‘नशीला पदार्थ रख दूंगा’: मुंबई पुलिसकर्मी ने प्रदर्शनकारी छात्रों को दी धमकी
मुंबई पुलिस ने गुरुवार (23 जुलाई 2026) को एक पुलिसकर्मी के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं और जांच लंबित रहने तक उसे उसकी वर्तमान तैनाती से हटा दिया है. यह कार्रवाई कांग्रेस द्वारा पोस्ट किए गए एक वायरल वीडियो के बाद की गई है, जिसमें मुंबई पुलिस का यह ड्राइवर प्रदर्शनकारी छात्रों को धमकी देता हुआ दिखाई दे रहा है.
राज्य के गृह विभाग ने कहा कि वीडियो में दिख रहा पुलिसकर्मी सायन पुलिस स्टेशन में कार्यरत था, जहां से अब उसे हटा दिया गया है. वीडियो में वर्दी पहने व्यक्ति दो युवाओं से यह कहते हुए दिखाई दे रहा है: "अगर मैंने तुम्हें यहाँ आसपास दोबारा देखा, तो यह तुम्हारे लिए अच्छा नहीं होगा. मैं सीधे 50 ग्राम पाउडर रख (प्लांट कर) दूंगा. फिर तुम्हारी जिंदगी खत्म हो जाएगी. तुम्हें जमानत नहीं मिलेगी. तुम लोगों की वजह से हम मुसीबत में हैं. दोबारा मत आना."
विनाया देशपांडे पंडित की रिपोर्ट के अनुसार, यह बातचीत एक वाहन के भीतर हुई थी, और पुलिसकर्मी चालक की सीट पर बैठा दिखाई दे रहा है. दोनों युवक वीडियो रिकॉर्ड कर रहे हैं और इस पर हंस रहे हैं. गुरुवार सुबह वीडियो वायरल होने के तुरंत बाद पुलिस ने जांच के आदेश दे दिए.
महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक सदानंद दाते और मुंबई पुलिस आयुक्त देवेन भारती से मुलाकात कर उक्त व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. पुलिस को सौंपे गए ज्ञापन में कांग्रेस ने मुंबई में हिरासत में लिए गए छात्रों की तत्काल रिहाई की मांग की. इसमें कहा गया कि छात्रों को पूर्व में ही हिरासत (प्री-एम्प्टिव डिटेंशन) में लेने की पुलिस की यह कार्रवाई गैर-लोकतांत्रिक और अवैध है. साथ ही आरोप लगाया गया कि पुलिस ने झूठी प्राथमिकी दर्ज करने के लिए निरोधात्मक आदेशों का दुरुपयोग किया.
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि पुलिस ने कथित तौर पर 22 जुलाई 2026 को मुंबई के विभिन्न हिस्सों में 500 से 700 छात्रों को अवैध रूप से हिरासत में लिया. ज्ञापन में आगे कहा गया, "कई छात्र तो मुख्य विरोध स्थल तक पहुंचे भी नहीं थे. उन्हें मेट्रो स्टेशनों, सार्वजनिक सड़कों और सीधे उनके घरों से अवैध रूप से उठा लिया गया. जिस दिन यह कार्रवाई की गई, यानी 22 जुलाई 2026 को, मुंबई में बिना किसी कानूनी निषेधाज्ञा (धारा 144) लागू हुए और बिना किसी ठोस कानूनी आधार के केवल संदेह के आधार पर छात्रों को हिरासत में लिया गया. इतना ही नहीं, शिवाजी पार्क, धारावी, चेंबूर और अन्य पुलिस स्टेशनों में छात्रों के खिलाफ झूठे मामले (एफआईआर) दर्ज किए गए हैं."
इसमें कहा गया कि पुलिस अधिकारी बिना किसी अदालती आदेश या कानूनी अधिकार के छात्रों के व्यक्तिगत मोबाइल फोन जबरन एक्सेस कर रहे हैं. साथ ही, छात्रों को अपने मोबाइल फोन से 'लाइव लोकेशन' भेजने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जो उनके मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है.

