह इस कार्यक्रम में "कभी भाग नहीं लेतीं".

थॉर्न ने आरोप लगाया, "भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों — मुसलमानों, ईसाइयों, सिखों, दलितों और अन्य लोगों के खिलाफ हिंसा और भेदभाव में अपनी भूमिका के लिए आरएसएस को व्यापक रूप से जाना जाता है.  ये नुकसान वास्तविक हैं और वे बहुत मायने रखते हैं." इसके साथ ही उन्होंने "प्रामाणिक" बहुलवाद, नस्लीय न्याय, शांति और हाशिए पर धकेले गए लोगों के साथ एकजुटता के रिवरसाइड चर्च के आदर्शों को दोहराया.

थॉर्न ने कहा, "मुझे गुस्सा है कि मुझे सही निर्णय लेने के लिए आवश्यक जानकारी नहीं दी गई और मैं यह सुनिश्चित करना चाहती हूँ कि ऐसा अन्य धर्मगुरुओं के साथ न हो."

न्यूयॉर्क शहर में सेंट जॉन द डिवाइन कैथेड्रल की डीन विनी वर्गीज ने भी कहा कि उनके कई सहयोगियों को भागवत की उपस्थिति के बारे में बताए बिना कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था.

वर्गीज ने कहा, "आरएसएस का एक सुंदर नाम है जिसका अर्थ राष्ट्र की सेवा है, लेकिन इसके पीछे भारत में दलितों, मुसलमानों और ईसाइयों के प्रति कट्टरपंथी हिंसा का इतिहास रहा है. यह एक बहुत ही विशिष्ट कार्यप्रणाली है जहाँ हिंदू पहचान को सशक्त बनाया जाता है और स्वयंसेवा का उत्सव मनाया जाता है, जो बहुत सकारात्मक है, लेकिन इसके पीछे यह विचार है कि भारत एक हिंदू राष्ट्र है और केवल हिंदुओं के लिए है."

न्यूयॉर्क स्थित मुस्लिम और अंतर-धार्मिक नेता इमाम शमसी अली ने उस कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति को "निर्णय लेने में एक गंभीर भूल" बताया और गहरा खेद व्यक्त किया.

अली ने कहा, "मैं इस कार्यक्रम या उससे होने वाले किसी भी समझौते के साथ अपने नाम के किसी भी जुड़ाव को स्पष्ट रूप से खारिज करता हूँ."

आरएसएस प्रमुख का जिक्र करते हुए अली ने कहा, "कार्यक्रम में शांति का उनका भाषण केवल दिखावा (जुबानी जमाखर्च) है, जो ज़मीनी हकीकत के विपरीत है, जहाँ भारत में मुसलमान और अन्य अल्पसंख्यक उनके द्वारा बढ़ाई जा रही विचारधारा के परिणामस्वरूप भेदभाव और हिंसा का सामना करते हैं. 

Previous
Previous

मनुस्मृति की छवि में भारत का संविधान बदलने की आरएसएस-भाजपा परियोजना

Next
Next

जंतर-मंतर पर ‘आदमी का सिर फोड़ दिया, जेल भी नहीं गया,’ हिंदुत्व कार्यकर्ता ने दिखाया भाजपा के ‘आशीर्वाद’ का रोब