बांग्लादेश का दावा: भारत द्वारा लोगों को जबरन सीमा पार भेजने के कई प्रयासों को किया विफल

भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट पश्चिम बंगाल के पेट्रापोल में स्थित सीमा चौकी (बीओपी) में प्रवेश करता बीएसएफ का एक अधिकारी. रॉयटर्स/साहिबा चौधरी

बांग्लादेश ने गुरुवार (4 जून 2026) को कहा कि उसने पिछले 24 घंटों के दौरान भारत द्वारा लोगों को जबरन अपने देश में धकेलने के कई प्रयासों को विफल कर दिया है. ‘रॉयटर्स’ के अनुसार इस घटना ने कथित अवैध प्रवास को लेकर पुराने विवाद को फिर से हवा दे दी है और दोनों दक्षिण एशियाई पड़ोसियों के बीच संबंधों को सुधारने के प्रयासों पर पानी फेर दिया है.

इन दोनों देशों की सीमा दुनिया की सबसे लंबी थल सीमाओं में से एक है, जो विभिन्न प्रकार के इलाकों से होते हुए 4,000 किलोमीटर (2,500 मील) से अधिक लंबी है, जिससे इसकी निगरानी करना काफी कठिन हो जाता है. 'बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश' (बीजीबी) ने कहा कि उसने सीमा के कई हिस्सों में भारतीय अधिकारियों द्वारा घुसपैठ कराने के 10 प्रयासों का पता लगाया है.

भारत के सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ़) और विदेश मंत्रालय ने इस मामले पर टिप्पणी के अनुरोधों का कोई जवाब नहीं दिया.

भारत की सत्ताधारी भाजपा, जो सीमावर्ती राज्यों त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल और असम में शासन करती है, ने कहा है कि वह अवैध प्रवास से निपटना अपनी प्राथमिकता बनाएगी.पिछले साल से वह बंगाली भाषी मुसलमानों, जिन्हें "अवैध घुसपैठिया" करार दिया गया है, उन्हें बांग्लादेश में धकेलने का प्रयास कर रही है.

इस मुद्दे ने 2024 में बांग्लादेश की लंबे समय तक भारत-गठबंधन वाली नेता रहीं शेख हसीना के तख्तापलट के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों को सुधारने के प्रयासों को और जटिल बना दिया है. बीजीबी ने एक बयान में कहा, "किसी भी व्यक्ति या समूह को सीमा के रास्ते अवैध रूप से बांग्लादेश में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी." बयान में आगे कहा गया कि अंतर्राष्ट्रीय सीमा प्रबंधन मानदंडों और द्विपक्षीय समझौतों का उल्लंघन करने के किसी भी प्रयास का "कड़ाई से विरोध" किया जाएगा.

बांग्लादेश के सीमा रक्षकों ने पिछले महीने सीमा के कुछ हिस्सों में गश्त तेज कर दी थी और जन जागरूकता अभियान शुरू किया था. ऐसा इन चिंताओं के कारण किया गया था कि भारत ने अवैध रूप से लोगों को बांग्लादेश में धकेला है—जिसे अधिकारियों, अधिकार समूहों और विश्लेषकों ने "पुश-इन" कहा है. यह सत्यापन और स्वदेश वापसी की औपचारिक प्रक्रियाओं के बिना लोगों को अनौपचारिक रूप से बांग्लादेश में भेजने की प्रक्रिया है.

भारत के विदेश मंत्रालय ने मई में संवाददाताओं को बताया था कि उसने बांग्लादेश से भारत में अवैध रूप से रह रहे 2,860 से अधिक संदिग्ध बांग्लादेशियों की राष्ट्रीयता का सत्यापन करने के लिए कहा था.

ढाका ने बार-बार कहा है कि बांग्लादेशी नागरिक के रूप में पहचाने गए किसी भी व्यक्ति को सीमा पार खदेड़ने के बजाय औपचारिक कानूनी और राजनयिक चैनलों के माध्यम से वापस भेजा जाना चाहिए.

ढाका के सरकारी अधिकारियों ने कहा कि उम्मीद है कि इस मुद्दे को 8 से 11 जून तक नई दिल्ली में दोनों पक्षों के सीमा बलों के बीच महानिदेशक स्तर की वार्ता में उठाया जाएगा. 

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