दुनिया की दो-तिहाई खनन इकाइयों पर गंभीर जल संकट का खतरा: आईसीएमएम रिपोर्ट
दुनिया भर में खनन और धातु क्षेत्र की करीब दो-तिहाई इकाइयां कम से कम एक गंभीर जल जोखिम का सामना कर रही हैं. इंटरनेशनल काउंसिल ऑन माइनिंग एंड मेटल्स (आईसीएमएम) की नई रिपोर्ट के मुताबिक, 65.7 प्रतिशत खनन और धातु इकाइयां जल तनाव, सूखा, बाढ़, जल संसाधनों में कमी या साल-दर-साल वर्षा और जल उपलब्धता में बदलाव से जुड़े जोखिमों की चपेट में हैं.
‘डाउन टू अर्थ’ के मुताबिक, 22 जुलाई को प्रकाशित 'ग्लोबल माइनिंग एंड मेटल्स वाटर डेटासेट' में दुनिया के खनन और धातु क्षेत्र में जल जोखिम का व्यापक आकलन किया गया है. आईसीएमएम के मुताबिक, यह विभिन्न खनिजों और धातुओं को शामिल करते हुए इस क्षेत्र में जल जोखिम का पहला व्यापक विश्लेषण है.
इसके लिए ग्लोबल माइनिंग डेटासेट को वैश्विक जल संबंधी आंकड़ों के साथ जोड़कर 148 देशों और क्षेत्रों की 12,000 से अधिक खनन और धातु इकाइयों का अध्ययन किया गया. इसमें बाढ़, सूखा, जल तनाव, जल संसाधनों में कमी और साल-दर-साल जल उपलब्धता में बदलाव जैसे पांच प्रमुख जोखिमों का आकलन किया गया.
जल तनाव सबसे बड़ा खतरा
रिपोर्ट के मुताबिक, खनन और धातु उद्योग के सामने सबसे आम खतरा जल तनाव है. करीब 38 प्रतिशत इकाइयां ऐसे नदी बेसिन में स्थित हैं, जहां पानी के लिए गंभीर प्रतिस्पर्धा है या परिस्थितियां अत्यधिक शुष्क हैं.
सूखा दूसरा सबसे व्यापक जल जोखिम है और दुनिया की 27 प्रतिशत खनन एवं धातु इकाइयां इसकी चपेट में हैं. अफ्रीका और पश्चिम एशिया में स्थिति सबसे गंभीर है, जहां 81 प्रतिशत इकाइयों पर सूखे का उच्च या अत्यधिक उच्च जोखिम है.
जाम्बिया, घाना और उज्बेकिस्तान में सभी खनन इकाइयां उच्च सूखा जोखिम वाले क्षेत्रों में हैं. दक्षिण अफ्रीका में भी 96 प्रतिशत इकाइयां इस जोखिम की चपेट में हैं.
इसके मुकाबले बाढ़ का जोखिम कम है. वैश्विक स्तर पर 14 प्रतिशत इकाइयां उच्च बाढ़ जोखिम का सामना कर रही हैं. हालांकि, एल्युमिना, एल्युमिनियम, स्टील और मोलिब्डेनम उत्पादन से जुड़ी 24 प्रतिशत से अधिक इकाइयों पर गंभीर बाढ़ का खतरा है.
मध्य भारत भी जल जोखिम के हॉटस्पॉट में
रिपोर्ट में जल जोखिम के कई प्रमुख हॉटस्पॉट की पहचान की गई है. इनमें पश्चिमी अमेरिका, चिली, पेरू, दक्षिणी अफ्रीका, उत्तरी चीन, मध्य भारत और पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं. इन क्षेत्रों में एक साथ कई तरह के जल जोखिम मौजूद हैं, हालांकि प्रत्येक क्षेत्र में जोखिमों का स्वरूप अलग है.
दुनिया की करीब 16 प्रतिशत खनन और धातु इकाइयां साल-दर-साल जल उपलब्धता में उच्च या अत्यधिक उच्च बदलाव का सामना करती हैं. ओशिनिया में यह जोखिम सबसे अधिक है, जहां 74 प्रतिशत इकाइयां इसकी चपेट में हैं. अफ्रीका और पश्चिम एशिया में यह आंकड़ा 28 प्रतिशत है.
ऊर्जा परिवर्तन के लिए बढ़ सकती है चुनौती
यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है, जब स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों और बुनियादी ढांचे के लिए महत्वपूर्ण खनिजों की वैश्विक मांग बढ़ रही है. ऐसे में खनन क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता ऊर्जा परिवर्तन की रफ्तार के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है.
आईसीएमएम की डेटा एंड रिसर्च निदेशक एम्मा गेगन ने कहा, "हमारे शोध से पता चलता है कि खनन और धातु क्षेत्र के लिए पानी पहले से ही एक महत्वपूर्ण मुद्दा है."
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि व्यापक अर्थव्यवस्था में जल जोखिम को बेहतर तरीके से समझकर उसका प्रबंधन नहीं किया गया, तो ऊर्जा परिवर्तन के रास्ते में यह एक बड़ी बाधा बन सकता है.
रिपोर्ट में सरकारों, निवेशकों और उद्योगों से जल प्रबंधन को मजबूत करने और महत्वपूर्ण खनिजों की बढ़ती मांग को देखते हुए दीर्घकालिक रणनीतिक योजनाओं में जल जोखिम को शामिल करने की जरूरत बताई गई है.

