“वे अपने बच्चों को पढ़ने के लिए विदेश भेज रहे हैं, लेकिन हमारा क्या?”; सुबह होते ही लोगों के समुद्र में तब्दील हो गई मध्य दिल्ली
कुछ ही दूरी पर दिल्ली के एक छात्र संदीप के सिर से खून बह रहा था, लेकिन वह इसी हालत में फुटपाथ पर बैठे थे. उन्होंने आरोप लगाया कि संसद मार्ग के पास लाठीचार्ज के दौरान उन पर वार किया गया था. उन्होंने दावा किया, "उन्होंने मेरे सिर पर मारा और उसके बाद मुझे घसीटकर यहाँ ले आए. अगर हम डर गए तो हमें कायर कहा जाएगा. वे अपने बच्चों को पढ़ने के लिए विदेश भेज रहे हैं, लेकिन हमारा क्या?”
‘पीटीआई’ के अनुसार, घरों से छुपकर निकले बच्चों, विभिन्न राज्यों से यात्रा कर पहुंचे बुजुर्गों और हाथों में तख्तियां (प्लैकार्ड) थामे छात्रों समेत हजारों लोग सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी के 'चलो संसद' विरोध-प्रदर्शन के लिए दिल्ली में एकत्र हुए.
सुबह होते ही मध्य दिल्ली लोगों के समुद्र में तब्दील हो गई. भारी भीड़ का एक ड्रोन वीडियो वायरल हो गया, जिसे ‘द हिंदू’ ने भी अपने ‘एक्स’ अकाउंट पर पोस्ट किया था, लेकिन बाद में इसे हटा दिया गया. दिल्ली पुलिस ने कहा कि उसने वायरल ड्रोन वीडियो का संज्ञान लिया है और इस अनधिकृत ड्रोन संचालन की जांच शुरू कर दी है. पुलिस सूत्र ने आगे बताया कि नई दिल्ली जिला एक अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्र है, जहाँ ड्रोन उड़ाने के लिए पूर्व अनुमति अनिवार्य है, और निर्धारित नियमों के किसी भी उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई की जाती है.
हाथों में झंडे और तख्तियां लिए प्रदर्शनकारियों के समूह संसद की ओर जाने वाली सड़कों पर नारेबाजी करते हुए आगे बढ़ रहे थे. रात भर ट्रेन और बस से यात्रा करने के बाद कई लोग अपने कंधों पर बैग टांगे हुए थे, तो वहीं कई अन्य शहर में हो रही मूसलाधार बारिश के बीच छाते लेकर चल रहे थे. उनके चारों ओर दंगा-रोधी गियर में लैस पुलिसबल सड़कों पर तैनात थे, प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के लिए बसें तैयार खड़ी थीं और संसद की ओर जाने वाले हर रास्ते पर बैरिकेड्स की लंबी कतारें लगी हुई थीं.
जैसे ही प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़े, दिल्ली पुलिस ने बहुस्तरीय बैरिकेड्स लगाकर उन्हें कई स्थानों पर रोक दिया. जब प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की, तो संसद मार्ग, पटेल चौक, रेल भवन और अन्य इलाकों के पास पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया. इन झड़पों के दौरान पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों दोनों को चोटें आईं, जबकि मध्य दिल्ली के कुछ हिस्सों में इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गईं.
भीड़ में स्कूली बच्चे, कॉलेज के छात्र, अभिभावक और वरिष्ठ नागरिक शामिल थे। कुछ बच्चे स्कूल यूनिफॉर्म में आए थे, तो कुछ कॉकरोच की वेशभूषा पहने हुए थे.
मुख्य सड़कें सील होने के बाद, कई प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड्स से बचने और संसद के करीब पहुंचने की उम्मीद में संकरी गलियों और छोटे रास्तों का सहारा लिया. कुछ ने बैरिकेटिंग में बिजली करंट प्रवाहित होने की शिकायत की और पुलिस पर आरोप लगाया. एक पत्रकार ने पुलिस से इस बारे में सवाल किया, पर उसे कोई जवाब नहीं मिला. पीछे धकेले जाने के बावजूद प्रदर्शनकारी फिर से एकत्र हुए, बैरिकेड्स के पास इंतजार किया और दोबारा आगे बढ़ने का प्रयास किया। बारिश और पुलिस की बार-बार की कार्रवाई के बावजूद कुछ लोग बैरिकेड्स के ऊपर चढ़ गए, तो कुछ सड़कों पर बैठकर नारेबाजी करने लगे।
प्रदर्शनकारियों में से एक, प्रकाश ने आरोप लगाया कि मार्च शांतिपूर्ण था लेकिन पुलिस ने उन पर बल प्रयोग किया. उन्होंने कहा, "वहाँ बुजुर्ग लोग थे, वे बेहोश होकर गिर रहे थे... लेकिन पुलिस नहीं रुकी."
संसद के भीतर, सीजेपी के नेतृत्व वाले इस प्रदर्शन को लेकर विपक्ष के सदस्यों के हंगामे के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही बार-बार स्थगित होती रही. बाहर, देश की राजधानी के दिल में बारिश, नारों, सायरन और बैरिकेड्स तोड़ने के बार-बार के प्रयासों के बीच दिनभर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच गतिरोध बना रहा.

