कॉकरोच जनता पार्टी पर सवाल: आंदोलन से चुनाव तक पहुंची राजनीति की जवाबदेही क्या है?

'हरकारा रोज़ाना' के इस एपिसोड में निधीश त्यागी चर्चा कर रहे हैं कॉकरोच जनता पार्टी के उभार, उसकी राजनीति, उसके संगठनात्मक ढांचे और उससे जुड़े कई गंभीर सवालों पर. परीक्षा और छात्रों के भविष्य से शुरू हुआ यह आंदोलन अब चुनाव, मताधिकार और चुनाव आयोग की भूमिका जैसे बड़े राजनीतिक मुद्दों तक पहुंच चुका है. ऐसे में सवाल यह है कि कॉकरोच जनता पार्टी आखिर किसकी नुमाइंदगी कर रही है और उसकी राजनीतिक जवाबदेही किसके प्रति है.

कॉकरोच जनता पार्टी का उभार ऑनलाइन माध्यम से हुआ और कुछ ही समय में उसके सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर समर्थक जुड़ गए. इसके बाद आंदोलन जंतर-मंतर तक पहुंचा और संसद की ओर मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई, लाठीचार्ज, आंसू गैस और एफआईआर जैसे मामले सामने आए. 25 जुलाई के समझौते और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को आंदोलन की बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश किया गया. लेकिन इसके बाद सवाल उठता है कि समझौते में शामिल बाकी मांगों का क्या हुआ. क्या छात्रों को मुआवजा मिला, क्या एफआईआर वापस हुई और क्या परीक्षा सुधार से जुड़े वादों पर आगे कोई ठोस कार्रवाई हुई?

2 अक्टूबर को मुंबई और दिल्ली में हुए प्रदर्शनों ने आंदोलन को लेकर एक और बहस खड़ी कर दी. मुंबई में फिल्मी और सार्वजनिक जीवन से जुड़े कई चेहरे दिखाई दिए, जबकि दिल्ली में छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता और विपक्षी नेताओं की हिरासत ने सरकार के विरोध-प्रदर्शनों के प्रति रवैये पर सवाल खड़े किए. इसी संदर्भ में कॉकरोच जनता पार्टी की पारदर्शिता और एकजुटता पर भी सवाल उठते हैं.

एक अहम सवाल यह भी है कि सरकार ने आंदोलन के साथ बातचीत के लिए किन लोगों को प्रतिनिधि माना. जिन लोगों ने समझौते में हिस्सा लिया, वे किस संगठनात्मक या जनाधार की ओर से बातचीत कर रहे थे? आंदोलन के जमीनी हिस्से में शामिल छात्र संगठनों और अन्य समूहों की भूमिका इस प्रक्रिया में कितनी रही? यही सवाल आंदोलन की प्रतिनिधिकता और उसकी आंतरिक जवाबदेही को लेकर महत्वपूर्ण हो जाता है.

अब जब आंदोलन का फोकस चुनाव आयोग और मताधिकार तक पहुंच गया है, चुनाव बहिष्कार की अपील भी बहस का विषय है. अगर चुनाव व्यवस्था में गड़बड़ी का आरोप है, तो चुनाव से बाहर रहना समाधान है या लोकतांत्रिक प्रक्रिया के भीतर रहकर उसे चुनौती देना अधिक प्रभावी रास्ता है? 10 अक्टूबर के प्रस्तावित आंदोलन से पहले यह स्पष्ट होना जरूरी है कि उसकी रणनीति क्या है और आगे की दिशा कैसे तय होगी.

निधीश त्यागी के विश्लेषण का केंद्रीय सवाल यही है कि कॉकरोच जनता पार्टी अपनी राजनीति, वित्तीय स्रोत, प्रतिनिधित्व और आंदोलन समाप्त करने की प्रक्रिया को कितनी पारदर्शिता से सामने रखती है. यदि यह युवाओं और नागरिकों की आवाज बनने का दावा करती है, तो उसे अपनी जवाबदेही भी स्पष्ट करनी होगी. आंदोलन की विश्वसनीयता केवल भीड़ या सोशल मीडिया समर्थन से नहीं, बल्कि पारदर्शिता, निरंतरता और स्पष्ट राजनीतिक जवाबदेही से तय होगी.

पूरी बातचीत हरकारा रोज़ाना के यूट्यूब चैनल पर सुन/ देख सकते हैं.

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