पाकिस्तान का दावा, भारत चिनाब का पानी बीस की ओर मोड़ रहा, सिंधु जल संधि के उल्लंघन का आरोप

‘द टेलीग्राफ’ के मुताबिक, पाकिस्तान ने भारत पर चिनाब नदी के पानी को बीस नदी की ओर मोड़ने की कथित योजना को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है और इसे सिंधु जल संधि का “गंभीर उल्लंघन” बताया है. यह प्रतिक्रिया उन मीडिया रिपोर्टों के बाद आई है जिनमें दावा किया गया था कि भारत चिनाब–बीस लिंक टनल प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है.

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि भारत की यह कथित योजना 1.9 मिलियन एकड़ फीट पानी को चिनाब से बीस बेसिन में स्थानांतरित करने की कोशिश है, जो अंतरराष्ट्रीय जल कानून और संधि प्रावधानों के खिलाफ है. पाकिस्तान ने इसे न केवल 1960 की ‘सिंधु जल संधि’ का उल्लंघन बताया, बल्कि वियना संधि और संयुक्त राष्ट्र के जलमार्ग नियमों के भी खिलाफ कहा है.

यह विवाद ऐसे समय पर और तेज हुआ है जब भारत ने पिछले वर्ष इस जल संधि को अस्थायी रूप से “स्थगित” करने की बात कही थी. यह कदम पहलगाम आतंकी हमले के बाद उठाए गए कूटनीतिक फैसलों के हिस्से के रूप में देखा गया था, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी.

पाकिस्तान का आरोप है कि भारत ने इस परियोजना को लेकर न तो आधिकारिक सूचना दी है और न ही किसी तरह की सलाह-मशविरा प्रक्रिया अपनाई है. साथ ही पाकिस्तान ने सलाल बांध से गाद निकालने की भारत की योजना को भी संधि के खिलाफ बताया है.

जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में चिनाब नदी पर स्थित 690 मेगावाट का सलाल जलविद्युत संयंत्र लंबे समय से दोनों देशों के बीच तकनीकी और जल प्रबंधन विवादों का हिस्सा रहा है. यह परियोजना रन-ऑफ-द-रिवर श्रेणी की है, जिसमें नदी के प्राकृतिक प्रवाह का उपयोग बिजली उत्पादन के लिए किया जाता है.

इस बीच पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की आपदा प्रबंधन संस्था ने भी कथित रूप से एक पत्र के आधार पर संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं. इसमें दावा किया गया है कि भारतीय पक्ष से बढ़े हुए जल प्रवाह और संभावित बाढ़ की स्थिति को लेकर सूचना मिली है, खासकर मई के अंत में.

भारत की ओर से इस पूरे विवाद पर अब तक कोई औपचारिक सार्वजनिक बयान नहीं आया है. लेकिन जल विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे किसी भी बड़े नदी जोड़ परियोजना को लेकर दक्षिण एशिया में पहले से मौजूद तनाव और बढ़ सकता है.

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