नेतन्याहू और मोदी: एक असंभावित गठबंधन का निर्माण
जैसे-जैसे ग़ज़ा को लेकर बढ़ते गुस्से के बीच इजरायल का वैश्विक अलगाव बढ़ रहा है, भारत के साथ उसके संबंध गहरे होते जा रहे हैं; जिसे प्रधानमंत्री मोदी और नेतन्याहू के समान विश्वदृष्टिकोण से मदद मिल रही है. ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ में माइकल स्टॉट, एंड्रेस शिपाणी और जेम्स शोटर ने लिखा है: जब अक्टूबर 2023 में हमास के आतंकवादियों ने इजरायल पर हमला किया, जिसमें लगभग 1,200 लोग मारे गए, तो इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को पहला फोन कॉल अमेरिका या यूरोप से नहीं, बल्कि नई दिल्ली से आया था. बातचीत की पुष्टि करने वाले इस मामले से वाकिफ दो लोगों के अनुसार, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना समर्थन व्यक्त करने के लिए इस बातचीत का उपयोग किया.
मोदी का यह कदम उस मजबूत बंधन का प्रतीक था जो पिछले 12 वर्षों में उनके और नेतन्याहू के बीच विकसित हुआ है. इसकी जड़ें इस बात में हैं कि दोनों नेता खुद को आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई के रूप में कैसे देखते हैं, साथ ही अपने देशों को अपने धार्मिक बहुसंख्यकों के लिए मातृभूमि के रूप में देखने के उनके दृष्टिकोण में भी हैं.
आलोचकों का तर्क है कि दोनों नेताओं में सत्तावादी प्रवृत्तियाँ भी समान हैं. दोनों ने अपने-अपने देशों में दक्षिणपंथी राष्ट्रवाद को बढ़ावा दिया है, जिसमें उनके आलोचकों का कहना है कि मुस्लिम और ईसाई अल्पसंख्यकों के प्रति शत्रुता तेज हुई है, स्वतंत्र संस्थानों की शक्ति कमजोर हुई है और विदेशी गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) की गतिविधियों को प्रतिबंधित किया गया है.
रक्षा और सुरक्षा साझेदारी
यह साझेदारी खुफिया जानकारी साझा करने, निगरानी, हथियारों की बिक्री, संयुक्त विकास, व्यापार, कृषि प्रौद्योगिकी और सांस्कृतिक संबंधों तक फैली हुई है. राजनयिकों का कहना है कि मोदी और नेतन्याहू नियमित रूप से बात करते हैं और एक-दूसरे को अच्छी तरह समझते हैं.
भारतीय सेना द्वारा व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली बराक एंटी-मिसाइल प्रणाली का निर्माण कई कंपनियों द्वारा संयुक्त रूप से किया जाता है, जिसमें इजरायल की राफेल और आईएआई और भारत की भारत डायनेमिक्स तथा भारत फोर्ज की एक सहायक कंपनी शामिल है. इजरायल की मोसाद जासूसी एजेंसी इस्लामी चरमपंथियों की तलाश में भारत की विदेशी खुफिया सेवा के साथ सहयोग करती है.
वैश्विक दृष्टिकोण में बदलाव
गौतम अडानी, जो भारत के सबसे अमीर व्यक्ति हैं, के पास इजरायल के एल्बिट के साथ काम करने वाली कंपनियां हैं, जो हेमीज़ टोही ड्रोन विकसित और निर्मित करती हैं. इसके अलावा इजरायल वेपन्स इंडस्ट्रीज भारत में छोटे हथियार बनाने के लिए सहयोग करती है.
भारतीय अधिकारी अब इजरायल की सेना के मुख्यालयों में लगातार आते-जाते रहते हैं. एक वरिष्ठ भारतीय सरकारी अधिकारी ने कहा, "रक्षा वास्तव में वह चीज़ है जो इजरायल के साथ इस रिश्ते को मजबूती देती है.
(यह हिंदी में अनुदित सारांश है. अंग्रेजी में पूरा लेख यहां पढ़ा जा सकता है.)

