यूजीसी-नेट के तीन विषयों की दोबारा परीक्षा, सवालों में तथ्यात्मक और भाषा संबंधी गंभीर गलतियां
‘स्क्रोल’ के मुताबिक, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी एनटीए ने यूजीसी-नेट के अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र विषयों की परीक्षा दोबारा कराने का फैसला किया है. इन तीनों विषयों के प्रश्नपत्रों में तथ्यात्मक, टाइपिंग, अनुवाद और प्रश्नों की भाषा से जुड़ी कई गलतियां पाई गई थीं. एनटीए ने रविवार को बताया कि जांच के लिए बनाई गई समिति ने प्रश्नपत्रों में ऐसी खामियां पाईं, जो परीक्षा की निष्पक्षता और गुणवत्ता के तय मानकों पर खरी नहीं उतरती थीं.
एनटीए के मुताबिक, जून में हुई परीक्षा के दौरान इन तीन विषयों के प्रश्नपत्रों को लेकर कई शिकायतें मिली थीं. इसके बाद एनटीए ने इन शिकायतों की जांच के लिए एक समिति गठित की. समिति की जांच में विद्वानों के नाम गलत लिखे जाने, किताबों के शीर्षक स्पष्ट नहीं होने, प्रश्नों की भाषा में त्रुटियां और स्थापित अवधारणाओं के लिए गैर-मानक शब्दों के इस्तेमाल जैसी समस्याएं सामने आईं. इसके अलावा जून में हुई परीक्षा में पिछले वर्षों के कुछ सवालों के दोहराए जाने की बात भी सामने आई.
एनटीए ने कहा कि इस स्तर की खामियों वाले प्रश्नपत्र निष्पक्ष और त्रुटिरहित परीक्षा के मानकों को पूरा नहीं करते. एजेंसी के अनुसार, ऐसी गलतियों को केवल आपत्ति प्रक्रिया के बाद कुछ सवाल हटाकर ठीक नहीं किया जा सकता था. इसलिए अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र के उम्मीदवारों के लिए दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया.
9 और 10 सितंबर को होगी दोबारा परीक्षा
एनटीए के अनुसार, अंग्रेजी की दोबारा परीक्षा 9 सितंबर को सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक होगी. इसी दिन कॉमर्स की परीक्षा दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक आयोजित की जाएगी. समाजशास्त्र की परीक्षा 10 सितंबर को सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक होगी.
बाकी 84 विषयों की परीक्षा प्रक्रिया निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ेगी. एनटीए ने कहा है कि इन विषयों के नतीजे भी तय समय पर घोषित किए जाएंगे.
यूजीसी-नेट विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की पात्रता तय करने वाली प्रमुख राष्ट्रीय परीक्षा है. इसके जरिए जूनियर रिसर्च फेलोशिप यानी जेआरएफ के लिए पात्रता भी तय होती है और पीएचडी में प्रवेश के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाता है. इसलिए प्रश्नपत्र में गलती और परीक्षा दोबारा कराने के फैसले का सीधा असर उन छात्रों पर पड़ता है जो लंबे समय से इस परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं.
जून में 87 विषयों की परीक्षा हुई थी
इस साल एनटीए ने 22 जून से 30 जून के बीच 87 विषयों में यूजीसी-नेट परीक्षा आयोजित की थी. परीक्षा कंप्यूटर आधारित तरीके से प्रतिदिन दो पालियों में हुई थी. अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र के प्रश्नपत्रों में गड़बड़ियों की शिकायतें मिलने के बाद दोबारा परीक्षा का फैसला लिया गया.
इस फैसले ने परीक्षा संचालन को लेकर एनटीए की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं. खास तौर पर इसलिए क्योंकि यूजीसी-नेट जैसी परीक्षा में प्रश्नपत्र की भाषा, तथ्य और विषय से जुड़ी सटीकता बेहद महत्वपूर्ण होती है. उम्मीदवारों का प्रदर्शन सीधे उनके करियर और उच्च शिक्षा के अवसरों से जुड़ा होता है.
राहुल गांधी ने एनटीए पर उठाए सवाल
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एनटीए के फैसले को लेकर एजेंसी की आलोचना की है. उन्होंने कहा कि वर्षों तक तैयारी करने वाले छात्रों को एनटीए की गलती की कीमत चुकानी पड़ रही है. उनके मुताबिक, उम्मीदवारों ने परीक्षा के लिए तैयारी की, आवेदन शुल्क भरा और दूर-दराज के परीक्षा केंद्रों तक यात्रा की, लेकिन अब उन्हें सितंबर में दोबारा यही प्रक्रिया करनी होगी.
राहुल गांधी ने यह सवाल भी उठाया कि क्या परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक हुआ था. उन्होंने एनटीए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि छात्रों से उनकी मेहनत, पैसा और समय लिया जा रहा है, लेकिन उन्हें बदले में नौकरी या भरोसा तक नहीं मिल रहा.
प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर पहले भी विवाद
एनटीए का यह फैसला ऐसे समय आया है जब देश में प्रतियोगी परीक्षाओं के संचालन को लेकर पहले से असंतोष और राजनीतिक विवाद बना हुआ है. जुलाई में देश के कई हिस्सों में युवाओं ने प्रतियोगी परीक्षाओं के कथित कुप्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन किए थे. इन प्रदर्शनों के बीच तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया था.
यूजीसी-नेट को लेकर भी पहले गंभीर विवाद सामने आ चुका है. जून 2024 में आयोजित यूजीसी-नेट परीक्षा को केंद्र सरकार ने रद्द कर दिया था. उस समय सरकार ने कहा था कि परीक्षा की शुचिता से समझौता होने की आशंका है. इसके बाद परीक्षा दोबारा आयोजित की गई थी.
ऐसे में 2026 में तीन विषयों के प्रश्नपत्रों में सामने आई गलतियां परीक्षा व्यवस्था को लेकर जारी बहस को फिर सामने ले आई हैं. इस बार मामला प्रश्नपत्र के लीक होने के बजाय प्रश्नों की गुणवत्ता, तथ्यात्मक शुद्धता, भाषा और अनुवाद से जुड़ी त्रुटियों का है. फिर भी उम्मीदवारों को दोबारा परीक्षा देने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है.
यूजीसी-नेट जैसी राष्ट्रीय परीक्षा में लाखों उम्मीदवारों के करियर और उच्च शिक्षा के अवसर जुड़े होते हैं. इसलिए एनटीए का यह फैसला केवल तीन विषयों की परीक्षा दोबारा कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल भी उठाता है कि परीक्षा आयोजित करने से पहले प्रश्नपत्रों की गुणवत्ता और तथ्यात्मक शुद्धता सुनिश्चित करने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है.

