‘मेरा कसूर सिर्फ दाढ़ी और टोपी है’: मुंबई के मुस्लिम कारोबारी ने लगाया सांप्रदायिक उत्पीड़न का आरोप

‘गीता सुनील पिल्लई’ की रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई के जुहू इलाके से सामने आई एक घटना ने सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक भेदभाव, भीड़ की राजनीति और पुलिस की भूमिका को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं. मन्नत एथनिक डिज़ाइनर शोरूम के मालिक रफ़त हुसैन ने आरोप लगाया है कि उन्हें उनकी धार्मिक पहचान की वजह से निशाना बनाया गया. उनका कहना है कि चार महिलाओं के साथ शुरू हुई एक सामान्य ग्राहक बातचीत देखते ही देखते धार्मिक टिप्पणियों, कथित गाली-गलौज और हिंसक व्यवहार में बदल गई.

रफ़त हुसैन के मुताबिक घटना शनिवार शाम करीब साढ़े तीन बजे की है. चार महिलाएं उनके शोरूम में शादी के लिए शेरवानी और अन्य कपड़े देखने पहुंचीं. शुरुआत में बातचीत सामान्य थी, लेकिन कुछ ही देर बाद माहौल बदल गया. हुसैन का आरोप है कि महिलाओं ने उनकी धार्मिक पहचान को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां करनी शुरू कर दीं और कहा, "तुम मुसलमान हो, तुम लोग ऐसे ही होते हो."

हुसैन का दावा है कि इसके बाद महिलाओं ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया और स्थिति इतनी बिगड़ गई कि उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए शोरूम छोड़कर सांताक्रूज़ पुलिस स्टेशन भागना पड़ा. लेकिन उनके अनुसार मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं. उनका कहना है कि जब वह शिकायत दर्ज कराने पुलिस स्टेशन पहुंचे, तब तक वहां बड़ी संख्या में लोग जमा हो चुके थे. हुसैन का आरोप है कि करीब 150 लोगों की भीड़ थाने के बाहर मौजूद थी और 20 से 30 युवक पुलिस स्टेशन के अंदर तक पहुंच गए थे.

सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में रफ़त हुसैन भावुक होते हुए कहते हैं, "मेरा एकमात्र अपराध यह है कि मैं जुहू में अपने शोरूम में दाढ़ी और टोपी पहनकर बैठा हूं." उनका आरोप है कि पूरी घटना सुनियोजित थी और इसके पीछे धार्मिक नफरत की भावना काम कर रही थी.

हुसैन ने पुलिस के रवैये पर भी सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि उन्होंने पूर्व विधायक वारिस पठान से संपर्क किया, जिन्होंने थाने के ड्यूटी अधिकारी से बात की. लेकिन हुसैन के अनुसार पुलिस अधिकारी ने थाने के बाहर किसी भीड़ के मौजूद होने से ही इनकार कर दिया. यह दावा हुसैन को और अधिक परेशान करने वाला लगा, क्योंकि उनके मुताबिक बड़ी संख्या में लोग उन्हें घेरने के इरादे से वहां पहुंचे थे.

घटना के बाद हुसैन खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. उनका कहना है कि उन्हें डर है कि भविष्य में कोई भी भीड़ उनके शोरूम में घुस सकती है. उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस स्टेशन में उन्हें करीब पांच घंटे तक रुकना पड़ा, जिसके कारण उनका कारोबार भी प्रभावित हुआ.

रफ़त हुसैन का मानना है कि यह घटना किसी अचानक हुए विवाद का परिणाम नहीं थी. उनका दावा है कि जिस तरह चार महिलाएं कपड़े खरीदने के बहाने शोरूम पहुंचीं और बाद में बड़ी संख्या में लोग पुलिस स्टेशन तक पहुंच गए, उससे उन्हें पूरी घटना पूर्व नियोजित लगती है. हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है.

सीसीटीवी फुटेज को लेकर भी सवाल उठे हैं. हुसैन ने बताया कि कुछ समय पहले शोरूम में आग लगने की घटना के बाद कैमरे काम नहीं कर रहे थे. उनका कहना है कि अब उन्हें दोबारा चालू कर दिया गया है. पिछले 12 से 15 वर्षों से कारोबार कर रहे हुसैन का कहना है कि उन्होंने इससे पहले कभी इस तरह की स्थिति का सामना नहीं किया.

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है. यह मामला केवल एक कारोबारी के आरोपों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सवाल भी उठा रहा है कि क्या धार्मिक पहचान के आधार पर निशाना बनाए जाने की आशंकाएं बढ़ रही हैं और ऐसे मामलों में पुलिस की भूमिका कितनी पारदर्शी और निष्पक्ष है. फिलहाल घटना के सभी पक्षों की जांच और आधिकारिक तथ्यों का सामने आना बाकी है.

Previous
Previous

तीन भारतीयों की मौत पर क्या अमेरिका से जवाब मांग पाए मोदी?

Next
Next

गुटों को एक इकाई में एकजुट करना ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है