इंदौर बैठक में युवाओं के असंतोष और सोशल मीडिया की चुनौती पर चर्चा करेगा आरएसएस

दीप्तिमान तिवारी के अनुसार, इंदौर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की आगामी अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल बैठक में युवाओं के असंतोष, बेरोजगारी, परीक्षा पेपर लीक और सोशल मीडिया की चुनौतियों पर प्रमुखता से चर्चा होगी. 2 से 4 नवंबर तक आयोजित होने वाली इस तीन दिवसीय बैठक का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी से संवाद साधना है, जिसकी राजनीतिक भाषा और एकजुट होने के तरीके पारंपरिक संगठनात्मक ढांचों से अलग हैं.

युवाओं की जायज चिंताएं और विदेशी हस्तक्षेप की आशंका

बैठक में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं और जारी आंदोलनों का विदेशी ताकतों द्वारा फायदा उठाए जाने की आशंका पर भी विचार किया जाएगा. संघ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के अनुसार, युवाओं की चिंताएं जायज हैं और सरसंघचालक मोहन भागवत ने इन्हें स्वीकार भी किया है. भागवत द्वारा विजयादशमी भाषण में विदेशी हस्तक्षेप की जताई गई आशंका को जायज युवा मुद्दों पर संघ के रुख में बदलाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.

बैठक में नए मीडिया प्लेटफॉर्म्स के कंटेंट, नशीली दवाओं का दुरुपयोग, बाहरी हस्तक्षेप, वैश्विक स्थिति और संघ के शताब्दी कार्यक्रमों की समीक्षा जैसे विषय शामिल रहेंगे.

तिवारी के मुताबिक, संघ युवाओं के गुस्से का समाधान दबाव के बजाय संवाद और निरंतर संपर्क के जरिए करने की योजना बना रहा है. वरिष्ठ पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि इतिहास गवाह है कि युवा असंतोष समय-समय पर हर देश में आता है. सही तरीका यही है कि उनकी बात सुनी जाए और बिना किसी जबरदस्ती के उनसे बातचीत जारी रखी जाए. संघ की 88,000 से अधिक शाखाओं में आज भी 60% उपस्थिति युवाओं की है.

नीट परीक्षा पेपर लीक जैसी घटनाओं पर संघ ने व्यवस्थागत कमियों को स्वीकार किया. अगस्त में हुई अखिल भारतीय समन्वय बैठक में भी संघ ने जोर दिया था कि युवाओं से संवाद केवल 'उपदेशात्मक' न होकर आपसी समझ पर आधारित होना चाहिए. शताब्दी वर्ष के युवा सम्मेलनों में लगभग 39.25 लाख युवाओं ने हिस्सा लिया.

सीजेपी आंदोलन और भागवत का रुख

परीक्षा अनियमितताओं को लेकर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के आंदोलन के दौरान 6 अगस्त को मोहन भागवत ने मुंबई में लगभग 2,000 'जेन-ज़ी' और 'जेन अल्फा' छात्रों से सीधा संवाद किया. उन्होंने विरोध प्रदर्शन को लोकतंत्र में सहमति बनाने का जायज माध्यम बताया और स्पष्ट कहा कि आंदोलन करने वाले युवाओं को 'देशद्रोही' नहीं कहा जाना चाहिए.

हालांकि, विजयादशमी संबोधन में उन्होंने चेतावनी दी कि व्यवस्था की कमियों से उपजे स्वाभाविक आंदोलनों का लाभ उठाकर देश में अस्थिरता, अलगाववाद और अराजकता फैलाने का प्रयास बाहरी ताकतें कर सकती हैं.

सोशल मीडिया और नए संचार माध्यमों की चुनौती

"नए मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट" पर प्रस्तावित चर्चा इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि युवाओं के विरोध प्रदर्शनों ने संघ परिवार के लिए संचार की एक नई चुनौती खड़ी कर दी है.

भाजपा, जिसने फेसबुक, एक्स और व्हाट्सएप के इर्द-गिर्द एक मजबूत राजनीतिक संचार तंत्र तैयार किया था, उसके लिए इंस्टाग्राम और शॉर्ट-फॉर्म वीडियो की राजनीतिक भाषा पर महारत हासिल करना कठिन साबित हो रहा है. सीजेपी खुद सड़कों पर उतरने से पहले नौकरियों और परीक्षा अनियमितताओं पर गुस्से को व्यक्त करने के लिए हास्य, व्यंग्य और पॉप-कल्चर संदर्भों का उपयोग करते हुए एक व्यंग्यात्मक सोशल-मीडिया माध्यम के रूप में शुरू हुई थी.

प्रदर्शनों के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा ने वर्टिकल वीडियो, अनौपचारिक प्रस्तुति और युवा-केंद्रित प्रारूपों के साथ अधिक स्पष्ट रूप से प्रयोग करना शुरू कर दिया. संसद के मानसून सत्र के दौरान युवा एनडीए सांसदों ने भी "डेलुलू", "फोमो" और "क्लॉक्ड इट" जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया.

यह चुनौती राजनीतिक संदेशों को केवल एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म पर ले जाने तक सीमित नहीं है. इंस्टाग्राम और उसके जैसे प्लेटफॉर्म हास्य, व्यंग्य, स्वाभाविकता और क्रिएटर-संचालित कंटेंट को बढ़ावा देते हैं—यह भाषा उस केंद्रीकृत और पॉलिश किए गए संदेश से काफी अलग है जिसे भाजपा ने पुराने सोशल-मीडिया इकोसिस्टम के माध्यम से सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया था. एसआईआर आंदोलन ने भी विरोध प्रदर्शनों और पुलिस कार्रवाई के इर्द-गिर्द मीम्स, वीडियो, व्यंग्य और ऑनलाइन गेम तैयार किए हैं.

दिल्ली में 'राष्ट्र वंदनम' कार्यक्रम

इसके साथ ही संघ 29 नवंबर को दिल्ली के रोहिणी में बड़े पैमाने पर 'राष्ट्र वंदनम' कार्यक्रम की तैयारी कर रहा है. इस कार्यक्रम को मोहन भागवत संबोधित करेंगे, जिसमें 1 लाख से अधिक स्वयंसेवकों और अतिथियों की भागीदारी का अनुमान है. यह आयोजन शताब्दी समारोह के साथ-साथ वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में एक महत्वपूर्ण शक्ति प्रदर्शन भी माना जा रहा है.

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