बंगाल उपचुनाव: मुस्लिम मतदाताओं को रोका गया, विपक्षी कार्यकर्ता गिरफ्तार, पत्रकारों पर भी शिकंजा

‘स्क्रोल’ में अनंत गुप्ता और रोकिबुज जमान की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव में मुस्लिम मतदाताओं को मतदान से रोकने, विपक्षी कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने और स्थानीय पत्रकारों के सोशल मीडिया खातों को प्रतिबंधित करने के आरोप सामने आए हैं. विपक्षी दलों ने प्रशासन पर सत्तारूढ़ भाजपा के पक्ष में चुनाव प्रभावित करने का आरोप लगाया है.

रेजीनगर के नजीरपुर गांव स्थित तेघारी प्राथमिक विद्यालय के मतदान केंद्र पर रिपोर्टर ने देखा कि कई मुस्लिम महिलाएं मतदान के लिए कतार में थीं, लेकिन नए मतदाता कतार में शामिल नहीं हो रहे थे. मतदान केंद्र से कुछ दूरी पर मुस्लिम पुरुषों को कथित तौर पर वापस भेजा जा रहा था. वहां मौजूद पुलिस और अर्धसैनिक बल के जवानों ने हस्तक्षेप नहीं किया. एक ग्रामीण ने बताया कि कैमरे पर बात करने पर पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने का डर था.

मराडीघी गांव में भी कई लोगों ने मतदान से रोके जाने की शिकायत की. एक बुजुर्ग मुस्लिम महिला ने आरोप लगाया कि मतदान करने पहुंचे लोगों को पुलिस ने गालियां देकर वापस भेज दिया. एक अन्य युवक ने दावा किया कि जब वह मतदान केंद्र पहुंचा तो पुलिस ने कहा कि उसका वोट पहले ही डाला जा चुका है. हालांकि, चुनाव आयोग के सामान्य पर्यवेक्षक हर्षल पंचोली ने उपचुनाव को “स्वतंत्र और निष्पक्ष” बताया और कहा कि बूथ कब्जे के आरोपों की वीडियो सामग्री की जांच की गई है.

विपक्षी कार्यकर्ताओं की हिरासत को लेकर भी आरोप लगाए गए. आम जनता उन्नयन पार्टी के नेता हुमायूं कबीर ने मतदान से पहले दावा किया कि उनके 64 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है. अगले दिन पुलिस ने उन्हें भी हिरासत में लिया. उनके बेटे और प्रत्याशी गोलाम नबी आजाद ने आरोप लगाया कि पुलिस पिछले दो सप्ताह से कार्यकर्ताओं के घरों में रात के समय पहुंचकर उन्हें पुराने मामलों में गिरफ्तार कर रही थी.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार मोहम्मद सईद ने भी अपने मतदान एजेंट तफजुल शेख को हिरासत में लिए जाने का आरोप लगाया. तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय नेता बादल मोल्ला ने कहा कि उनके क्षेत्र के 13 मतदान केंद्रों के एजेंटों के पहचान पत्र कथित तौर पर छीन लिए गए और उन्हें घर जाने को कहा गया.

इस बीच, कई स्थानीय पत्रकारों के सोशल मीडिया पेज मतदान से पहले प्रतिबंधित कर दिए गए. ‘ऑल्ट न्यूज़’ के अनुसार, कम से कम 12 खातों पर कार्रवाई हुई. पत्रकार स्वपन करिकर और बकतर शेख ने दावा किया कि उनके पेजों पर प्रतिबंध से स्थानीय घटनाओं की रिपोर्टिंग प्रभावित हुई. शेख ने कहा कि इससे उन्हें करीब 80 हजार रुपये के विज्ञापन राजस्व का नुकसान भी हुआ.

रिपोर्ट के अनुसार, पत्रकारों और विपक्षी दलों ने इन घटनाओं को चुनावी प्रक्रिया में समान अवसर और स्वतंत्र पत्रकारिता पर गंभीर सवाल बताया है. हालांकि, प्रशासन और चुनाव पर्यवेक्षकों ने चुनाव को निष्पक्ष कराने की जिम्मेदारी निभाने का दावा किया है.

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