ब्लूटूथ हैक से ठप हो रहे दिल्ली के ई-रिक्शा, 1,000 रुपये की कमाई घटकर 600 रुपये रह गई

दिल्ली की सड़कों पर हजारों ई-रिक्शा चालकों के सामने इन दिनों एक नई और अप्रत्याशित समस्या खड़ी हो गई है. ब्लूटूथ आधारित मोबाइल ऐप के जरिए कुछ लोग ई-रिक्शा की बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (बीएमएस) से जुड़कर चलते वाहन को बीच सड़क में ही बंद कर दे रहे हैं. इससे न सिर्फ चालकों की रोज़ी-रोटी प्रभावित हो रही है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा और सड़क पर यातायात व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई है.

‘इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक, 20 वर्षीय अनु कुमार के साथ बुधवार को ऐसा ही हुआ. बंगला साहिब गुरुद्वारे के सामने उनका ई-रिक्शा अचानक बीच सड़क पर बंद हो गया. उन्होंने कई बार वाहन स्टार्ट करने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली. पीछे खड़े वाहनों की लंबी कतार लगातार हॉर्न बजाती रही. आखिरकार कुछ राहगीरों ने धक्का लगाकर ई-रिक्शा को सड़क किनारे पहुंचाया, लेकिन तब तक उनके यात्री बिना किराया दिए जा चुके थे.

अनु कुमार ने बताया कि वह वाहन को मैकेनिक के पास लेकर पहुंचे. उन्हें लगा कि बड़ी मरम्मत का खर्च उठाना पड़ेगा, लेकिन मैकेनिक ने सिर्फ एक मोबाइल ऐप खोला और कुछ सेकंड में ई-रिक्शा फिर से चालू हो गया. हालांकि राहत ज्यादा देर नहीं रही. उसी दिन उनका ई-रिक्शा तीन और बार बंद हुआ, जबकि अगले दिन भी ऐसा तीन बार हुआ. उन्होंने कहा, "जब दिन में तीन-तीन बार गाड़ी बंद हो जाए तो आखिर काम कैसे करें? मजबूरी में घर लौटना पड़ा."

अनु कुमार अकेले नहीं हैं. पिछले तीन दिनों से राजधानी के कई ई-रिक्शा चालक इसी समस्या का सामना कर रहे हैं. आरोप है कि कुछ लोग ब्लूटूथ सक्षम मोबाइल ऐप का इस्तेमाल कर ई-रिक्शा की बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम से जुड़ जाते हैं और दूर से ही बैटरी की बिजली आपूर्ति बंद कर देते हैं. इससे चलते वाहन अचानक रुक जाते हैं.

मामले की गंभीरता को देखते हुए शुक्रवार को केंद्र सरकार ने एप्पल और गूगल को निर्देश दिया कि बैट-बीएमएस, लोसिगी और ईपोच- ली-आयन जैसे कम से कम तीन बैटरी मैनेजमेंट ऐप अपने-अपने ऐप स्टोर से हटाए जाएं. इन ऐप के दुरुपयोग की लगातार शिकायतें सामने आ रही थीं.

इस समस्या का सबसे बड़ा असर ई-रिक्शा चालकों की आय पर पड़ा है. चूना मंडी से राम मनोहर लोहिया अस्पताल के बीच ई-रिक्शा चलाने वाले 24 वर्षीय मुखिया यादव ने बताया कि वह सामान्य दिनों में करीब 1,000 रुपये प्रतिदिन कमाते हैं. चार्जिंग और रखरखाव का खर्च निकालने के बाद उनके पास लगभग 800 रुपये बचते हैं. लेकिन पिछले दो दिनों से उनका ई-रिक्शा रोज़ चार बार बंद हुआ, जिसके कारण उनकी कुल कमाई घटकर सिर्फ 600 से 700 रुपये रह गई.

मुखिया यादव ने बताया कि कुछ लोग वाहन दोबारा चालू करने के बदले 200 रुपये मांगते हैं, जबकि एक व्यक्ति ने तो उनसे बीयर की मांग कर दी. उन्होंने कहा कि मजबूरी का फायदा उठाकर कुछ लोग चालकों से वसूली करने की कोशिश कर रहे हैं. शुक्रवार तक उन्होंने खुद बैट-बीएमएस ऐप डाउनलोड कर लिया और अब सड़क पर फंसे अन्य चालकों की मदद कर रहे हैं.

बैट-बीएमएस ऐप मूल रूप से चीन की कंपनी शेन्ज़ीन ग्रेनेर्गी, टेक्नोलॉजी ने ब्लूटूथ आधारित लिथियम-आयन बैटरियों की निगरानी के लिए विकसित किया था. इसका उद्देश्य बैटरी की चार्जिंग, वोल्टेज, तापमान, करंट, चार्जिंग साइकिल और बैटरी की स्थिति की जानकारी देना है. यह ऐप लगभग 15 मीटर की दूरी तक ब्लूटूथ लो एनर्जी के जरिए बैटरी से जुड़ सकता है.

विशेषज्ञों के अनुसार असली समस्या इन ऐप में नहीं, बल्कि कम कीमत वाले कई इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाले बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम की कमजोर सुरक्षा व्यवस्था में है. यदि बीएमएस पर्याप्त सुरक्षा से लैस न हो, तो कोई भी व्यक्ति सीमित दूरी से उससे जुड़कर बैटरी की बिजली आपूर्ति रोक सकता है, जिससे वाहन तुरंत बंद हो जाता है.

दिल्ली के परिवहन मंत्री पंकज कुमार सिंह ने कहा कि यह सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है और सरकार इस पर उचित कार्रवाई करेगी. उन्होंने बताया कि परिवहन विभाग पूरे मामले की जांच कर रहा है, जबकि दिल्ली पुलिस भी इसकी पड़ताल में जुटी है.

पश्चिमी दिल्ली के रमेश नगर में ई-रिक्शा चलाने वाले 55 वर्षीय किशोरी कुमार झा ने बताया कि पिछले दो दिनों से कारों में बैठे लोग और कुछ युवक लगातार ई-रिक्शा चालकों को परेशान कर रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि उनका वाहन बंद होने के बाद एक व्यक्ति ने उसे दोबारा चालू करने के बदले 500 रुपये मांगे. उनके अनुसार यह सीधे-सीधे जबरन वसूली का मामला है.

इलेक्ट्रिक व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग सोसाइटी के महासचिव राजीव तुली ने बताया कि बुधवार से ही दिल्ली के अलग-अलग इलाकों से बड़ी संख्या में शिकायतें मिलने लगी थीं. इसके बाद कई निर्माण कंपनियों ने हेल्पलाइन शुरू की हैं, जहां चालक फोन कर वाहन दोबारा चालू करने का तरीका जान सकते हैं. कई कंपनियों ने अपने आधिकारिक ऐप भी उपलब्ध करा दिए हैं ताकि चालक जरूरत पड़ने पर सुरक्षित तरीके से अपने वाहन को फिर से चालू कर सकें.

यह घटना केवल तकनीकी खामी का मामला नहीं है, बल्कि शहरी परिवहन, साइबर सुरक्षा और आम लोगों की आजीविका से जुड़ा गंभीर सवाल भी है. यदि इलेक्ट्रिक वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था समय रहते मजबूत नहीं की गई, तो भविष्य में इस तरह की घटनाएं और बड़े खतरे का कारण बन सकती हैं.

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