सुप्रीम कोर्ट ने यूपीआई एमडीआर पर सरकार से पूछा: यदि यह न टैक्स है न शुल्क, तो फिर यह ‘जब्ती’ क्या है?

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (28 सितंबर, 2026) को ₹2,000 से अधिक के निर्दिष्ट यूपीआई व्यक्ति-से-व्यापारी (पर्सन-टु-मर्चन्ट) लेनदेन पर व्यापारियों से 0.4% शुल्क वसूलने के सरकार के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने की याचिका खारिज कर दी.

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने भारत सरकार, भारतीय रिज़र्व बैंक और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) को उस याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें आरोप लगाया गया है कि यूपीआई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क से लोग फिर से नकद लेनदेन की ओर लौटेंगे, जो कि काले धन का कारण बनेगा.

लेकिन अदालत ने 14 सितंबर, 2026 की अधिसूचना के कार्यान्वयन पर अंतरिम रोक लगाने की याचिकाकर्ता अंजन दत्ता की बार-बार की गई अपीलों को खारिज कर दिया. पीठ ने सरकार, केंद्रीय बैंक और एनपीसीआई को निर्देश जारी किए, जिन्होंने 15 अक्टूबर, 2026 से यूपीआई एमडीआर शुल्क लागू करने का प्रावधान किया है.

कृष्णदास राजागोपाल की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरमन से जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने पूछा, "हम आपकी अधिसूचना के कानूनी पहलू पर हैं. यदि यह न तो कोई टैक्स है और न ही शुल्क, तो इस जब्ती को लागू करने का कार्यपालकीय दायरा क्या है? हम एक हलफनामे में इसका स्पष्टीकरण चाहते हैं... यदि यह शुल्क नहीं है, तो इसका स्वरूप क्या है?"

वेंकटरमन ने तर्क दिया, "यह अभी लागू होना बाकी है. इसके 15 अक्टूबर को लागू होने की संभावना है. मुझे यह बताना है कि गेटवे का उपयोग करने वाले 96% लोगों को इससे छूट दी गई है. शेष 4% में से, आवश्यक सेवाओं के लिए शुल्क ₹5 पर सीमित किया गया है. इसमें एक मूल्य सीमा भी है — व्यापारी के लिए ₹75,000 से अधिक के किसी भी लेनदेन पर अधिकतम शुल्क ₹300 तय है. इन सभी सीमाओं के साथ संग्रह शुल्क 0.5% से भी कम है."

पीठ ने उत्तरदाताओं को अपने जवाब-हलफनामे दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया.

याचिका में भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007  की संशोधित धारा 10A की संवैधानिक वैधता को भी चुनौती दी गई है. इसमें आरोप लगाया गया है कि यह कार्यपालिका को यह तय करने का अनियंत्रित अधिकार देती है कि किन इलेक्ट्रॉनिक भुगतान तरीकों को शून्य-शुल्क सुरक्षा प्राप्त होगी. इस संदर्भ में, याचिकाकर्ता ने ध्यान दिलाया कि रुपे (RuPay) डेबिट कार्ड के लिए शून्य-शुल्क सुरक्षा बिना किसी मौद्रिक सीमा के जारी रहेगी.

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