वीआईपी के प्रमुख मुकेश सहनी ने बोला हमला, कहा- ‘ज्ञानेश कुमार जेल भेजे जाने वाले पहले व्यक्ति होंगे’
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज को लेकर छिड़े भारी विवाद के बीच, बिहार में महागठबंधन के घटक दल विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के प्रमुख मुकेश सहनी ने चुनाव आयोग प्रमुख पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि अगर उन्हें एक खून (हत्या) माफ कर दिया जाए, तो वे जिस पहले व्यक्ति को गोली मारेंगे, वह ज्ञानेश कुमार होंगे. हालांकि, इसी सांस में उन्होंने यह भी कहा, "हम क्या कर सकते हैं, हम कानून का पालन करने वाले नागरिक हैं जो संविधान का सम्मान करते हैं."
‘द हिंदू’ में अमरनाथ तिवारी की रिपोर्ट के अनुसार, बॉलीवुड के पूर्व सेट डिजाइनर सहनी ने 2018 में विकासशील इंसान पार्टी का गठन किया था. वे अत्यंत पिछड़ा वर्ग के तहत आने वाले निषाद और मल्लाह (मछुआरों और नाविकों) समुदायों का प्रतिनिधित्व करने का दावा करते हैं, जिसमें मछुआरों की लगभग 20 उप-जातियां शामिल हैं जो पारंपरिक रूप से अपनी आजीविका के लिए नदियों पर निर्भर रही हैं. बिहार की आबादी में इस जाति की हिस्सेदारी 9% के करीब है. उन्हें 'सन ऑफ मल्लाह' के नाम से भी जाना जाता है और वे अपने राजनीतिक पल्टीमार (राजनीतिक रुख बदलने वाले) रवैये के लिए भी चर्चित रहे हैं.
उन्होंने कहा, “चुनाव आयोग भाजपा का एक अंग बन गया है. और मैं ज्ञानेश कुमार से कहना चाहता हूं कि वक्त हमेशा एक जैसा नहीं रहता. थोड़ी शर्म करो — आप देश के संविधान के साथ खिलवाड़ कर रहे हो. अगर मुझे एक खून माफ कर दिया जाए, तो मैं जिस पहले आदमी को गोली मारूंगा, वह ज्ञानेश कुमार होगा!”
सहनी यहीं नहीं रुके, उन्होंने आगे कहा कि “आने वाले समय में ज्ञानेश कुमार से सांठगांठ करने वाले लोग भी जेल जाएंगे, किसी को बख्शा नहीं जाएगा. 2029 में कांग्रेस नेता राहुल गांधी जी के नेतृत्व में देश में सरकार बनेगी और ज्ञानेश कुमार जेल भेजे जाने वाले पहले व्यक्ति होंगे.”
प्रधानमंत्री पर "देश में लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं" को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने दावा किया, “उन्हें कोई नहीं बचा पाएगा, मोदी जी भी नहीं. वास्तव में, मोदी जी भी जेल जा सकते हैं.”
हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल और बिहार विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए (जिनमें भाजपा का पलड़ा भारी रहा था) सहनी ने दावा किया, “हमारे देश की सर्वोच्च सत्ता, अंतिम निर्णयकर्ता — यानी प्रधानमंत्री — यह सब प्रायोजित कर रहे हैं. लोकतंत्र को कुचला जा रहा है... लेकिन चुनाव नेताओं के लिए नहीं होते, चुनाव इस देश की जनता के होते हैं. अगर कोई नेता काम करने में विफल रहता है, तो जनता के पास उसे सत्ता से उखाड़ फेंकने की संप्रभु शक्ति होती है.”
इससे पहले, चुनाव आयोग ने कहा था कि उसके सदस्यों द्वारा की गई टिप्पणियां और सवाल सामान्य आंतरिक कामकाज का हिस्सा थे. चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया था कि आयोग के अंतिम निर्णय "सर्वसम्मत" थे.

